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शिक्षा विभाग में शनि की महादशा…अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर मृत आत्माओं का आतंक…किसके भाग्य में राजयोग…किसको कारावास का दंश! (व्यंग)…

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। शिक्षा विभाग में इन दिनों शनि की महादशा चल रही है। खासकर दो बाबुओं के बीच चल रहा ट्वेंटी 20 का खेल ऐसा ही कुछ इशारे करता नजर आता है…कहते हैं गुरु और चेला कभी एक ही थैली के चट्टे बट्टे थे अब एक दूसरे को शह और मात देने का खेला कर रहे हैं।… BEO बिल्हा काण्ड से गुरु चेला की कहानी फेल हुई फिर कौन पास,कौन फेल…! इस खेल की आड़ में और लड़खड़ाती और डगमगाती DEO कुर्सी के लिए मैराथन दौड़ भी प्रारंभ हो गया है। उम्मीद की कश्ती में सवार होकर न्यायधानी से राजधानी तक लगाया जा रहा है चक्कर से किसके भाग्य में राजयोग लिखा जाएगा. किसे मिलेगा कारावास या वनवास एक तरफ गुरु नें खाई है कसम… तो चेला भी निपटाकर ही लेगा दम.ऐसी खबर सामने आई है।.. उधर साहब दो पाटन के बीच में साबुत बचा ना कोय जैसे गेंहू में घुन की तरह पीसे जा रहे कोई भी aira गैरा कुछ भी सुना कर चला जाता है फोन पर तो मत पूछिए और भ्र्ष्टाचार के मामले तो ऐसे उजागर हो रहे हैं जैसे किसी मृत आत्मा नें सब कुछ बर्बाद कर देने की ठान ली हो!….शिक्षा विभाग की स्थिति अभी पानी में आग लगाने जैसी मतलब जहां शान्ति है वहाँ उत्तेजना पैदा हो रही है। शिक्षा विभाग से जुड़े तांत्रिक कहते हैं कि गरुड़ पुराण कराया जाना चाहिए।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि शिक्षा विभाग के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं। प्रेत बाधा से ही गुरु चेला बाल की खाल निकाल रहे हैं। हर शॉट खेलने के बाद भी किसी का बाल बांका नहीं हो रहा है। जानकर हैरान हैं कि गुरु चेला की कुश्ती में शिक्षा विभाग की जग हँसाई हो रही है। लोग बहती गंगा में हाथ और पाप दोनों धो रहे हैं। गुरु और चेला में एक सस्पेंड है तो दूसरे के ऊपर जाँच की दो धारी तलवारें लटकी हुई है।

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बुद्धिजीवी वर्ग कहता है कि शिक्षा विभाग की ऐसी दुर्गति पहले कभी नहीं देखा। शिक्षा विभाग में दलाल बेखौफ होकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं शिक्षा विभाग इन दिनों भ्र्ष्टाचार का अड्डा और भ्र्ष्टाचार उजागर होने पर बाबुओं के लिए अखाड़ा बन गया है और तमाशबीन हैं इसी विभाग में बड़े बड़े ओहदे पर पदस्थ अधिकारी जो आई शिकायत पर दनादन जाँच और सप्ताह भर में रिपोर्ट पेश करनें का निर्देश जारी कर रहे हैं।

ऐसे आपातकालीन समय में एक संभागीय अधिकारी का 7 दिनों में जाँच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाना, किसी राजनैतिक दल के बड़े लीडरान द्वारा फेका गया गज़ब का जुबानी जुमला लग रहा है।

शिक्षा विभाग के दो दिग्गज बाबू एक चेला और एक गुरु एक दूसरे पर ऐसा कीचड़ उछालने में लगे हैं कि उन्हें विभाग और विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की इज्ज़त की भी परवाह नहीं,जिले के मुखिया भी शिक्षा विभाग में लगातार हो रही भ्र्ष्टाचार के आरोप प्रत्यारोप,शिकवे शिकायत पर रोक लगाने कोई ठोस नहीं उठा पा रहे हैं।

दोनों बाबुओं और अधिकारी के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज दिनाँक तक सिविल सेवा आचरण नियम उनकी जूते की नोक से ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रही है।

जिला शिक्षा विभाग का कार्यालय मृतक आत्माओं का डेरा(अनुकंपा) या शनि की कुदृष्टि से गुजर रहा है दुर्भाग्य अवसर की तलाश में रहता है। अधिकारी बाबू चपरासी सभी पर शनि की महादशा पड़ी है। उन्हें अपनी डुबती नैय्या को बचाने के लिए शिक्षा विभाग की साख तो को दाँव पर लगाना मंजुर है! उन्हें ना तो सरकार की चिंता है ना ही अपनें अधिकारियों की, विभाग का छीछालेदर अलग हो रहा है।

सूत्रों के हवाले से राजधानी से खबर निकल कर आ रही है कि दोनों को विभागीय जांच का हवाला देते हुए यहाँ से हटाने का विचार किया जा रहा है।

ऐसे में नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े मामलों में अनियमितताओं की लिखित शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया जा सकता है।

ये कागजी भाषा है और ऐसे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी और कर्मचारी नेता के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए गए हैं। एक तो सस्पेंड है ही।

पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है, जिसे सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर बुध्दिजीवी कहते नजर आते हैं कि
भारत में, ‘जुमला’ शब्द का प्रयोग अक्सर राजनीतिक वादों के संदर्भ में किया जाता है, जिसका मतलब “ऐसा वादा जो पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि लुभाने के लिए किया गया हो” (झूठा वादा)कहा जाता है। अब ऐसे शब्दों का प्रयोग सरकारी महकमों में बड़े बड़े ओहदे में बैठे अधिकारी किसी गंभीर शिकायती पत्र जो भ्र्ष्टाचार से जुड़ा हो के मीडिया में सार्वजनिक हो जाने पर सरकार की क्षवि धूमिल होने से बचाने के लिए/अपने विभाग प्रमुख होने के नाते खुद की क्षवि और कुर्सी बचाने, अपनें सीनियर के द्वारा लगाए गए फटकार के बाद दिए गए निर्देशों पर “ब्रम्हास्त्र” के रूप में प्रयोग करतें हैं!

मामले से निकला गर्म लावा धीरे धीरे ठंडा होने पर आलोचना और आलोचकों की चर्चा से दूर होते जाता है।

संयुक्त संचालक ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा है कि विभाग को नियुक्ति और पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितता, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली से जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के आधार पर ही जांच का निर्णय लिया गया है।

बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भ्र्ष्टाचार नियमों को ताक पर रखने जैसा गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पात्रता और नियमों को दरकिनार करते हुए कुछ मामलों में अनियमित तरीके से नियुक्तियां दी गईं। इसके अलावा शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में पदस्थापना और प्रमोशन के लिए कथित रूप से अवैध वसूली की गई। मतलब केक कटा जरूर लेकिन बटा नहीं,इसी कारण मामला तूल पकड़ता गया और उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंची। वह भी भागते भूत की लंगोटी की उम्मीद से भिड़ गए हैं।

मामले को गंभीर मानते हुए संयुक्त संचालक ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी है। टीम को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने और संबंधित दस्तावेजों की जांच के साथ शिकायतकर्ताओं तथा संबंधित अधिकारियों के बयान लेने के निर्देश दिए गए हैं। जांच टीम को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि वह सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करे। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

मजे की बात तो यह है कि तीन सदस्यीय जाँच टीम का कोई सदस्य शनि की महादशा वाले,मृत आत्माओं और रसूखदार बाबू ओं के शिक्षा विभाग वाले दफ्तर में डर के मारे प्रवेश भी नहीं किए हैं। भई कहीं शनि की कुदृष्टि उन पर पड़ गई तो कहीं लेने के देने ना पड़ जाय।

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