जयराम नगर में स्थित सौ साल पुराना शिव मंदिर और मंदिर में स्थापित दुर्लभ कामधेनु शंख,शिवलिंग पर रुद्राक्ष की माला और क्या है “खास” इस मंदिर से जुड़ी बातें जानने के लिए पढ़िए खबर खास की स्पेशल रिपोर्ट।

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। जयराम नगर स्थित शिव मंदिर का निर्माण स्व श्री जयराम वालजी नें 1922 में अपनी निजी भूमि पर करवाया था।

ये वही जयराम वालजी हैं जिनके नाम पर आज जयराम नगर रेलवे स्टेशन है और आज उनके द्वारा स्थापित इस शिव मंदिर को पूरे 100 साल हो गए हैं।

बिलासपुर जिले में स्थित एक रेलवे स्टेशन जो जयराम नगर के नाम से जाना जाता है इसी जयराम नगर में स्थित है एक सौ साल पुराना शिव मंदिर और इस मंदिर को श्री बालेश्वर महादेव शिवालय के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर की देखरेख आज भी स्व श्री जयराम वालजी के परिजनों द्वारा किया जा रहा है।तीन पीढ़ियों नें इस मंदिर को संजोकर रखा है।

इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर रुद्राक्ष की माला है तो वहीं शिवलिंग के निकट ही एक दुर्लभ कामधेनु शंख स्थापित है। ऐसा कहा जाता है कि कामधेनु शंख कलयुग में मानव की मनोकामना पूर्ण करनें का एकमात्र साधन है।

शिव मंदिर दो विशाल पीपल के वृक्ष के नीचे स्थापित है मंदिर के ठीक सामने एक बड़ा सा कुआँ है। कहते हैं इस कुँए का जल मीठा और शीतलता प्रदान करने वाला है और इस कुँए का जल स्तर साल के 12 महीने एक समान रहता है।

मंदिर से कुछ दूरी पर एक बड़ा सा काफी गहरा सरोवर है यहां स्नान कर स्थानीय लोग भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

मंदिर के चारों ओर मोगरे फूलों का एक बगीचा है जिसके कलियां और फूल भगवान शिव के शिवलिंग पर चढ़ाए जाते हैं। चारों ओर बिखरी मोगरे फूल की खुशबू आगन्तुक श्रद्धालु भक्तजनों के मन को प्रफुल्लित करती है।

देखते देखते शिव मंदिर 100 वर्ष पूरे हो गए कल 22 मई 2022 को मंदिर स्थापित हुए 100 साल हो जाएगा।
जयराम नगर के इस शिवमंदिर में श्रद्धालु भक्तगण प्रतिदिन महादेव का जलाभिषेक करनें आते हैं किंतु महाशिवरात्रि पर मनोवांछित फल पाने की इच्छा लेकर पूजा अर्चना करनें वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती ही जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि देवाधिदेव भगवान महादेव के शिवलिंग पर जलाभिषेक कर मांगी गई प्रत्येक मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

शिव मंदिर को लेकर स्थानीय लोगो मे आस्था और विश्वास की डोर इसलिए और मजबूत हो जाती है यहाँ स्थापित सरोवर के पानी को सुखाने दर्जनों बड़े बड़े मोटर पंप लगाकर खाली करने का अथक प्रयास कई दिनों तक किया गया किंतु इस जलाशय का एक इंच पानी कम नहीं हुआ स्थानीय लोग इस घटना के बाद से इसे भगवान शंकर का वरदानी तालाब कहते हैं।

यही कारण है कि शिव जी के अनन्य भक्त जयराम वालजी के द्वारा स्थापित किये गए इस मंदिर को आज भी उनके नाम से याद किया जाता है।

मंदिर के पुजारी और वालजी के परिवार वालो ने बताया कि 21 मई को शोभायात्रा,पूजा और भक्तो की भीड़ रहेगी,इसके अलावा 22 मई को सुबह से जलाभिषेक और यज्ञ के अलावा विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा,जिसमे न सिर्फ जयराम नगर बल्कि मस्तूरी और आसपास के श्रद्धालुओं की भीड़ भी हजारों की संख्या में महादेव के दर्शन को आएंगे।





