शिक्षा विभाग में गरुड़ पुराण की कथा से शांत हुए शैतान… सात दिनों में जांच कर प्रतिवेदन और स्पष्ट अभिमत देने की मियाद खत्म…! गुरु चेला में मांडोली की खबर से पसरा सन्नाटा,गुरु बाबू माफीनामा लिख हुआ बहाल, एशिया के सबसे बड़े BEO कार्याल में मचा बवाल, साहब और शिकायती जांच ठंडे बस्ते में!…किसने कराई मध्यस्थता इतने सस्ते में ! (व्यंग)

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। शिक्षा विभाग में दो बाबुओं के बीच शिकायत जाँच के खेला को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही उठा पटक और आरोप प्रत्यारोप में विराम लग जाने की सनसनीखेज खबर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से निलंबन बहाल आदेश के रूप में निकल कर बेक डेट में सामने आ रही है।
पिछले कुछ दिनों से शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति, युक्तियुक्त करण, नियम विरुद्ध अटैचमेंट और अटैच कर्मचारियों से हर महीने एक मोटी रकम की वसूली की शिकायत, और नौकरी के दौरान मृत आत्माओं के परिजनों से मोटी रकम लेकर नौकरी देने के मामले में शिकायत होने और उस पर तहलका मचने और फिर जाँच के कड़े कड़े जारी आदेश से नेता बाबू और गुरु घनटाल की कुर्सी डगमगा गई थी ऊपर से मृतकों की आत्माओं का आतंक बड़े साहब को कार्यालय में चैन से बैठने नहीं दे रहा था।
इसके लिए किसी रसूखदार नेता के करीबी नें तांत्रिक का नाम पता दिया और चेतावनी दी कि ज्यादा उठा पटक किए तो दोनों की पुरानी फाइल खोल दिया जाएगा!
साहब, तांत्रिक आया भी नहीं लेकिन उसके दरबार से मारे गए मंतर और किए गए अनुष्ठान से अनुकंपा नियुक्ति वाले आत्माओं को (गरुड़ पुराण की कथा) से शांत कराया गया है।
मतलब दो बाबुओं चेला और गुरु और साहब के ऊपर मृतक आत्माओं की साया को शिकायती फाइल को एक पुरानी अलमारी में बंद कर आस्तीन के सांपों से भी दूर रखा गया है ताकि वो मीडिया की सुर्खियों में ना आएं, चल रहे शिकायती जाँच पर विराम लग जाय, ऐसी तगड़ी फील्डिंग तांत्रिक द्वारा फोन पर की गई है, ऐसा खबरियों द्वारा बतलाया जा रहा है।

शिकायती पत्र लिखकर कर एक दूसरे पर कीचड़ उछालने से सँयुक्त संचालक द्वारा सात दिनों में जांच कर प्रतिवेदन और स्पष्ट अभिमत देने की मियाद भी बिना किसी जाँच पड़ताल के खत्म होनें की खबरें शिक्षा विभाग के सूत्रों से निकल कर आ रही है।

यह भी सुनने में आ रहा है कि गुरु चेला में अघोषित मांडोली हो गई है जिला शिक्षा अधिकारी का निलंबन बहाली आदेश में गुरु को एशिया के सबसे बड़े विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय में बहाल किए जाने की खबर से विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय में हड़कंप मच गया है। दूसरी तरफ उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कुछ लोग इसे षड्यंत्र बता रहे हैं।

शिक्षा विभाग के एक जानकर हैरान हैं कि JD और DEO कार्यालय जैसे बड़े कार्यालय को छोड़ कर इतने अनुभवी और नामचीन बाबू को एशिया के सबसे बड़े BEO कार्यालय के लिए निलंबन पश्चात बहाली आदेश पुरुस्कार है या सजा जैसा! या फिर कोई छल!
बुद्धिजीवी वर्ग कहते हैं कि ऐसा लगता है कि इस समझौता में ही कोई झोल रूप में शतरंज की चाल है, जो आगे चलकर JD या DEO कार्यालय की ओर बाबू को बैठाने की सोची समझी रणनीति जैसा हो सकता है लेकिन अभी शह और मात जैसा कुछ दिखलाई नहीं दे रहा है हो सकता है कि समझौता की मियाद किसी और नें तय किया हो खैर…!

अब जब समझौता एक्सप्रेस जब चल पड़ी तो गुरु के चेला पर भी चर्चा होनी चाहिए कि आखिर शिक्षा विभाग में ऐसा कौन कौन किरदार है जिसकी चर्चा शिक्षा विभाग में आस्तीन के सांप के रूप में हो रही है कि वह जिस तरह अपना उल्लू सीधा करनें शिक्षा विभाग में अपनी जगह तो बना ली है लेकिन जब भी ये अपने आका को डसने का षड्यंत्र रचते हैं फायदा किसी और को हो जाता है यकीन नहीं तो सभी संदेहियों का कॉल डिटेल निकाल कर देख लें, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा!

सूत्र बताते हैं कि जिला के बड़े साहब, और अनुकंपा बाबू के खिलाफ शिकायती जाँच पर मांडोली से विराम लग गया है साहब और शिकायती जांच ठंडे बस्ते में चले गए हैं, लेकिन शिक्षा जगत के गलियारों में अब भी चर्चा बड़ी गंभीरता के साथ जारी है कि आखिकार इस आरपार के मामले में मध्यस्थता किसने की, पांडेय जी,कौशिक जी,या बिलासपुर के भैया जी के करीबी नें!
अंत में बस इतना ही कि शिक्षा विभाग के दो रसूखदार बाबूओं और एक बड़े साहब नें शिकायत पर कार्यवाही शुरू होने से पहले अघोषित समझौता कर लिया, लेकिन सरकार की किरकिरी,मीडिया का फॉलोअप,लिखित जाँच शिकायत पर जाँच आदेश को क्या अब एक फाइल में बंद कर जिम्मेदार गाँधी जी के तीन बंदरों की तरह व्यवहार करेंगे या फिर इससे परे कोई ठोस परिणाम सामने आने की संभावना है! मतलब किसी बड़े तूफान से पहले की शांति!



