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बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग का हाल – बेहाल…बाबुओं की कुर्सी खतरे में! बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी नें प्यून को बनाया ‘पावरफुल’ सहयोगी बाबू।

बिलासपुर खबर ख़ास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। इन दिनों शिक्षा विभाग बिलासपुर कार्यालय का हाल बेहाल हैं एक साथ तीन तीन खण्ड का प्रभार वाले बाबू के खिलाफ गंभीर शिकायत होने की वजह से उन्हें हटा दिया गया है वहीं अन्य कोई बाबू प्रभार लेना नहीं चाहते इसलिए काम काज ठप्प हो गया है। साहब कार्यालय को समय नहीं दे रहे हैं इसलिए सब हाल बेहाल है।

बता दें कि यहाँ जिला शिक्षा अधिकारी के रुप में पूर्व में विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कोटा रहे विजय टान्डे पदस्थ हैं और इनके कार्यकाल में कार्यालय के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं यदि ऊपर की इस तस्वीर को गौर से देखें तो कम्प्यूटर टेबल से लगी कुर्सी पर बाबू की तरह कम्प्यूटर के सामने बैठा यह शख्स, कोई बाबू नहीं है बल्कि एक भृत्य है, चपरासी है,प्यून है। कार्यालय में फाइल आदि लाने ले जाने वाला,सफ़ाई करनें वाला,चौकीदारी करनें वाला,साहेब के केबिन के बाहर बैठनें वाला भृत्य है।

ये अलग बात है कि इस शख्स को बाकायदा जिला शिक्षा अधिकारी के जारी आदेश पर कार्यालयीन कार्य को सुचारू रूप से संचालन करने स्थापना खण्ड के बाबू का सहयोग करने हेतू रखा गया है। अब तस्वीर को देखकर तो नहीं लगता है कि ये स्थापना शाखा के किसी बाबू को सहयोग कर रहा है। ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी ही सहयोग शब्द को अच्छे से परिभाषित कर सकते हैं!

यहाँ पूर्व में पदस्थ बाबू सुनील यादव पर लिखित रूप में गंभीर शिकायत किए जाने से उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी ने कार्य से अलग कर दिया गया है तब से शिकायत जाँच शाखा और न्यायालयीन, स्थापना-4,मेडिकल, और अनुकंपा नियुक्ति खण्ड अनाथ सा हो गया है इस खंड को जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश के बाद भी कोई भी कर्मचारी लेना नहीं चाहता!

सूत्रों के हवाले से तो यह खबर भी निकल कर आ रही है कि यह सब खण्ड मनहूस खण्ड है, इसका प्रभार लेने से ससपेंड होने का खतरा बढ़ जाता है, रात की नींद दिन का चैन छीन जाता है। सूत्रों की मानें तो शिकायत की जाँच पड़ताल होने पर मामले से संबंधितों की फाइल मंगाई जाएगी जो प्रभार लेने के बाद नहीं मिली तो?

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी नें दबी जुबान से कहा कि ये शिक्षा विभाग का कार्यालय है या जंगल राज? एक नें नाम नहीं उजागर किए जाने की शर्त पर हमारे कान में कहा कि DEO टान्डे के राज में ‘चपरासी’ बना ‘बाबू’, लंबित प्रकरणों फाइलों की गोपनीयता की पर उठ रहे सवाल!
न्यायधानी बिलासपुर का शिक्षा विभाग इन दिनों अपने ही अधिकारी और कर्मचारियों के करतूतों के चलते नियमों की धज्जियां उड़ाने का केंद्र बन गया है। जिला शिक्षा अधिकारी विजय टान्डे के नाक के नीचे भ्रष्टाचार और मनमानी का ऐसा खेल चल रहा है,जिसकी शिकायत और चल रही जाँच जिसने कार्यालय को तमाशा बना दिया है। आगंतुकों भी बार बार आकर जिला शिक्षा अधिकारी का इंतजार कर थक गए हैं।

कार्यालय की एक तस्वीर ने पूरे प्रशासनिक अमले को बेनकाब कर दिया है, जहाँ एक चपरासी (भृत्य) बाबू साहब की मेज पर बैठकर धड़ल्ले से कंप्यूटर चला रहा है और विभाग की गोपनीय फाइलें खंगाल रहा है।

साहब का ‘विशेष’ आदेश:

प्यून को बनाया कंप्यूटर ऑपरेटर!
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कोई चोरी-छिपे होने वाला काम नहीं है। खुद जिला शिक्षा अधिकारी ने कागजों पर इस भृत्य को ‘स्थापना शाखा’ में सहयोग के लिए तैनात किया है। सवाल यह उठता है कि क्या बिलासपुर जिले में बाबुओं का अकाल पड़ गया है?

सूचना के अधिकार के तहत यहाँ दर्जनों मामले नियम विरुद्ध पेंडिंग हैं अपीलीय प्रकरणों की सुनवाई कभी अधिकारी की अनुपस्थिति कभी अटैच बाबू की अनुपस्थिति के चलते टल रही है या टाली जा रही है।

जिला शिक्षा अधिकारी इन दिनों कार्यालय में यदा कदा ही बैठते हैं वे कभी रायपुर कभी हाइकोर्ट में प्रकरणों की सुनवाई में जाते है। वहीं प्राचार्य, व्याख्याता या किसी काम से आने वाले आगंतुक घंटो उनके इंतजार में बैठे रहते हैं उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी आएंगे या नहीं बैठेंगे या नहीं अपडेट देने वाला कोई नहीं है।

सवाल नंबर 1: एक अनट्रेंड भृत्य गोपनीय पासवर्ड और डेटा का इस्तेमाल कैसे कर रहा है?

DEO साहब की मेहरबानी…
जिस शख्स का काम साहेब के केबिन के बाहर घंटी का इंतज़ार करना था, उसे कंप्यूटर पर बैठाकर जिला शिक्षा अधिकारी टान्डे ने यह साबित कर दिया है कि उनके राज में योग्यता नहीं, बल्कि ‘खास पसंद’ मायने रखती है। कार्यालय में चर्चा का विषय है कि जिस रफ्तार से चपरासी को बाबू बनाया गया है, कल को वह DEO की कुर्सी पर बैठकर साहब को चाय पिलाने का आदेश भी दे सकता है।

खबर खास बिलासपुर छत्तीसगढ़ खबर के माध्यम से कलेक्टर बिलासपुर के संज्ञान में मामले को लाना चाहता है ताकि व्यवस्था में सुधार हो,अगर एक भृत्य ही कंप्यूटर ऑपरेटर और बाबू का काम करेगा, तो विभाग में बैठे उच्च शिक्षित योग्य कर्मचारियों को किस बात की तनख्वाह और क्या काम?

यह खबर लचर व्यवस्था को एक चेतावनी है,यह तस्वीर सिर्फ एक कुर्सी की नहीं, बल्कि बिलासपुर शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता का जीता जागता उदाहरण है और बेलगाम हो चुके अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली का जीता-जागता नमूना है।

यदि राजधानी में बैठे जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस खबर को पढ़ रहे हो तो संज्ञान में लेते हुए कोई ठोस कदम उठाए, नहीं तो शिक्षा विभाग वैसे ही कछुआ पालने को लेकर बदनाम है!

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