मुख्यमंत्री साय ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में दिए सख्त निर्देश, कहा– शिक्षक निभाएँ जिम्मेदारी, बच्चों का भविष्य होगा स्वर्णिम।

खबर खास छत्तीसगढ़ रायपुर/बिलासपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को मंत्रालय महानदी भवन में स्कूल शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों की संख्या राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि एक-एक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी दृढ़ता से निभाए, तो बच्चों का भविष्य स्वर्णिम बनने से कोई नहीं रोक सकता। बच्चों के भविष्य निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर है।

मुख्यमंत्री ने अंजोर विजन 2047 के तहत वर्ष 2030 तक के लघु अवधि, 2035 तक के मध्य अवधि और 2047 तक के दीर्घकालिक लक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना तैयार कर तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी अंजोर विजन के माध्यम से विकसित राज्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति का सबसे मजबूत आधार शिक्षा है, क्योंकि दक्ष और स्मार्ट बच्चे ही भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।

बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभाग की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों और भविष्य की जरूरतों की जानकारी साझा की। उन्होंने शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, प्रतिभाशाली शिक्षकों को नेतृत्व के अवसर देने और बेहतर अकादमिक वातावरण विकसित करने पर बल दिया। आंगनबाड़ी और बालवाड़ी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय को और सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए गए।

अंजोर विजन 2047 के अंतर्गत 1000 मॉडल स्कूलों की स्थापना, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्कूलों की शुरुआत, एआई आधारित मूल्यांकन व्यवस्था, व्यक्तिगत पाठ योजनाओं के लिए डिजिटल ऐप, शिक्षक प्रशिक्षण उन्नयन तथा STEM शिक्षा विस्तार जैसे प्रमुख लक्ष्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने एसटीइम शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए साइंस सिटी की स्थापना, विज्ञान मेलों के आयोजन और एआई एवं रोबोटिक्स लैब प्रारंभ करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक में वर्ष 2035 तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने, राज्य स्तरीय ECCE समिति गठन, शिक्षकों की भर्ती, मूल्यांकन केंद्रों को सुदृढ़ करने और आगामी तीन वर्षों के लक्ष्यों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने माध्यमिक शिक्षा मंडल की कार्यप्रणाली, प्रश्नपत्र निर्माण, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन व्यवस्था की भी समीक्षा की।

उन्होंने हायर सेकेंडरी स्तर पर अतिरिक्त विषय विकल्प विकसित करने, प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित प्रश्न बैंक तैयार करने, त्रुटिरहित मूल्यांकन प्रणाली लागू करने और गोपनीय प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए।

बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्य सचिव विकास शील, माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष रेनु पिल्लै, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।





