मेडिकल बिल भुगतान मामले में 10% कमीशन की मांग…रिश्वत नहीं देने पर भुगतान रोका… शिकायत बाद भी कार्यवाही नहीं…बीईओ,डीईओ और कलेक्टर बदल गए पर व्यवस्था पर उठ रहे सवाल!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। मेडिकल बिल भुगतान मामले में बिल्हा बीईओ कार्यालय लाखों रुपए के फर्जी बिल भुगतान मामले में जाँच से कछुए की चाल से गुजर रहा है ऐसे में मेडिकल बिल भुगतान मामले में सीधे तौर से 10% कमीशन की मांग और रिश्वत नहीं देने पर मस्तूरी के बाबू ने भुगतान रोका जिसकी लिखित शिकायत कलेक्टर, डीईओ और बीईओ से करने के बाद भी कार्यवाही नहीं का नहीं होना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आता है।

पाठकों को बतला दें कि हाल ही में मस्तूरी के बीईओ,और बिलासपुर जिले के डीईओ और कलेक्टर बदल गए पर शिक्षा विभाग की व्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आता।
विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय बिल्हा और फिर मस्तूरी में कमीशन और भ्रष्टाचार का खेल निकल कर सामने आया है।
मस्तूरी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला खपरी में पदस्थ शिक्षक संतोष कुमार साहू के अनुसार चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति के ₹1,87,459 की राशि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्वीकृत की गई थी।

शिकायत के मुताबिक, 9 जुलाई रात 8:25 बजे, मस्तूरी BEO कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 सी.एस. नौरके ने शिक्षक को फोन कर साफ कहा — “भुगतान चाहिए तो 10% कमीशन देना पड़ेगा।” रिश्वत से इनकार करने पर उनकी भुगतान फ़ाइल रोक दी गई। 15 जुलाई को सूची में शामिल बाकी सभी शिक्षकों को भुगतान कर दिया गया, लेकिन सिर्फ रिश्वत न देने की वजह से उनका पैसा अटका दिया गया।

पीड़ित शिक्षक ने कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और मस्तुरी BEO से शिकायत की, जिसके बाद मस्तूरी BEO टंडन ने हस्तक्षेप कर राशि खाते में जमा करवाई।
लेकिन जब मीडिया द्वारा आरोपी बाबू पर कार्रवाई की बात पूछी गई, तो BEO शिवराम ने कहा —“DEO कार्यालय से फोन आया था, वहां से लेटर आने के बाद ही एक्शन लूंगा।”

सुलगते सवाल
1 किसके कहने पर बाबू ने मांगा रिश्वत!
बहरहाल कलेक्टर और डीईओ बिलासपुर को इस मामले पर विभागीय जांच बिठाकर निष्पक्ष जांच कराना चाहिए ताकि भ्र्ष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
बहरहाल देखना होगा कि शिक्षा विभाग में फैला कमीशन खोरी के खेल पर अंकुश लगाया जाता है या ये यूं ही बदस्तूर जारी रहेगा?



