वेंटिलेटर पर अरपा नदिया के प्राण… रेत माफिया और खनिज अधिकारियों की सांठ -गांठ से लाखों के राजस्व का हो रहा नुकसान!
Satyendra VermaMay 8, 2026
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खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। जहाँ एक ओर खनिज विभाग के वाहन में बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों को देखते ही रेत से भरी हाइवा का चालक बीच सड़क पर वाहन छोड़ कर भाग गया कि खबर मीडिया की सुर्खियां बन गई दूसरी ओर वही खनिज विभाग के जिम्मेदार खनिज अधिकारियों की उदासीनता नकारेपन का जीता जागता उदाहरण है कि कोटा विकासखंड की स्वीकृत रेत खदान सोढाखुर्द में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर भारी मशीनों से दिन-रात रेत उत्खनन किया जा रहा है। नियमानुसार एक परिवहन के लिए वाहन को जारी रायल्टी पर्ची एक बार के परिवहन के लिए उपयोग किया जाता है लेकिन यहाँ वाहनों में रॉयल्टी पर्ची ही नहीं दी जाती अगर दिया गया है तो उसमें तारीख और समय वाहन चालक का नाम और वाहन का नंबर ही नहीं लिखा होता भरा होता। साहब इन रेत माफियाओं को खनिज अधिकारियों का डर क्यों नहीं!
हालात ऐसे हैं कि इन रेत खदान के अनुज्ञा धारक और अवैध रेत माफियायों के द्वारा जीवनदायिनी अरपा नदी का सीना साल दर साल छलनी होता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार खनिज विभाग के तनख्वाह खोर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
ऐसे में खनिज विभाग का MCDR खनिज संरक्षण और विकास नियम क्यों बनाया गया है रेत माफियाओं को संरक्षण देने!
अवैध उत्खनन और परिवहन इसलिए लिखा जा रहा है कि रेत खदान का स्वीकृत एरिया कागजों में अनुज्ञा में तो स्वीकृत होगा लेकिन धरातल में कहीं कुछ दिखलाई नही देता, रेत माफिया लीज एरिया छोड़ कर,जहाँ चाह रहे हैं वहाँ खोद रहे हैं, खनिज विभाग और खनिज प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली का यह ज्वलंत उदाहरण है, इन पर गंभीर सवाल उठना लाजमी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत खदान की स्वीकृति भले ही नियम-कायदों से गई हो, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग है। खुलेआम पोकलेन और भारी मशीनों से चिन्हांकित स्वीकृत एरिया से हटकर नदी की धारा के बीचों बीच उत्खनन किया जा रहा है। इसके बावजूद न तो राजस्व विभाग का अमला और न ही खनिज विभाग प्रभावी कार्रवाई करता दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ जल संसाधन और वन विभाग तो धृतराष्ट्र बनकर बैठे हुए हैं,और पुलिस थाना और चौकी प्रभारी को इतनी फुर्सत कहाँ है!
ग्रामीणों का कहना है कि सोढाखुर्द के अलावा नगोई, नगदहरा, बिटकुली, रिगरिगा, मोहली और रतखंडी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन बेख़ौफ़ और बदस्तूर जारी है।
जानकर कहते हैं कि लगातार हो रहे खनन,अवैध खनन और परिवहन से अरपा नदी का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है और आसपास के गांवों का भूजल स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक कई इलाकों में जलस्तर 300 से 450 फीट से भी अधिक नीचे पहुंच चुका है, जिससे आने वाले समय में गंभीर जल संकट की आशंका बढ़ गई है।
लोगों का आरोप है कि रेत माफियाओं की मनमानी और जिम्मेदारों की अनदेखी से शासन को प्रति दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन खनिज विभाग केवल छोटे-मोटे मामलों में कार्रवाई कर औपचारिकता निभा रहा है। वास्तविक अवैध कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं होने से विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में है।
माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों और अरपा संरक्षण को लेकर सामाजिक संगठनों की चिंता के बावजूद अवैध उत्खनन लगातार जारी होना सवाल खड़ा कर रहा कि आखिर रेत माफियाओं को खनिज विभाग के कौन अधिकारी कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है, जो खनिज नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि संचालक भौमकी तथा खनिकर्म द्वारा खनिज निरीक्षकों को अपने कार्यक्षेत्र के अधीन मुख्य एवं गौण खदानों का प्रत्येक 6 माह में निरीक्षण करना होता है यह देखने के लिए की खनन पट्टे में वर्णित नियम एवं शर्तों का पालन किया जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और खनिज विभाग इस गंभीर मामले में कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर अरपा नदी का अस्तित्व इसी तरह रेत माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध उत्खनन और परिवहन की भेंट चढ़ता रहेगा।