न्यायधानी बिलासपुर में R.T.I. को लेकर DEO और संयुक्त संचालक कार्यालय कितना उदासीन और लापरवाह? कुल 122 दिन बाद भी आवेदक अपीलीय निर्णय आदेश जारी किए जाने का कर रहा इंतजार! 32 जिलों के हालात पर खड़े हो रहे सवाल?

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। बिलासपुर न्यायधानी में दम तोड़ रहा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, खासकर शिक्षा विभाग में RTI में समय सीमा में जानकारी दिए जाने पर जानबूझकर देरी की जाती है या फिर दी ही नहीं जाती। आवेदक को गुमराह किया जाता है।

नियमानुसार आवेदन से 30 दिनों के अंदर आवेदक को जानकारी प्राप्त हो जानी चाहिए नहीं तो उसके बाद जन सूचना अधिकारी से आवेदक को जानकारी नहीं प्राप्त होने पर वह अपीलीय अधिकारी के पास अपील करता है यहाँ पर भी नियमानुसार अपीलीय अधिकारी को 30 दिन या 15 दिन और मतलब 45 दिनों की सुनवाई में ये तय करना होता है कि जनसूचना अधिकारी जानकारी दे या जनसूचना अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय सही है यदि आवेदक को प्रथम अपीलीय अधिकारी के दिए गए निर्णय/आदेश से संतुष्ट नहीं है तो वह राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील कर सकता है।

एक सूचना के अधिकार अधिनियम का आवेदन जनसूचना अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर में 14/11/2025 को आवेदन जानकारी प्राप्त करने लगाया गया था। 13/12/2025 को सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 30 दिन की अवधि पूर्ण होने पर भी जनसूचना अधिकारी कार्यालय से कोई भी जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
आवेदक नें 30 दिन के बाद 10 दिन और इंतजार करनें के बाद भी जानकारी/जवाब नहीं मिलने से 24/12/2025 को सयुंक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर कार्यालय में प्रथम अपील दायर कर दी।

यहाँ पर संयुक्त संचालक के पद पर आर पी आदित्य पदस्थ हैं। इन्होंने आवेदन के 31 दिन बाद 23/01/2026 को दोपहर 12:30 बजे प्रकरण की पहली सुनवाई रखी। अपीलीय अधिकारी नदारद रहे जनसूचना अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर कार्यालय से कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई। मतलब जनसूचना अधिकारी कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 73 दिनों में भी कोई जवाब नहीं आया। फिर प्रकरण की सुनवाई के 23 दिन बाद दूसरी सुनवाई 04/02/2026 को 12:30 दोपहर को रखा गया। इसमें भी अपीलीय अधिकारी नदारद रहे,कुल 96 दिनों बाद भी जन सूचना अधिकारी की ओर से कोई जवाब नहीं आया।

कार्यालय प्रथम अपीलीय अधिकारी, सयुंक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर में प्रथम अपीलीय प्रकरण की दूसरी सुनवाई दिनाँक 04/02/2026 के बाद आज दिनाँक को 44 दिन बीत गए लेकिन सँयुक्त संचालक कार्यालय से प्रकरण की सुनवाई हेतु कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कुल 122 दिन बाद भी सूचना के अधिकार अधिनियम2005 के तहत ना कोई सुनवाई हो सकी ना सँयुक्त संचालक कोई आदेश जारी कर पाए। ऐसे में आम आदमी के लिए बनाया गया सूचना का अधिकार अधिनियम 2025 महज कागजों में ही सिमट कर रह गया है।

यदि न्यायधानी बिलासपुर जहाँ माननीय उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस बड़े बड़े फैसले देकर न्याय करते हैं उसी शहर बिलासपुर में RTI कानून दम तोड़ रहा है तो सवाल खड़े होना लाजमी है कि अन्य 32 जिलों में सूचना के अधिकार अधिनियम के हालात कैसे होंगे!



