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गई “कुर्सी”… बचाऊं “कैश” से! आरोपितों को हटाए बिना कैसे होगी जाँच! “बँगले” से भी हो गई ना ना! … शिक्षा विभाग कार्यालय में पसरा सन्नाटा, टाइम पास “फल्ली गरम”…!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। शिक्षा विभाग बिलासपुर में पिछले कुछ महीनों से साहब, बाबू और गुरु के बीच नौकरी बचाव,कुर्सी बचाव,निपटो निपटाव और सरकार की क्षवि धूमिल करनें वाला फार्मूला,शक्ति प्रदर्शन का मुकाबला खुलेआम चल रहा है। इधर शिक्षा मंत्री भी उनके अपने विभाग की इतनी फजीहत बाद भी पता नहीं किस चीज की चकाचौंध से अपनी आंखें मूंद कर रखे हुए हैं। कुल मिलाकर न्यायधानी में शिक्षा और विभाग दोनों वेंटिलेटर पर हैं। मानों जल्दी ही एक शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि देने की तैयारी चल रही है। राजधानी में भी इस बात की चर्चा जोरों पर है लेकिन कार्यवाही जीरो पर।

हाल ही में एक विपक्ष के नेता नें शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए अधिकारी और कर्मचारियों की भृष्ट करतूतों को उजागर करते हुए मंत्री और शिक्षा विभाग के तमाम जिम्मेदारों को लिखित शिकायत देकर शिकायत तो कर दी लेकिन ना तो किसी अधिकारी का बीपी बढ़ा, ना सुगर मतलब यह सिद्ध हुआ कि ना बाप बड़ा ना भैय्या सबसे बड़ा रुपय्या। बाद में शिक्षा विभाग की इज्ज़त बचाने जाँच का तुगलकी फरमान जैसा आदेश कागजों में जरूर जारी किया गया लेकिन वह भी जुमला साबित हो गया ऐसा लगता है।

शिक्षा विभाग के जासूस विनोद कहते हैं कि बँगले में भी दबाव बनाया गया था और साहब और बाबू की बिदाई तय हो गई थी लेकिन दान के साथ दहेज भी इतना बढ़ा-चढ़ा कर दिया गया कि अब भ्रष्टाचार और दागदार दामन नजर नहीं आता बल्कि सचिव शपथ पत्र लिखकर देने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मतलब करे कोई भरे कोई।

अभी शिक्षा विभाग का हाल बेहाल नजर आता है ज्यादा तर कर्मचारियों ने गाँधी जी के तीन बंदर, बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो… वाला फंडा अपना लिया है।

आपने शीर्षक पढ़ा “गई कुर्सी”… बचाऊं “कैश” से! यह एक कटाक्ष है कि भृष्ट अधिकारी कैसे अपने अवैध धन को सुरक्षित रखने और कुर्सी बचाने वैध और अवैध दोनों तरह के फंडे और हथकंडे अपनानें में लगे हुए हैं और शासन और प्रशासन तमाशबीन नजर आ रहे हैं।

रामदीन काका चौथी अंग्रेजी पास हैं वो कहते हैं कि राजधानी में बैठे अधिकारी/नेता उनकी चौखट पर आए किसी भी अधिकारी मतलब दुधारू गाय को कैसे बाय बाय कह देंगे जबकि अभी सीजन में एक से एक स्कीम चल रही है कि बाय वन, गेट वन फ्री चल रहा है। आप बंगले में चले जाइए आपको मद्धिम ध्वनि में ये गाना सुनाई दे सकता है कि परदेशी परदेशी जाना नहीं मुझे छोड़…। एक बंजारा गाए, जीवन के गीत सुनाए
हम सब जीने वालों को जीने की राह बताए…सर जो तेरा चकराए…नवरतन तेल की मालिश करा लो।

फिलहाल वर्तमान में शिक्षा विभाग कार्यालय में सन्नाटा, पसरा हुआ है तिलक धारियों का विकेट लगातार गिरना जारी है जो बचे हुए हैं वे भी निशाने पर हैं सीसी टीवी से नजर रखी जा रही है छुपते छुपाते लोग ख़ुसूर फुसूर करते जरूर नजर आते हैं इस माहौल में कर्मचारी दफ्तर से बाहर निकल टाइम पास “फल्ली गरम”चाय गरम का लुफ्त उठा रहे हैं कभी कभी फल्ली बेचने वाला भी दफ्तर के एक चक्कर लगा लेता है।

अंत में बस इतना ही कि शिक्षा विभाग में जिस तरह बोर्ड परीक्षा हो गई उसी तरह अभी होम एग्जाम चल रहे दूसरी तरफ साहब और बाबू भी कठिन परीक्षा के दौर से गुजर रहे हैं चिंता इस बात की नहीं, कि ना जाने कब परिणाम आ जाए बल्कि इस बात की चिंता है कि, परिणाम क्या आएगा?

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