बिलासपुर

RTI में गोलमाल “जवाब” देकर बचने बचाने की कोशिशें जारी…ऐसा क्या छुपा रहे हैं URCC वासुदेव! आवेदक नें बिल्हा BEO के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को पेश किया अपीलीय आवेदन…!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत धारा 3 में स्पष्ट किया गया है कि लोक सूचना अधिकारी को अपने कार्यों में पारदर्शिता तथा नागरिकों के प्रति उत्तरदायित्व का बोध होना चाहिए,लेकिन इसके विपरीत जानकारी नहीं देने या जानकारी छिपाने के लिए शिक्षा विभाग में जन सूचना अधिकारी द्वारा तरह तरह के फंडे और हथकंडे अपनाए जा रहे हैं उनमें से एक हैं बिल्हा विकास खंड के कार्यालय शहरी स्रोत केंद्र(समग्र शिक्षा) विकास खण्ड बिल्हा,(श.) नेहरू नगर बिलासपुर के समन्वयक वासुदेव पांडेय का सूचना के अधिकार का मामला सुर्खियों में आ गया है क्योंकि इन्ही के 15 संकुलों में एक के बाद एक संकुलों से RTI के तहत प्राप्त दस्तावेज से भ्र्ष्टाचार उजागर हो रहे हैं। अब पांडेय जी का कार्यालय भी जानकारी देने में आना- कानी कर रहा है।

सूचना के अधिकार अधिनियम लागू लागू हुए दो दशक से ऊपर हो गए लेकिन एक जन सूचना अधिकारी होने के नाते इनके URCC कार्यालय में सूचना के अधिकार का जानकारी देने वाला सूचना “पटल” ही नदारद है। ऐसा लगता है इन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम नियम में आम जनता को जानकारी देने में पांडेय जी को कोई इंटरेस्ट नहीं है ना ही ये किसी नियम कायदे कानून को मानते हैं।

ये तस्वीर इनके नेहरू नगर कार्यालय की है जहाँ सन्नाटा पसरा हुआ है ऐसा नहीं कि यहाँ कोई पदस्थ नहीं है,7 लोगों से ज्यादा लोग पदस्थ हैं पूरी तनख्वाह के साथ,लेकिन कार्यालय में एक भृत्य के अलावा कोई भी नहीं हैं।

अब ऐसे में पांडेय जी का कार्यालय में मिलना मुश्किल है 15 संकुलों की जिम्मेदारी सांस लेने की फुर्सत नहीं, ऐसे में कार्यालय में बैठने की फुर्सत कहाँ, क्योंकि इनके अंडर में 15 संकुल केंद्र हैं ये लगातार दौरा करते होंगे लेकिन बाकी के स्टाफ कहाँ नदारद हैं! भई राजनीतिक पकड़,रसूख, और सगे संबंधियों का मंत्रालय कनेक्शन कोई मजाक है क्या! लेकिन क्या कर्मचारियों के भी ऐसे ही कोई कनेक्शन हैं क्या!

नीचे की तस्वीर वाला दस्तावेज पांडेय जी के कार्यालय को बतौर जन सूचना अधिकारी कार्यालय बता रहा है और है भी, तो फिर सूचना पटल क्यों नहीं!

पांडेय जी की URCC के पद पर नियुक्ति को लेकर ही बुद्धिजीवियों का मानना है कि गलत है, पांडेय जी की नियुक्ति को लेकर नियम शर्तों की अनदेखी की गई है। सच तो यह है कि पांडेय जी नियम कायदों की परवाह भी नहीं करते,उन्हें शासन के नियम कायदों की परवाह भी नहीं, सूचना के अधिकार कानून को तो वो जूते की नोक पर रखते हैं किसी भी सूचना के अधिकार के तहत आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी देना वह अपनी तौहीन समझते हैं उल्टा यदि किसी अपीलीय अधिकारी नें सूचना के अधिकार के तहत अपीलीय सुनवाई में जानकारी देने का आदेश जारी कर भी दें तो उनके निर्देश को भी मानने से इंकार करते हैं।

खैर,अब नीचे के इस पत्र को गौर से पढ़िए ये बतौर जनसूचना अधिकारी वासुदेव पांडेय और बिल्हा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय के अपीलीय अधिकारी भूपेंद्र कौशिक के संयुक्त हस्ताक्षर से जानबूझकर जारी किया गया है। जो अपने आप में एक गंभीर लापरवाही है,मनमानी है, चूक है सिर्फ इसलिए कि वासुदेव पांडेय जन सूचना अधिकारी हैं और बीईओ बिल्हा उनके अपीलीय अधिकारी ऐसे में प्रकरण की सुनवाई ना करना पड़े,जानकारी ना देना पड़े इसलिए गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया।

अब जरा जन सूचना अधिकारी वासुदेव पांडेय का सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत आवेदक को दिया गया गोल मोल जवाब भी पढ़ लीजिए…

बिल्हा कार्यालय में भी सूचना के अधिकार का सूचना पटल नहीं लगा है ऐसे में बिल्हा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय से लापरवाही निकल कर सामने आई कि आवेदक नें कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी बिल्हा को दस्तावेज के आधार पर प्रथम अपीलीय अधिकारी मानते हुए 01/01/2026 चार अपीलीय आवेदन शुल्क सहित जमा किया पावती ली।

विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी/अपीलीय अधिकारी ने एक पत्र लिखकर आवेदक को बताया कि आपके द्वारा कार्यालय शहरी स्रोत केंद्र समग्र शिक्षा के विषय में मांगी गई थी जो इस कार्यालय एवं कार्यलय शहरी स्रोत केंद्र समग्र शिक्षा के संयुक्त हस्ताक्षर से प्रदान की गई थी यदि आप जानकारी से असंतुष्ट हैं तो प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी जिला बिलासपुर में अपील कर सकते हैं।

विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी बिल्हा नें जानबूझकर पल्ला झाड़ लिया लेकिन आवेदक के 4 अपीलीय आवेदन और 50 रुपए के 4 ई स्टाम्प भी नहीं लौटाया। जबकि आवेदन नें अपने आवेदन में स्पष्ट लिखा था कि यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय संबंधित ना हो तो तो सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (3) को संज्ञान में लेते हुए मेरा आवेदन संबंधित लोक सूचना अधिकारी को अंतरित करें,ना ही आवेदन को अंतरित किया गया, ना आवेदन और शुल्क ही लौटाया गया।

आवेदक बिल्हा बीईओ कार्यालय का चक्कर लगा कर थक गया और उसने पुनः 4 नए आवेदन तैयार कर 50-50 रुपए के चार ई स्टाम्प के साथ प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को 06/02/2026 को जमा किया है जिसकी सुनवाई 02/03/2026 को रखी है।

ऐसा मामला पहली बार नहीं हुआ है URCC वासुदेव पांडेय ने RTI के जवाब में जानकारी देने से बचने की कोशिश की हो,उनके द्वारा जानकारी नहीं देने पर 4 प्रकरण राज्य सूचना आयोग में दर्ज किया गया है।

आवेदक ने बिल्हा BEO के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को अपीलीय आवेदन पेश किया है, उम्मीद है कि उन्हें सही जानकारी मिलेगी।

हाल ही में RTI के माध्यम से संकुलों से मिले सत्यापित दस्तावेज में हुए आर्थिक अनियमितता और भ्र्ष्टाचार उजागर होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है ऊपर से की गई शिकायत पर संकुलों को समग्र शिक्षा से प्राप्त राशि की सूक्ष्मता से जाँच हो रही है ऐसे में जिले के समग्र प्रमुख कलेक्टर बिलासपुर को चाहिए कि लगे हाथ URCC बिल्हा को भी समग्र द्वारा जारी आय व्यय की राशि की निष्पक्ष जांच कराई जाय ताकि सच जनता के सामने आए!

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