मंत्री जी…”सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर प्रधान पाठक द्वारा जानकारी देने से इनकार और लिखा दी दस्तावेज चोरी की झूठी रिपोर्ट” प्रथम अपील की दूसरी सुनवाई में उजागर हुआ सनसनीखेज मामला…BEO और DEO की उदासीनता उजागर!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर।शासकीय प्राथमिक शाला चिलहटी में RTI के दस्तावेज चोरी का संदिग्ध मामला सामने आया है वही विलंब से FIR और प्रधानाध्यापक द्वारा जमा किए गए आवेदन ने पूरे प्रकरण को सवालों के घेरे में ला दिया है।
मामला क्या है?
एक आवेदक ने 28 जुलाई 2025 को कार्यालय विकास खंड शिक्षा अधिकारी, बिल्हा में RTI आवेदन दाखिल किया था। इस आवेदन में शासकीय प्राथमिक शाला चिलहटी से संबंधित वर्षवार कैश बुक, बिल-वाउचर की प्रतियां, अनुदान राशि के उपयोग से पूर्व हुई शाला प्रबंधन समिति (SMC) की बैठक का विवरण, तथा सामग्री क्रय के बाद भंडारण पंजी (स्टॉक रजिस्टर) की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं।

RTI आवेदन जमा होने के 30 दिनों बाद भी प्रधानाध्यापक (एचएम) ने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। 04/09/2025 को आवेदक नें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर में अपील कर दिया।

अपीलीय प्रकरण की पहली सुनवाई 26/09/2025 को भी किसी तरह का कोई दस्तावेज नहीं पेश किया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी
दूसरी सुनवाई 13/10/2025 को होने पर जन सूचना अधिकारी द्वारा एक चौंकाने वाला लिखित कथन प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि 15 सितंबर 2025 को उनके शाला कार्यालय कक्ष का ताला तोड़कर अलमारी में रखे सारे दस्तावेज चोरी कर लिए गए हैं।

साहब गौर से पढ़िए इस अपील के दौरान दिए गए दस्तावेज को आवेदक नें आवेदन पर 09/09/25 को अपने हस्ताक्षर और सील से विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी को देकर पावती 10/10/25 को लिया है और प्रधान पाठक लिख रहे हैं कि दिनाँक 15/09/25 को शाला के कार्यालय कक्ष का ताला तोड़कर अलमारी से सारे दस्तावेज की चोरी हो गई है इसलिए दस्तावेज देने में असमर्थ हूँ।

ऐसा लगता है कि प्रधान पाठक ने अधिकारियों के साथ साठगांठ कर यह दस्तावेज सौंपा था तभी तो ना ही जन सूचना अधिकारी ने आवेदन और FIR को पढ़ना ही जरूरी समझा ना ही अपीलीय प्रकरण की सुनवाई कर रहे जिला शिक्षा अधिकारी नें। प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया। पाठक FIR को जरूर पढ़ें।

यह संदेह का विषय है क्योंकि:
विलंब से FIR: प्रधानाध्यापक ने अपनी चोरी की सूचना का कथन 15 सितंबर 2025 को कार्यालय में जमा किया, लेकिन संबंधित चोरी की प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) सरकंडा थाने में 15 सितंबर को नहीं, बल्कि उसके तीन दिन बाद 18 सितंबर 2025 को दर्ज कराई गई। चोरी जैसी गंभीर घटना की सूचना तत्काल देनी चाहिए थी, यह तीन दिन का विलंब प्रधानाध्यापक की तत्परता पर सवाल खड़े करता है।
पद का उल्लंघन: FIR प्रधानाध्यापक द्वारा नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक अन्य शिक्षक (LB संवर्ग के शिक्षक राजेन्द्र सरवंश) द्वारा कराई गई। नियमानुसार, किसी भी सरकारी संपत्ति की चोरी होने पर तत्काल संबंधित संस्था प्रमुख (प्रधानाध्यापक) को FIR दर्ज करानी चाहिए। संस्था प्रमुख का अपना कर्तव्य किसी अन्य शिक्षक से करवाना प्रशासनिक नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है और घटना की प्रामाणिकता पर संदेह पैदा करता है।

विकास खंड अधिकारी को सूचना में भी विलंब: आनंद प्रकाश उपाध्याय प्रधानाध्यापक ने विकास खंड शिक्षा अधिकारी को चोरी होने की लिखित सूचना भी 10 अक्टूबर 2025 को दी, जबकि चोरी कथित रूप से 15 सितंबर को हुई थी। इस 25 दिन के विशाल अंतराल के बाद अधिकारी को सूचना देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
जांच की मांग
यह पूरा घटनाक्रम सीधे तौर पर दर्शाता है कि RTI के तहत मांगी गई संवेदनशील जानकारी को जानबूझकर गायब करने का प्रयास किया गया हो सकता है। भृष्टाचार को छिपाने के उद्देश्य से ऐसा षड्यंत्र रचा गया होगा। नहीं तो अन्य कीमती समान को छोड़ कर चोर कागज के दस्तावेज लेकर ही क्यों गए।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए
प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई: प्रधानाध्यापक द्वारा FIR में जानबूझकर किए गए विलंब और कर्तव्य के उल्लंघन के लिए तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच शुरू किया जाना चाहिए।
FIR की गंभीरता से जांच: पुलिस को 15 सितंबर और 18 सितंबर के बीच के अंतराल की गहन जांच करनी चाहिए।
दस्तावेजों की उपलब्धता: यह जांच होनी चाहिए कि क्या चोरी किए गए दस्तावेजों की कोई अन्य प्रतिलिपि संकुल या विकास खंड कार्यालय में उपलब्ध है, ताकि RTI आवेदक को सूचना मिल सके।

बहरहाल बिलासपुर यह मामला केवल दस्तावेज चोरी का नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन और सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही से जुड़ा है। प्रशासनिक लापरवाही करने वाले और भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
सवाल:-
शिक्षा विभाग में सूचना के अधिकार अधिनियम कानून का पालन नहीं किया जा रहा है, क्यों एक शिक्षक सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर झूठी रिपोर्ट लिखा कर विभाग की क्षवि धूमिल करनें का प्रयास कर रहा है?



