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नेम… “आदित्य” फिर भी शिक्षा विभाग में फैला अंधियारा…शिकायत पर जांच और जांच पर कार्यवाही…कब होगी! विभागीय सचिव को देना पड़ रहा शपथ पत्र!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। शिक्षा विभाग में दो बाबुओं गुरु और चेला के बीच चल रहा ट्वेंटी 20 का खेल का एक पारी समाप्त हो गया है…गुरु का बहाली आदेश चेला के कमजोर प्रदर्शन की ओर इशारा करता है वहीं चेला एक पारी के बाद गुरु के चले गए दाँव की काट खोज रहा है। साहब गुरु, चेला के शिकायती द्वंद्व से परेशान हैं उन्हें अपनी कुर्सी हाथ से फिसलती नजर आ रही है।

दूसरी ओर बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह एक प्रकार की ऐसी लड़ाई है जैसे नूरा कुश्ती,मतलब ऐसी मिलीभगत वाली लड़ाई या दिखावटी संघर्ष से है, जहाँ दोनों पक्ष पहले से ही हार-जीत तय कर लेते हैं। यह वास्तविक मुकाबला नहीं, बल्कि केवल दर्शकों को मूर्ख बनाने या मनोरंजन के लिए किया गया नाटक होता है, जिसमें किसी का नुकसान नहीं होता। लेकिन देखकर तो कदापि ऐसा नहीं लगता!

इस खेल में एक हुनरमंद जनप्रतिनिधि बतौर शिकायत सबूत के आधार पर प्रवेश किए हैं लेकिन उनकी ओर से अभी तक कोई और बड़ा वाला धमाका नहीं किया गया है ना ही उन्होंने किसी जिम्मेदार अधिकारी पर जाँच में हो रहे विलंब पर आरोप लगाया है लेकिन खेल में जरूर टी टाइम का माहौल साफ तौर से बना हुआ नजर आता है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पसरा हुआ सन्नाटा साहब की खाली कुर्सी, चेला की अनुपस्थिति बाबुओं की ख़ुसूर फुसूर कुछ गड़बड़ है का ईशारे कर रही है।

शिकायत शाखा में अलमारी खोल कर साफ सफाई की जा रही है फाइलों को उलटा पलटा जा रहा है ऐसा करना निःसंदेह रूप से संदेह को जन्म दे रहा है।

कहते हैं साहब की तरह ही गुरु-चेला भी मुगालते में हैं साहब का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म होने की कगार पर है अभी वे वेंटिलेटर पर हैं। कब विकेट उखड़ जाए कह नहीं सकते! फिलहाल गाँधी के सहारे केक काटे और बांटे जा रहे और इसलिए कुर्सी बची हुई बताया जा रहा है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि शिकायत और जाँच के खेल से शह और मात का होना मुश्किल है यदि दो विकेट गिरते हैं तो गुरु की जीत पक्की है लेकिन अगर जाँच की प्रक्रिया ही अंतहीन दिशा में चली गई तो समझना होगा कि खेल खेल में ही जन्मदिन का केक कटा और न्यायधानी से राजधानी तक बटा भी…है।

इस खेल में कौन पास, कौन फेल…! पर मुहज़ोरों मुँहजोरी सट्टा खेला जा रहा है इस खेल की आड़ में मन की भड़ास निकाली जा रही है और लड़खड़ाती और डगमगाती साहब और बाबू की कुर्सी के लिए मैराथन दौड़ प्रारंभ हो गया है कहते हैं साहब के बेहद करीबी माने जाने वाले एक प्राचार्य द्वारा न्यायधानी से राजधानी तक चक्कर लगाया गया है … अब किसके भाग्य में राजयोग… किसे मिलेगा कारावास…गुरु नें खाई है कसम… तो चेला भी निपटाकर ही लेगा दम… साहब दो पाटन के बीच में साबुत बचा ना कोय जैसे गेंहू में घुन की तरह पीसे जा रहे….। चर्चा चारों ओर सुनाई दे रही है।

शिक्षा विभाग की स्थिति अभी पानी में आग लगाने जैसी, मतलब जहां शान्ति है वहाँ उत्तेजना पैदा कर दिया जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ लोग जैसे RTI, राजनीति, रिटायर्ड शिक्षक,बाबू इत्यादि शिक्षा विभाग के पीछे हाथ धोकर पड़ गए हैं।

गुरु भाई, चेला की तमाम गड़बड़ियों को प्रमाण के साथ पूरी दम खम के साथ उजागर कर रहे हैं। बाल की खाल निकाल रहे हैं। सामने आकर भी हर शॉट खेलने के बाद भी बाल बांका नहीं हो रहा है। किंग मेकर परेशान है। विकेट गिराने बोली लगाई जा रही है।

जानकर हैरान हैं कि गुरु चेला की कुश्ती में शिक्षा विभाग की जग हँसाई हो रही है। लोग बहती गंगा में हाथ (अनुकम्पा)और पाप (पदोन्नति)दोनों धो रहे हैं। उधर साहब यहाँ की पोस्टिंग लेने की वजह से अब मन ही मन पछता रहे हैं। उन्हें रात को सस्पेंड होने का ख्वाब सोने नहीं दे रहा है तो दिन में उच्च अधिकारियों की फटकार रोने नहीं दे रही है।

गुरु और चेला में एक सस्पेंड से बहाल हुआ है तो चेला के ऊपर जाँच की दो धारी तलवारें लटकी हुई है। चेहरे पर सिकन साफ देखा जा सकता है। गुरु बहाल होकर भी बेकार खाली बैठा है क्योंकि इनकी तारीफ में मीडिया नें इतना कुछ लिख दिया है और अन्य आलोचकों ने जो खण्ड अधिकारी के कान भर दिए हैं इसलिए अधिकारी कोई खण्ड देने से घबरा गए हैं शायद इसलिए !
अंत में बस इतना ही कि फिल्मी दुनिया का एक बहुत ही पापुलर गाना याद आ गया कि करवटें बदलते रहे, सारी रात हम, आप की कसम …….!

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