दम तोड़ती सरकारी शिक्षा…जिम्मेदार हैं मौन? बिल्ली के गले में घंटी भला, “बांधेगा” कौन!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। हमें गर्व महसूस होता है कि हमारे जिला को न्यायधानी के रूप में जाना जाता है। कुछ बुद्धिजीवी इसे एजुकेशन हब के नाम से पुकारते हैं। लोगों को ऐसा लगता है कि यहाँ सभी विभागों में खासकर शिक्षा विभाग और कलेक्टर बिलासपुर कार्यालय के आसपास स्थापित विभागों में सभी काम नियम कायदों से होता होगा लेकिन यहाँ उल्टी गंगा बहती नजर आती है।

सरकार द्वारा सभी विभागों में अटैचमेंट खत्म किए जाने के आदेश बाद भी यदि स्कूल से कोई शिक्षक/बाबू विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच होकर बेखोफ काम कर रहा है तो मतलब साफ है कि शासन के आदेशों का पालन करानें वाला तनख्वाह खोर जिम्मेदार अधिकारियों नें जानबूझकर गांधारी की तरह अपनी आंखों पर अदृश्य पट्टी बांध रखी है।

मतलब यह कि जब अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरत कर,अपने कर्तव्यों के प्रति कर्तव्यपरायण न रहकर अशोभनीय कार्य कर, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा(आचरण) नियम का उल्लंघन कर अपने आप को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा(आचरण) नियम के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए उत्तरदायी बना ले तब तो जिम्मेदारों को कठोर कदम उठाए जाने चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है! शिक्षा विभाग की कार्यशैली से सभी परेशान हैं।

युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भी बिल्हा,कोटा,तखतपुर और मस्तूरी विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय व स्कूलों में ऐसे बहुत से शिक्षक आज भी अटैच होकर बेखौफ काम कर रहे हैं जिन्हें बच्चों को पढ़ाने के लिए नियम शर्तों के साथ नियुक्ति आदेश दिया गया था किंतु ऐसे सभी कर्मचारी नियम विरुद्ध काम विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय एवं अन्य स्कूलों में कर रहे हैं और उनकी तनख्वाह स्कूल से निकल रही है।

नियमानुसार जिला कलेक्टर,एसडीएम,सँयुक्त संचालक,जिला शिक्षा अधिकारी को चाहिए कि सभी अपने अपने विकास खण्डों में कम से कम माह में एक बार अचौक निरीक्षण करें ताकि जिन जिन स्कूलों के शिक्षक यहाँ मौखिक आदेश या बिना कलेक्टर के अनुमोदन के बेखौफ काम कर रहे हैं उन्हें उनके मूल शाला वापस भेजा जाए ताकि जिन बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति कर उनको तनख्वाह मिल रही है वे शिक्षक विकास खण्ड शिक्षा कार्यालयों में अपनी ड्यूटी बजा रहे हैं इसलिए बहुत से बच्चे शिक्षा के अधिकार कानून लागू होने पर भी शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं।

जिम्मेदार विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी से भी कारण बताओ नोटिस जारी कर सवाल पूछा जाना चाहिए कि आखिर किसके आदेश पर नियम विरुद्ध स्कूलों से शिक्षकों को अटैच करनें जैसा काम किया जा रहा है! और यदि दोषी पाए जाने पर कार्यवाही भी होनी चाहिए ताकि अन्य लापरवाह अधिकारी तक संदेश भी जाए कि सुधर जाओ नहीं तो सुधार दिए जाओगे!

जाहिर है सरकारी शिक्षा की बेहतरी,और नवनिहालों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कलेक्टर बिलासपुर को कड़े कदम उठाने होंगे क्योंकि जिले के सबसे पवार फूल अधिकारी वही है और गाहे बगाहे कलेक्टर जिला शिक्षा विभाग का अचौक निरीक्षण कर लें तो व्यवस्था को सुधरने में समय नहीं लगेगा।

वहीं जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि कम से कम सरकारी स्कूली बच्चों के बेहतर व उज्ज्वल भविष्य को ध्यान रखते हुए स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को अन्य स्कूलों में अटैच करनें शिफारिशें भरा पत्र विकास खण्ड या जिला शिक्षा अधिकारी को ना लिखें। क्योंकि कडुआ सच तो यह है कि ना तो जनप्रतिनिधियों ना ही अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं ऐसे में उन्हें सरकारी स्कूल में अध्ययनरत बच्चों की पीड़ा कैसे नजर आएगी।





