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युक्तियुक्तकरण का हो गया खेल… कोई पास कोई फेल! शिक्षा विभाग में,हकीकत से उलट बेहतरी का दिखावा निकला छलावा!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। बिलासपुर शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया और अधिकारी कर्मचारियों की पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली निपट नौसिखिए के हालात बयां करते नजर आते हैं। वर्तमान में शिक्षा विभाग और उसके हालात चिंताजनक और सवालों के घेरे में है।

चूँकि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली हकीकत से उलट बेहतरी का दिखावा अर्थात छलावा नजर आ रही इसलिए युक्तियुक्तकरण और अतिशेष सूची में नाम होने या नहीं होने का शिक्षकों का आंतरिक विरोध अतिशेष शिक्षकों की सूची में चौंकाने वाली फेरबदल त्रुटियां के रूप में सामने आई हैं। विभाग में पिछले तीन दिनों में दर्जनों शिकायत पत्र आए हैं लेकिन पावती नही दिए जाने से शिक्षकों और संगठनों में असंतोष देखा जा रहा है।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि ऐसे कई नाम हैं जो पहले अतिशेष सूची में अंकित थे लेकिन एक रात में ऐसा क्या करिश्मा हुआ कि नाम ही नदारद हो गए। ये बेहद दिलचस्प वाकया था मसलन ऐसे अटैच शिक्षक भी थे जिन्होंने शिक्षकों की सूची तैयार की थी और उनका नाम भी सूची में था फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि नाम गायब हो गए।

रविन्द्र बागड़े, आशीष वर्मा CAC सिरगिट्टी,चंद्रहास साहू,हर्षवर्धन,तिरिथ, बसंत,स्वाति, उमा,गुप्ता और भी नाम है जो अब अतिशेष सूची में नहीं है। नाराज शिक्षक कहते हैं जाँच होनी चाहिए।

ये सिर्फ बिल्हा विकास खण्ड के नाम हैं जो बड़ी तेजी से अतिशेष होने के बावजूद नाम को सूची से गायब कर दिया गया है।

जब नाराज शिक्षकों ने इनके विरुद्ध अपनी शिकायत लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बिलासपुर कार्यालय का दरवाजा खटखटाया, तो उन्हें वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से कोई सहयोग नहीं मिला, जिसके बाद उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा था।

शिक्षा विभाग में बड़ी गड़बड़ी,मास्टर माइंड कौन?

शिक्षा विभाग पहले व्यंग और उपहास का केंद्र था अब शिक्षा विभाग के बारे में आलोचक खुलकर आलोचना करनें से बचते हैं कहते हैं दुकानदारी चल रही है युक्तियुक्तकरण को शिक्षा अधिकारियों का त्यौहार बतलाते हैं गर्मी के इस मौसम में इस युक्तियुक्तकरण को बेमौसम धन की बारिश लक्ष्मी और नारायण की कृपादृष्टि कहा जा रहा है। सोशल मीडिया के जमाने में इस पूरे प्रकरण में भ्रष्टाचार और लेनदेन की बू दूर तलक आ रही है।

सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों शिक्षक /शिक्षिका का नाम अतिशेष होने के बावजूद सूची से नाम गायब कर दिया गया और क्यों उनकी वैध आपत्ति को सुनने से भी इनकार किया गया?

विभागीय सूत्रों के अनुसार, विभाग के भीतर बड़े प्रभावशाली अधिकारी के इशारे पर बड़े बाबू लंबी रकम की पेशकश कर शिक्षकों के नाम,सूची से हटाने या जोड़ने का खेल बेखौफ किया गया है।

बहरहाल शिक्षा विभाग पर युक्तियुक्तकरण और अतिशेष सूची से लगी कालिख शिक्षकों को आंदोलन की राह दिखाने मशाल का काम कर रही है, देखना होगा कि मशाल की रौशनी, उच्च अधिकारियों के इर्दगिर्द फैले अंधकार रूपी भ्र्ष्टाचार को उजागर करने कोई ठोस कदम उठाने कोई आदेश देते हैं या नहीं!

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