धुंधले काँच के बने केबिन में बैठने वाले खनिज अधिकारी और उनके मातहत…सरकार के सुशासन तिहार पर लगा रहे बट्टा!
Satyendra VermaMay 9, 2026
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खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। सरकारी दफ्तर वह भी जिला के कलेक्टर कार्यालय के ठीक पीछे स्थित खनिज विभाग का दफ्तर यहाँ आने वाले आम आदमी के लिए जिज्ञासा का केंद्र बिंदु है यहाँ पदस्थ सरकारी अधिकारियों के लिए धुंधले कांच के बने केबिन हैं जिसमें से यहाँ आए आगंतुकों को साफ साफ दिखलाई ही नहीं देता कि अधिकारी अंदर बैठे हैं या नहीं! जबकि धुंधले काँच वाले केबिन में बैठना शासन के नियमानुसार सही भी नहीं है बावजूद इसके अधिकारी बैठते हैं। मतलब ऐसा है कि शायद कलेक्टर बिलासपुर भी इस कार्यालय का कभी निरीक्षण ही नहीं किया हो… नहीं तो धुंधले कांच वाला केबिन ही नहीं होता?
इस तस्वीर को गौर से देखिए इस धुंधले काँच वाले केबिन में जिसके आर पार स्पष्ट रूप से दिखलाई ही नहीं देता है खनिज विभाग बिलासपुर के प्रमुख अधिकारी के. के. गोलघाटे उप संचालक (खनिज प्रशासन) का अपारदर्शी केबिन है। अब सरकार भले ही सुशासन की बात कहे लेकिन तस्वीरों में सच उजागर हो रहा है।
इस कार्यालय में आए दिन अवैध खनन, परिवहन जैसे दर्जनों मामले आते रहते हैं कोई फाइन पटाने आता है कोई चालान पटा कर कोई शिकायत लेकर। ऐसे में सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए, अधिकारियों को आम जनता के साथ सीधे संपर्क में रहना चाहिए। भारत सरकार के केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के अनुसार, सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के केबिन में पारदर्शी कांच का उपयोग करना चाहिए, ताकि आम जनता को पता चल सके कि अधिकारी हैं या नहीं,हैं तो क्या कर रहे हैं किसके साथ बैठे हुए हैं।
इसके अलावा, सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत, सरकारी अधिकारियों का धुंधले कांच के बने केबिन में बैठने से आम जनता को जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है, जो कि RTI अधिनियम के उद्देश्य के विरुद्ध है।
ये तस्वीर खनिज इंस्पेक्टर राजू यादव के केबिन की है इस धुंधले ग्लास वाले केबिन को लेकर यहाँ आने वाले आगंतुकों की अलग अलग राय है
01. भ्रष्टाचार…. धुंधले कांच के बने केबिन में बैठने वाले अधिकारी आम जनता से कुछ छुपाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे क्या कर रहे हैं,किसके साथ बैठे हैं, हैं कि नहीं। जो कि भ्रष्टाचार का एक रूप हो सकता है।
02 अनुत्तरदायित्व…. धुंधले कांच के बने केबिन में बैठने वाले अधिकारी आम जनता के प्रति अनुत्तरदायी हैं और उनकी जरूरतों को नजर-अंदाज कर रहे हैं।
03 पारदर्शिता की कमी… धुंधले कांच के बने केबिन में बैठने वाले अधिकारी पारदर्शिता की कमी को दर्शाते हैं और आम जनता को जानकारी प्रदान करने में असहयोगी हैं।
04 सरकारी जवाबदेही की कमी… धुंधले कांच के बने केबिन में बैठने वाले अधिकारी सरकारी जवाबदेही की कमी को दर्शाते हैं और आम जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।
लोग नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार 2026 चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान करना है। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा, जिसमें 3 चरणों में आयोजित किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत, ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां आम जनता अपनी समस्याएं दर्ज करा सकती है। इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन पोर्टल और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए भी आवेदन प्राप्त किए जा रहे हैं।
इस अभियान का उद्देश्य शासकीय कार्यों में पारदर्शिता लाना, जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करना, और आम जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करना है।
लेकिन साहब लोगों से सीधा संवाद का रास्ता धुंधले काँच के बने केबिन से होकर जाता है और ऐसे में दूर दराज से कोई काम,कोई समस्या, या फिर कोई शिकायत लेकर आया भोला भाला आम आदमी इस धुंधले काँच के केबिन के अंदर देख ही नहीं पाता, झिझक में घुस नहीं पाता और अंदर बैठा अधिकारी भी अपनी इस धुंधली कुव्यवस्था की सफलता पर अंदर ही अंदर मंद मंद मुस्कुरा देता है!