युक्तियुक्तकरण में संशोधन आदेश नें किया कमाल या शिक्षक से लिया गया है मनमाफिक “माल”! “साहब”, उठ रहा सवाल?

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर।युक्तियुक्तकरण,अतिशेष सूची और संशोधन आदेश जैसे मामले नें एक बार फिर शिक्षा विभाग के तेज,तर्रार और अनुशासित व जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारियों को सवालों के कटघरे में ला खड़ा किया है। ऐसे में एक शिक्षक का संशोधन आदेश शिक्षा विभाग में चल रही दुकानदारी का पोल खोलते नजर आती है।

युक्तियुक्तकरण और अतिशेष सूची जारी होने के बाद संशोधन आदेश में स्कूल का नाम बदल जाना,जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता नजर आता है।
यह मामला है बिल्हा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय अंतर्गत प्राथमिक शाला कन्या बिरकोना विकास खण्ड बिल्हा में पदस्थ ममता छात्रे नामक प्रधान पाठक वर्तमान में पदस्थ थीं, काउंसलिंग के दौरान इन्होंने घोषणा पत्र में स्कूल का नाम था शासकीय प्राथमिक शाला धूमा बिल्हा फिर चंद घंटों में ऐसा क्या हुआ कि इनका संशोधन आदेश जारी किया गया जिसमें पदांकित संस्था का नाम जन प्राथमिक शाला कोरमी धूमा बिल्हा किया गया।
जानकर कहते हैं कि ऐसा लगता है कि जिम्मेदार और उनकी टीम की तरफ से जानबूझकर गड़बड़ी और हड़बड़ी किया गया है। सांठगांठ साफ तौर से दिखाई दे रही है जो किसी ना किसी तरह से लेनदेन की ओर इशारा करते नजर आता है। ये अलग बात है जिले के प्रमुख कलेक्टर बिलासपुर ऐसे दर्जनों मामलों को गंभीरता से संज्ञान में लेकर दिशा निर्देश जारी कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग की कार्यशैली से परेशान शिक्षकों का कहना है कि डायन भी एक घर छोड़ कर चलती है कुछ लोग ऐसे ही जोर जुगाड़ से बेड़ा पार लगा रहे हैं चारों ओर शिक्षकों में नाराजगी संग बवाल मचा हुआ है कुछ तो न्यायालय की शरण में हैं।

एक शिक्षक को युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के दौरान अतिशेष सूची में नाम होने पर पहले जो स्कूल आबंटित हुआ था,वह चंद घंटों में संशोधन आदेश जारी होने पर शाला का नाम ही बदल गया ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अधिकारियों की टीम नें ऐसा किया क्यों!
गड़बड़ी के ऐसे मामले जब निकलकर जिम्मेदारों तक आते हैं तो, कम से कम मामले को संज्ञान में लेकर कारण बतलाओ नोटिस जारी करते हुए सच के तह तक जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ी सामने ना आए।
अंत में बस इतना ही कि युक्तियुक्तकरण से उन शिक्षकों का भरोसा टूटा है जो षड्यंत्र कारी व्यवस्था का शिकार हो गये हैं उन्हें भी इंतजार है युक्तियुक्तकरण के आदेश के निरस्तीकरण का।





