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होली के अबीर,तरकश भरे तीर…मूठ चलाए भेदिया…खोल रहा तंत्र की पोल…मंतर को बहरा सुने, धीरे धीरे बोल, बुरा ना मानों, होली है….!

होली के तीर….
बिलासपुर शिक्षा विभाग में इस बार होलिका दहन के बाद का एक दिन ग्रहण और सूतक के चलते जैसे होली की आग पर ग्रहण का अंकुश लगा, ठीक उसी प्रकार शिक्षा विभाग में भ्र्ष्टाचार की लगी आग, बुझाए नहीं बुझ रही है। अकबर के नवरत्न और बंजारा की करतबगिरी रंग और गुलाल की सतरंगी दुनियाँ भी भ्र्ष्टाचार की सच्चाई को छिपाने में कामयाब नहीं हो सकी है।

चारों विकास खण्ड और जिला कर्मचारियों अधिकारियों द्वारा किए गए कर्मकांड की आग, ठंडी भी नहीं हो पा रही है, ईमानदार कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में होली इस बार खेलने का नहीं झेलने का त्यौहार बन गया है,मतलब दिल मिले ना मिले, गले मिलते मिलाते रहिए। जाने किस पर, कब और कहाँ भ्र्ष्टाचार के गंभीर और प्रामाणिक आरोप लग जाएं। फिर आप चाहे जितना भी गा लें, पुकार लें कि एक बंजारा आए, भृष्टों को ले बचाय! लेकिन बीरबल के नौरत्न भी नहीं बचा सकते। कहते हैं भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं!

इधर एशिया के सबसे बड़े शिक्षा ब्लॉक के नए साहब और उनके अधीनस्थ बैठे एक बेचैन बाबू ,चैन से सुकून से शिक्षा विभाग के शिक्षकों को लूट रहे हैं अब तक शिक्षकों को मालूम है कि जो इस कुर्सी पर बैठा है प्रसाद चढ़ा कर आया है तो लूटेगा?

कहते हैं कि नए साहब के आते ही मातहतों में बेचैनी तेज हो गई थी, क्योंकि पुरानी साहबान मलाई मिठाई के शौकीन थी नया आशियाना जो बनाने का काम चल रहा था, सारा सेटिंग बना हुआ था,पुराने साहबान के लोग पद बचाने रायपुर तक दौड़ लगा आए थे फिर अचानक ये नए साहब कहां से चढ़ावा चढ़ा कर आ गए, जानकर बताते है कि बड़े मुश्किल से पुराने साहबान ने खुद को संभाला वरना अवसाद में जाते देर नहीं लगी थी, उनके वफादार संलग्न बाबू जो मलाई मिठाई के बिना जमीन पर पैर रखने से भी इंकार कर देते है वो विचलित होने लगे थे, फिर पुराने साहबान और वफादार संलग्न बाबू ने गुलाल को हवा में कुछ इस तरह उछाला कि नए साहब के मलाई मिठाई की अफवाह चारों तरफ फैलनें लगी संलग्न बाबू हर किसी से अपना दामन बचाने दुखड़ा रोने लगे कि नए साहब का नया रेट लिस्ट जारी किया है रेट बढ़ा दिए है हम कहां से कमीशन निकाले और हमें एक रुपल्ली की मिठाई खाने को भी नहीं देते। सबसे के सामने रो रो कर बाबू को सहानुभूति भी मिली और मिठाई की महंगाई की अफवाह साहब के ऊपर डालकर दुगुना कमीशन का अपना फायदा भी उठाने लगे,मिला माल ए मुफ्त और साहब हुए बदनाम।

करीबी बताते है कि ये साहब मिठलबरा है, ये जानबुझ कर अनसुना करथे, संलग्न बाबू की मिठाई,मलाई, क्षमता और कुशलता को देखते हुए इनको छेड़ने के मूड में वे फिलहाल नहीं दिखते, वैसे संलग्न बाबू के शुभचिंतक इनको समझा चुके है कि इस काजल की कोठरी में जो आया है वो अपनी मर्जी से है,लेकिन जाना कालिख लगाकर है क्योंकि शिक्षा विभाग काजल की कोठरी है लेकिन बाबू की मलाई मिठाई की लत है कि छूटंती नहीं।

कहते हैं कि शहरी स्रोत के घाघ,शातिर और तिकड़मी सीएसी से पूरा तंत्र, अधिकारी से लेकर सारे सीएसी तक तंग आ चुके थे, यह शातिर सीएसी अपना “गिरोह” बनाकर सब अधिकारियों पर उल्टा सीधा दबाव बनाकर अपना उल्लू सीधा करता था। इस सीएसी पर जब RTI से प्राप्त दस्तावेज से जाँच और कार्यवाही का दबाव बना तो इसने प्लानिंग के तहत सारे सीएसी गैंग को फसाने की सोची और अंत में होशियारी कर अपने गिरोह वाले को अपने साथ स्तीफा के सागर में ले ही डूबा। दबी जुबान से सारे अधिकारी और सीएसी इस तिकड़मी सीएसी के डूबने से खुशी व्यक्त कर रहे है। इस बार इस शातिर सीएसी अपने ही बुने जाल में फंसने से लोगो के होली में भांग का नशा दुगुना कर दिया है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पता नहीं किसने क्या तंत्र मंत्र, जादू टोना करवाया है कि जब से नए नए साहब आए हैं शिक्षा विभाग की भद्द पीट रही है दो बैल बुद्धि बाबू का घमासान युद्ध और एक दूसरे की पोल खोलने का तरीका पूरे शिक्षा जगत को बदनाम कर रहा है। बड़े साहब की गोपालीक बुद्धि और नवरत्न का बंजारा गीत मंतर से बड़े साहब कुर्सी तो बच गई है लेकिन सिफारिश का ग्राफ नीचे गिरा रहा है कुर्सी के चारों पाए लड़खड़ा जरूर गए हैं। अब कब आदेश आ जाए पता नहीं!

मामले जैसे अनुकंपा, युक्ति युक्त करण, मान्य/अमान्य, बहाली का खेल, खेल का आडियो,वीडियो, चिठ्ठी सहित हो गया फेल,विभागीय जाँच का रुक जाना,और कई जाँच का प्रक्रियाधीन बतलाया जाना,विभागीय जांच रोकने माफ़ी मांगना, राजधानी जाना,हाईकोर्ट का बहाना, ऑफिस ना आना, RTI का फेल हो जाना,शिक्षकों/कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि आंशिक विकर्षण स्वीकृति पर लेन देन का खुला खेल, खेल का बिल, फर्नीचर, रिनोवेशन बिल,स्टेशनरी बिल,किराए का वाहन,फिर कोटा में एक और 30 लाख रुपए का मामला उजागर होना मतलब साहब जी की कुंडली में ग्रहदोष के साथ साथ शनि महाराज की महादशा वाले इर्दगिर्द कुंडली मारकर बैठे हैं इन्हें दूर करने से कुछ राहत मिलेगी ऐसा ज्योतिषी द्वारा कहा जा रहा है लेकिन दिल है कि मानता नहीं!

भविष्य देखने वाले एक भविष्यवक्ता कहते हैं कि कार्यालय के दो धुरंधर बाबुओं के मुठभेड़ में बड़े साहब सबूत के साथ फंस गए है, विपक्ष की भूमिका में राजनीतिक दल के नेता द्वारा की गई शिकायत और जाँच साहब के विपरीत आने की संभावना जताई जा रही है इनके चक्कर में रोज बड़े साहब बीपी सुगर ऊपर नीचे हो रहा है दूसरी तरफ
साहब रायपुर का चक्कर पे चक्कर लगा रहे है।

साहब के करीबी कहते हैं कि बड़े साहब की नाव बिन पानी वाली अरपा नदी में तैर रही है उसके खेवनहार ही उसे डुबो रहे हैं किस दिन नाव पलट जाए पता नहीं लेकिन नाव के डूबने से पहले कौन नाव छोड़ कर जाता है साहब को पता होना चाहिए!

एफ आई आर मामले में मेडिकल बिल का जिन्न बोतल के बाहर निकल कर आरोपियों के इर्द गिर्द घूम रहा है,उनके जिंदगी के रंग होली में भी बेरंग हो गए हैं, ब्लॉक में हुए भ्र्ष्टाचार के बड़े मामले की एफ आई आर होते होते रुक गई है शायद गाँधी फैक्टर काम कर रहा है, सूत्रों के अनुसार दहशत में आकर,आनन फानन में राजधानी का चक्कर, होली की मिठाई,और मोटा चढ़ावा पूर्व साहबान रायपुर पहुंचा चुकी है इसलिए मामला रुक गया है लेकिन मामले का जिन्न बोतल से बाहर घूम रहा है जाँच रिपोर्ट और JD द्वारा FIR का निर्देश बाद भी एक ईमानदार SP के रहते TI का मेडिकल मामले में FIR नहीं किया जाना जादू टोना किसी तंत्र मंत्र के किस्से कहानी की ओर इशारा करता नजर आता है। सच तो यह भी है कि प्रमाणित दस्तावेज,जाँच प्रतिवेदन,और 20/12/23 & 11/03/24 तिथि प्रामाणिक है। ये तारीख भले इतिहास बन गई है लेकिन भृष्ट अधिकारियों के ताबूत में कील ठोकने जैसा ही साबित होगा!

बुद्धिजीवी वर्ग कहते हैं कि हाल ही में शहरी समन्वयक प्रमुख की कुर्सी भी सुरक्षा के लिहाज से खतरे में पड़ गई दिखाई दे रही है इनके बहुत क़रीबी 8 CAC पर स्तीफा का गाज गिरते ही इनकी आंखों से घड़ियाल आँसू भी नहीं निकले क्यों,क्योंकि ये खुद की कुर्सी बचाने मैराथन दौड़ लगा रहे हैं देखना होगा कि इनके आँसू पोछने का जो ढोंग किया जा रहा है वह कुर्सी के चारों पाए में से कौन सा कमजोर पाया सामने आता है!

कहते हैं साहब के कंधे का इस्तेमाल करते हुए ज्यादातर CAC नें फायदा उठाया, साहब को भी छपास रोग है साहब अपने कार्यालय में मिले ना मिले, लेकिन शाला प्रवेश उत्सव,स्कूल संबंधित कोई कार्यक्रम, जहाँ फोटोशूट कराया जा रहा हो साहब की मुख्य अतिथि जैसी एक फोटोग्राफ जरूर नजर आ जाती है भले मुख्य अतिथि कोई हो। इन पर आरोप है कि शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान करनें की बजाय उनसे जनप्रतिनिधियों का सम्मान करवाया जाता है।

साहब के एक शातिर सीएसी बड़े खास हुआ करते थे। ये वक्त बेवक्त उनका उपयोग भी किया करते थे, लेकिन जानकर बताते है कि इस शातिर सीएसी के अपने ही जाल में फंसने पर यही साहब ने उसकी कोई मदद नहीं की, बल्कि बहती गंगा में हाथ धोते हुए मौके का फायदा उठाकर अपने ही गुरुजी लोगो को साहब बनवा दिया अब उनकी बेवफाई पर शातिर सीएसी बेवफाई के गाने लोगो को गा गा कर बंजारे की तरह सुना रहे है भले इनके झांसे में अब कोई नहीं आने वाला।

एक बार फिर अपने पाठकों को बता दें कि यह होली पर व्यंग है, रंगों की फुहार लिए, थोड़ी सी गुदगुदी और थोड़ा सा प्यार लिए आप सभी को होली त्यौहार की शुभकामनाएं। बुरा ना मानों होली है…. जोगीरा सारा-रा….।

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