शिक्षा मंत्री जी…संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में “जांच”, “RTI” और “विभागीय काम” करनें के नाम पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों नें भ्र्ष्टाचार के धन से पाल रखा है “कछुआ”।
Satyendra VermaFebruary 25, 2026
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खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि स्कूल शिक्षा मंत्री नें 11 दिसम्बर 2025 को संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक कलेक्टोरेट कार्यालय मंथन सभा कक्ष में ली थी जहां जीपीएम और रायगढ़ जिले के जिला शिक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट को यदि किनारे कर दें तो बिलासपुर सहित अन्य जिलों का रिपोर्ट कार्ड फेल बतलाया जा रहा है ऐसे में सवाल खड़े होना लाजमी है कि बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी, मंत्री सहित उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद भी व्यवस्था सुधारने के प्रयास में सफल नहीं हो रहे हैं, इनके विभाग में कभी कोई कर्मचारी रिश्वत मांगने के आरोप में सस्पेंड हो रहा है तो कभी किसी बाबू का लेन देन का ऑडियो वायरल हो रहा है तो कभी शिक्षक शराब के नशे में चूर जिम्मेदारों की उदासीनता पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है तो कहीं तत्कालीन तो कहीं वर्तमान विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी भ्र्ष्टाचार के मामले में फंसी कलम और कुर्सी बचाने जद्दोजहद राजधानी रायपुर तक करते नजर आ रहे हैं।
दूसरी ओर कार्यालय में बाबुओं के बीच आपसी रंजिश निभाई जा रही है जिससे बहु-प्रभारीय बाबू की नियम विरुद्ध लेन देन की गंभीर आर्थिक शिकायत पर तत्काल प्रभार विहीन कर अन्य बाबू को प्रभार सौपा जा रहा है लेकिन बाबुओं द्वारा प्रभार नहीं लिए जाने से शिक्षा विभाग की लिपकीय व्यवस्था चरमरा गई है,दूसरी तरफ समग्र शिक्षा की ओर से संकुलों में जारी अनुदान राशि का बिजौर, सिरगिट्टी, देवरीखुर्द सहित 15 संकुलों में प्राप्त समग्र अनुदान राशि में जमकर बंदरबांट किए जाने का खुलासा जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता को उजागर करने जैसा है।
वहीं शिक्षा विभाग में RTI के अपीलीय आवेदन पर 45 दिन बीत जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है जिस पर सुनवाई हो गई है उसका आदेश जारी नहीं किया गया है, और जिन प्रकरणों में आदेश जारी कर दिया गया है उसमें जन सूचना अधिकारी जानकारी नहीं दे रहे हैं,जिससे आरईआईटी का काम काज प्रभावित हो रहा है ऊपर से जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय में अन्य कारणों से नहीं बैठना, व्यवस्था को और लचर बना रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अपने काम लेकर आए आम आदमी, विभागीय कर्मचारी, सम्बंधित लोग जाएं कहाँ!
आगुन्तक पूछते हैं कि सरकार इन्हें किस बात की तनख्वाह देती है और शासन की तमाम सुविधाओं का उपयोग वह किस वजह से कर रहे हैं! यदि कलेक्टोरेट के सामने पुराने कंपोजिट बिल्डिंग में लगने वाले जिला शिक्षा कार्यालय का यह हाल है तो ग्रामीण अंचलों में संचालित विकास खण्ड शिक्षा कार्यालयों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है!
01. कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर में यदि प्रमाणित दस्तावेज सहित लिखित शिकायत की जाती है तो महीनों तक शिकायत आवेदन को संज्ञान में नहीं लिया जाता, शिकायत आवेदन की फाइल को शिकायत शाखा प्रभारी द्वारा महीनों दबा कर रख दिया जाता है। आवेदक चक्कर लगाने मजबूर है।
02 वहीं कार्यालय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर में भी यदि प्रमाणित दस्तावेज के साथ शिकायत किए जाने पर यहाँ भी महीनों दबी शिकायत की पूछ परख पर गोल मोल जवाब दिया जाता है यदि आवेदक बार बार चक्कर लगाए तब जाकर खुद की टीम गठित करने के बजाए,जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर कि शिकायत की जाँच कर 7 दिवस के भीतर स्पष्ट अभिमत सहित प्रतिवेदन इस कार्यालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें, का पत्र लिखकर पुनः कुम्भकर्णीय नींद में सो जाते हैं।
इसके बाद ना नियमानुसार कार्यालय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग कार्यालय बिलासपुर से स्मरण पत्र जारी किया जाता है, ना ही जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा इस मामले में जाँच टीम गठित की जाती है, आवेदक के बार बार पूछे जाने पर धोखे से यदि जाँच अधिकारी की टीम गठित कर भी दी जाती है तो संबंधित जाँच अधिकारी को पत्र भेजने में जानबूझकर विलंब किया जाता है।
यदि जाँच शुरू कर भी दी जाती है तो जिन शिक्षा अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायत की गई है वह सहयोग नहीं करते। ऐसे में लंबे इंतजार के बाद थकहार कर “जाँच अधिकारी” अपने अभिमत के साथ रिपोर्ट पेश कर देते हैं उसके बाद यदि न्याय की उम्मीद से बंधा आवेदक स्वयं जाँच रिपोर्ट की कॉपी के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन दे भी दे तो उसे जवाब मिलता है कि “जाँच प्रक्रियाधीन” है। ऐसे में तो सवाल उठता है कि शासकीय कार्य में उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले तनख्वाहखोर अधिकारियों पर कलेक्टर बिलासपुर की समीक्षा बैठक,टीएल बैठक में ये सवाल क्यों नहीं पूछा जाता कि कितनी शिकायतें मिली और आज दिनाँक तक उस पर क्या कुछ कार्यवाही की गई या क्यों नहीं कि गई?
बुद्धिजीवी वर्ग कहता है कि या तो कलेक्टर और मंत्री की समीक्षा बैठक महज दिखावा है या फिर ये लोग जानबूझकर अनदेखी करते हैं?
साहब, जिले के मुखिया बिलासपुर कलेक्टर प्रति सप्ताह विभागवार टीएल की मैराथन बैठक ले रहे हैं बावजूद शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों में कोई प्रगति दिखाई नहीं देती, ऐसा लगता है कि हवा हवाई कागजी आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं और यही कागजी घोड़े राजधानी तक दौड़ाए जा रहे हैं।
यदि विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय बिल्हा के फर्जी मेडिकल बिल मामले में घोटालेबाजों पर अब तक FIR नहीं हुई है और बिल्हा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय से फिर मेडिकल बिल पास कराने के नाम पर एक ऑडियो सोशल मीडिया में वाइरल होने से दोनों बाबू को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन शिक्षा विभाग में पसरी गन्दगी को दूर करने कोई ठोस कदम, क्यों नहीं उठाया जा रहा है यह एक गंभीर सवाल है!
कुल मिलाकर तनख्वाह खोर जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता का परिणाम है कि ऐसे मामले लगातार बार बार सामने आ रहे हैं।
कलेक्टर बिलासपुर समग्र शिक्षा प्रमुख हैं और बिल्हा विकास खण्ड के अंतर्गत बिजौर संकुल प्राचार्य और संकुल समन्वयक नें मिलकर पिछले चार वित्तीय वर्ष में प्राप्त राशि का जैसे परिवहन, स्वल्पाहार, लंच, सामाग्री खरीदने,उपचारात्मक शिक्षा और प्रशिक्षण के नाम पर फर्जी बिल लगा कर राशि आहरण कर गबन कर लिया गया। समस्त प्रमाणित दस्तावेज के साथ कलेक्टर बिलासपुर से भी शिकायत किया गया लेकिन अब जाँच टीम का गठन तो कर दिया गया है,लेकिन जाँच अभी जारी है!
बिल्हा ब्लॉक में सैकड़ों सेवा पुस्तिका अपूर्ण हैं। दर्जनों शिक्षकों के सेवा पुस्तिका ही कार्यालय में नहीं है इस मामले में विभाग प्रमुख जानकर अनजान हैं मौन हैं!
RTI को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जनसूचना अधिकारी को जमा किए गए आवेदन जन सूचना अधिकारी कार्यालय तक नहीं पहुंचना, आवेदक नें अपील भी कर दिया, मजे की बात अपीलीय प्रकरण की सुनवाई हेतु भी कोई पत्र जनसूचना अधिकारी को नहीं मिला है ऐसे में वह जवाब क्या देंगे!
बहरहाल बदहाल शिक्षा व्यवस्था,पीड़ित जनता और शिक्षकों की गुहार पहुंचाने खबर खास की टीम लगातार कोशिश कर रही है, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल दर सवाल पूछ कर शिक्षा विभाग से जुड़ी खबरें प्रसारित कर समस्याओं के हल का प्रयास और गंभीर समस्या को छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा मंत्री तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है।
बुद्धिजीवियों का कहना है कि राजधानी रायपुर से लेकर संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जांच और जाँच के नाम पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों नें भ्र्ष्टाचार के स्विमिंग पूल में जो “कछुआ” पाल रखा है वह अपने आप में बड़ा सवाल है… इसलिए ज्यादातर विभागों में भ्र्ष्टाचार की कमाई से बने बड़े भारी स्विमिंग पूल में जाँच रूपी सुस्तहा “कछुआ” ही पाला पोसा जा रहा है! जरूरत है ऐसी लचर व्यवस्था को ध्वस्त करनें की लेकिन सवाल यह कि शुरुआत कब होगी, कहाँ से होगी,कौन करेगा?