बिलासपुर में श्री कान्हा प्योर वेज रेस्टोरेंट की तलाश…बिल में ऐड्रेस के नाम पर लिखा है बिलासपुर, फोन नम्बर भी नहीं… गूगल नें कहा-मुझे जानकारी नहीं,प्राचार्य नें कहा CAC से पूछिए,संकुल केंद्र में चल रहा एक और फर्जीवाड़ा उजागर…एक से एक फंडा अपना रहे संकुल प्राचार्य और शैक्षिक संकुल समन्वयक!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। बिलासपुर में श्री कान्हा प्योर वेज रेस्टोरेंट की तलाश कर के हम थक गए लेकिन मिला नहीं…बिल में ऐड्रेस के नाम पर लिखा है बिलासपुर, फोन नम्बर भी नहीं… गूगल नें कहा-मुझे जानकारी नहीं,23 नवंबर 2022 को संकुल केंद्र कोनी जिला बिलासपुर में 56 नग कटलेट, 28 पीस मीठा, 28 चाय और 28 पीस पानी बोतल मंगवाया गया था। वहीं 15/02/2024 को भी 20 नग भोजन पैकेट और 20 नग चाय मंगाना बताया गया है। कुल 5240 रुपए खर्च किया गया है। केश बुक में भी इस बात का जिक्र किया गया है लेकिन केश बुक में पेज नम्बर 9,वाउचर नंबर 18,तारीख 23/02/2023 में किस मद से इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया है लेकिन चाय नाश्ता का जिक्र किया गया है। बिल और केश बुक में इंद्राज तारीख और वर्ष में अंतर है।

ये मामला कार्यालय कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक, समग्र शिक्षा,बिलासपुर (छ. ग.) के अंतर्गत संचालित 198 संकुल स्रोत केंद्र में एक (समग्र शिक्षा) शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोनी, जिला बिलासपुर का है। यहाँ बतौर संकुल प्राचार्य श्रीमती अर्चना मिश्रा पदस्थ हैं और उन दिनों जब गड़बड़ी की गई,तत्कालीन संकुल समन्वयक गौकरण उपाध्याय थे।

कौन देता है राशि और क्यों :-
राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा यह राशि समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट में प्राप्त स्वीकृति के अनुसार सीआरसी अनुदान राशि प्राप्त होती है।
मेंटेनेंस ग्रांट:-
जिसका उपयोग संकुल स्रोत केंद्र में भवन का रख रखाव/रंग रोगन/शौचालय मरम्मत/सफाई आदि हेतु जारी किया जाता है।
टीएलएम ग्रांट:-
जिसका उपयोग शिक्षक प्रशिक्षण के समय अधिगम(शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति हासिल करना) सामग्री क्रय करने हेतु किया जा सकता है।
मीटिंग टीए:-
समग्र शिक्षा हेतु आयोजित बैठकों में उपस्थिति तथा शाला व संकुल केंद्र की मॉनिटरिंग हेतु की गई यात्राओं के यात्रा देयक का भुगतान शासन के नियमानुसार इस मद से किया जाता है।
कंटलजेन्सी ग्रांट:-
इस राशि का उपयोग स्टेशनरी, विधुत देयक,मरम्मत कार्य, कम्प्यूटर सामग्री एवं अन्य आवश्यक कार्यालयीन उपयोग सामग्री क्रय में किया जाय। राशि जिले के 198 संकुलों को एक साथ जारी की जाती है। इसमें कहीं भी चाय नाश्ता, भोजन पानी और गुलदस्ता टेंट,आदि पर खर्च किए जाने का कोई जिक्र नहीं है। बल्कि राशि का व्यय किए जाने के पश्चात उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने का उल्लेख किया गया है।

दूसरी ओर संकुलों को प्राप्त राशि आहरण हेतू नियम विरुद्ध फ़र्जी बिल (देयक)के माध्यम से भोजन और नाश्ता पानी की बोतल टेंट का बिल,मिठाई, परिवहन के नाम पर फर्जी बिल,इसलिए कि इन बिलों में ना तो दुकानदार का पूरा एड्रेस प्रूफ है, ना फोन नम्बर ना ही जीएसटी नम्बर कुल मिलाकर बिल को पहली नजर में देखने से पता चलता है कि फ़र्जी बिल है। देयक में कार्यक्रम का नाम भी इंद्राज नहीं है।

खबर खास की टीम नें कोनी क्षेत्र का दौरा किया एक एक होटल में जाकर पूछताछ की, अन्य दुकानों में पूछा, बिल दिखलाया किसी ने भी श्री कान्हा प्योर वेज रेस्टोरेंट होटल का नाम नहीं सुना था ना ही आस पास होटल के होने की जानकारी दी मतलब उन्होंने भी बिल के फर्जी होने पर मुहर लगा दी।

जिले में 198 और शहरी स्रोत बिलासपुर के 15 संकुलों में चल रहे फर्जीवाड़ा की कहानी में एक और संकुल की सच्चाई सामने निकल कर आना अपने आप में एक बड़ा सवाल है कि शिक्षा के मंदिर में जहाँ विद्यार्थियों को सच बोलने की तालीम दी जाती है वहाँ के प्राचार्य और संकुल समन्वयक,दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से झूठा बिल प्रस्तुत कर शासन के खजाने को चूना लगाया जा रहा है अनुदान की राशि का बेखौफ गबन किया जा रहा था।

पड़ताल:-
हमनें जिला समग्र अधिकारी ओम पांडेय से फोन पर उनका पक्ष जानना चाहा किन्तु उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
हमनें वासुदेव पांडेय URCC से बिल भेजकर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका साफ कहना था कि मैं नहीं जानता ऐसा कोई होटल शहर में है।
हमनें संकुल प्राचार्य से बिल भेजकर बिल की सच्चाई पूछा तो उनका कहना था कि ये बिल तो पूर्व CAC उपाध्याय द्वारा लाया गया था आप उन्हीं से पूछ लीजिए। जबकि दोनों के सयुंक्त हस्ताक्षर से भुगतान किया गया है।
सफेद झूठ
संकुल समन्वयक गौकरण उपाध्याय नें कहा कि कोनी में होटल था अब टूट गया है होटल को मैं देखा नहीं हूँ, चाय नाश्ता भोजन के लिए लोगों को भेज देता था वो लेकर आ जाते थे बिल भुगतान भी नगद किया गया है।

तो देखा आपने एक से एक फंडा अपना रहे संकुल प्राचार्य और शैक्षिक संकुल समन्वयक ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस समग्र शिक्षा के प्रमुख कलेक्टर बिलासपुर हैं उन्हीं के फंड में बेखौफ सेंध लगा कर फ़र्जी बिल लगा राशि आहरण किया जा रहा है!
कलेक्टर बिलासपुर को चाहिए कि कोनी संकुल में पिछले 5 सालों में समग्र हेतु जारी राशि की सूक्ष्मता से जाँच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करें ताकि भविष्य में कोई भी शासकीय योजनाओं के नाम पर आई राशि का दुरुपयोग करनें की हिमाकत ना करें।
क्रमशः ……..!



