फ़र्जी सील और लाखों का मेडिकल बिल मामले पर साधेलाल और शिक्षक पत्नी पर गिरी सस्पेंशन की गाज…जानबूझकर मेडिकल बिल नियम कायदों का खुला उल्लंघन करने वाले कमीशन खोर जिम्मेदार अधिकारियों को दुधभात! कब होगी FIR उठेंगे सवाल…।
खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। जिस तरह से एशिया के सबसे बड़े विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय बिल्हा में फ़र्जी मेडिकल बिल मामले की जाँच रिपोर्ट आने के बाद एक के बाद एक शिक्षक पर धड़ाधड़ निलंबन की गाज गिर रही है उससे साफ है कि गड़बड़ी पकड़ी गई है और आगे भी उच्च अधिकारियों पर नियमानुसार कार्यवाही होगी।
संकुल समन्वयक पौसरा पूर्व माध्यमिक शाला में पदस्थ रहते हुए फर्जी सील और फ़र्जी मेडिकल बिल की शिकायत मामले में जाँच होने पर साधेलाल पटेल को सस्पेंड कर दिया गया है और संयुक्त संचालक बिलासपुर द्वारा एफआईआर दर्ज कराए जाने का निर्देश दिया गया है जिससे शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।
दूसरी तरफ फ़र्जी मेडिकल बिल भुगतान को लेकर उमाशंकर चौधरी, श्रीमती राजकुमारी पटेल,अन्य अधिकारी, कर्मचारी जिन्होंने जानबूझकर मेडिकल बिल नियमों का उल्लंघन किया उन पर कब तक होगी कार्यवाही की आवाज बुलंद होने लगी थी कि,खबर आई कि शिक्षिका श्रीमती राजकुमारी पटेल को भी सस्पेंड कर दिया गया है। शिकायतकर्ता सहित जिम्मेदार नागरिक पूछते हैं की अन्य आरोपियों पर कब तक होगी कार्यवाही!
क्या मेडिकल बिल पास करनें की प्रक्रिया के लिए बनाए गए नियम को तोड़ने वाले लापरवाह अधिकारियों पर निलंबन,रिकवरी और FIR जैसी कड़ी कार्यवाही की अनुसंशा के साथ रिपोर्ट डीपीआई भेजी जाएगी या भेज दी गई है?
क्या डिपार्टमेंटल इंक्वायरी बैठाई जाएगी?या बिठा दी गई है?
क्या पिछले पाँच सालों में साधेलाल सहित आरोपित अन्य सभी शिक्षकों ने कितने रुपयों का मेडिकल बिल पास कराया,किसके अकाउंट में कितनी राशि गईं कि जाँच होगी?
जिस तरह समय समय पर नियमानुसार कलेक्टर सहित शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी विकास खण्ड शिक्षा कार्यालयों का निरीक्षण करते हैं, बावजूद इसके भृष्टाचार के ऐसे मामले का उजागर होना अपने आप में एक बड़ा सवाल है!
शिक्षा विभाग में पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी तनख्वाह के साथ साथ शासन की समस्त सुविधाओं का उपयोग करनें के बाद भी चंद रुपयों के प्रलोभन में आकर इस तरह की गड़बड़ी कर सरकार के खजाने को चूना लगाने की हिमाकत ना कर सके इसके लिए कोई ठोस कदम उठाया जाना आवश्यक है।
लेकिन मीडिया द्वारा खबर प्रसारित करने के बाद आज फ़र्जी मेडिकल बिल मामले पर CAC शिक्षक साधेलाल और शिक्षक पत्नी पर सस्पेंशन की गाज गिरी है …और FIR करनें का निर्देश दिया गया है जबकि जाँच रिपोर्ट और प्रतिवेदन के आधार पर अन्य आरोपित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब होगी कार्यवाही इस बात का शिकायतकर्ता सहित लोगों को है बेसब्री से इंतजार?
ऐसे में शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि फ़र्जी मेडिकल बिल मामले में क्या सिर्फ साधेलाल और उसकी शिक्षक पत्नी ही दोषी है?
शिक्षा से जुड़े रिटायर्ड और संघ पदाधिकारियों का भी मानना है कि सभी जेडी, डीईओ और बीईओ कार्यालयों में कमीशन का खेल बदस्तूर जारी है जब शिक्षा कर्मी को छठवां वेतन की पात्रता नहीं थी तब अधिकारियों से सांठगांठ कर समग्र शिक्षा में पदस्थ एक सहायक कार्यक्रम समन्वयक नें गलत वेतन फिक्सेशन करा कर लगभग 10 से 15 लाख का चूना लगाया था! गलत वेतन बनाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को दुधभात! जबकि जाँच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने वेतन से अधिक भुगतान की राशि वसूलने का आदेश जारी किया है। इससे तो यही संदेश जा रहा है कि आप सिविल सेवा आचरण नियम विरुद्ध कुछ भी कर लीजिए अगर पकड़े गए तो कुछ नहीं सिर्फ रिकवरी! बाकी दुधभात? शायद ऐसा ही कुछ खेल एशिया के सबसे बड़े विकास खण्ड बिल्हा में चल रहा है।
बिल्हा में आरटीआई में जनसूचना अधिकारी की उदासीनता के चलते दर्जनों अपीलीय मामले जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर में पेंडिंग हैं वहीं अपीलीय अधिकारी के आदेश के बाद भी जानकारी नहीं दिया जाना किसी बड़े भृष्टाचार की आशंका को जन्म दे रहा है शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कुम्भकर्णीय नींद से जागना होगा?
बिल्हा बीईओ कार्यालय में तो बगैर दिव्यांग हुए भी आप दिव्यांग भत्ता प्राप्त कर सकते हैं अगर किसी ने दिव्यांग भत्ता प्राप्त कर रहे शिक्षकों की सूची सूचना के अधिकार के तहत मांग ली तो तब आप एक आवेदन देकर सूची से अपना नाम कटा सकते हैं यदि यकीन नहीं तो खबर को संज्ञान में लेकर सूक्ष्म जाँच करा लें जिम्मेदार शिक्षा अधिकारी?
बहरहाल साहब यह लोकतंत्र, गणतंत्र और जनतंत्र है, जनता को जानने का अधिकार है कि जनता द्वारा गड़बड़ी की शिकायत पर, गठित जाँच कमेटी नें क्या रिपोर्ट पेश की और उस पर सिविल सेवा अधिनियम के तहत कितनी कार्यवाही हुई बाकी पर कब होगी कार्यवाही?