बिलासपुर

वरिष्ठ और कनिष्ठ में जाँच का खेला…गुरू के पीछे पड़ गया चेला…!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर में कनिष्ठ और वरिष्ठ लिपिक चयन को लेकर नूराकुश्ती मतलब उठा पटक जारी है। आरोप प्रत्यारोप के बीच एक खबर निकल कर आ रही है कि सहायक ग्रेड-2 से सहायक ग्रेड-1 पर पदोन्नति हेतू जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिनाँक 25/12/2025 को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित की गई थी। वह नियमों के विरुद्ध की गई थी।

जिसमें नियमों की अनदेखी करते हुए एक अकेला नाम का प्रस्ताव विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष प्रस्तुत कर पास किया गया था। नाम था जी एन द्विवेदी।

जबकि पदोन्नति समिति में छत्तीसगढ़ राजपत्र के नियमानुसार किसी एक पद पर पदोन्नति करनें के लिए एक अनुपात तीन मतलब 1:3 नाम वरिष्ठता क्रमानुसार नाम का प्रस्ताव रखा जाता है किंतु जिला शिक्षा अधिकारी नें जानबूझकर नियमों की अनदेखी करते हुए किसी अन्य की पदोन्नति पर मुहर लगा दी। जबकि जिला में जी एन द्विवेदी से वरिष्ठ सहायक ग्रेड-2 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोन लोहर्सि मस्तूरी में अपनी सेवाएं देते हुए विकास तिवारी अपनी पदोन्नति का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

आरोप है कि कुल मिलाकर नियमों के विरुद्ध गठित चयन समिति के सदस्यों नें नियमों की अनदेखी करते हुए कनिष्ठ को पदोन्नति दे दी।

अब यह भी जानना जरूरी है कि पदोन्नति समिति में कौन कौन पदाधिकारी शामिल थे। जानकारी के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक संचालक शिक्षा, उप संचालक संचालनालय रायपुर सहित तीनों के हस्ताक्षर विभागीय पदोन्नति प्रस्ताव में होना चाहिए था किन्तु इनके द्वारा अन्य दो प्राचार्य का भी विभागीय पदोन्नति समिति प्रस्ताव में हस्ताक्षर कराया गया। यहाँ सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन सभी अधिकारियों को नियमों का ज्ञान नहीं था या आर्थिक प्रलोभन देकर हस्ताक्षर कराया गया या दबाव बना कर हस्ताक्षर कराया गया, यह जाँच का विषय है।

इस मामले में एक बार फिर फिर शिकायती जाँच का धीमा खेल शिकायतकर्ता को रिटायरमेंट की दहलीज पर लाकर यह सोचने को मजबूर कर देगा कि न्यायधानी में न्याय की उम्मीद रिटायरमेंट की दहलीज पर लाकर भी न्याय ना दिला सका!

खैर विकास तिवारी बतलाते हैं कि 2022 में भी इसी तरह पदोन्नति का खेल खेला गया था उस समय भी शासन के बनाए नियमों की अनदेखी की गई थी जिसके चलते शासन स्तर पर जिला शिक्षा अधिकारी के खंड लिपिक द्वारा पदोन्नति मामले में सुनील यादव पर गलत पदोन्नति किए जाने की शिकायत हुई थी और जाँच बैठने से इन्हें दोषी पाया गया था किंतु आज दिनाँक तक संबंधित के विरुद्ध किसी भी प्रकार की वैधानिक कार्यवाही नहीं किए जाने एवं पदोन्नति निरस्त नहीं किए जाने से इनके हौसले में कई गुना बढ़ोतरी हुई और इसलिए पुनः इसी तरह की गलती डंके की चोट पर दोहराई गई है। जो शासन के गाल पर करारा तमाचा साबित हो रहा है।

कुल मिलाकर एक वरिष्ठ कर्मचारी द्वारा खुद को वरिष्ठ साबित करने,प्रमाण देने,बार बार उच्च अधिकारियों को अभ्यावेदन देने और लिखित शिकायत पत्र देने का काम किया जा रहा है बावजूद इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कोई भी कड़ा एक्शन लेने में गुरेज कर रहे हैं।

बहरहाल पदोन्नति मामले में शिकायत बाद 21 मई 2025 को जाँच जेडी कार्यालय में होने जा रही है दस्तावेज के साथ कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है उम्मीद है कि इस बार न्यायधानी में न्याय की उम्मीद का पड़ला भारी होगा सुशासन तिहार जो चल रहा है!

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