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निर्माणाधीन नहर में दरार…अधिकाररियों की उदासीनता उजागर, जमकर हो रहा भ्र्ष्टाचार!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। जल संसाधन संभाग के द्वारा बतौर निर्माण एजेंसी कराए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य की निगरानी विभाग के टाइम कीपर,सब इंजीनियर,इंजीनियर,एसडीओ,ईई और शासन स्तर पर की जाती है बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों का ठेकेदार द्वारा गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल किए जाने से नहर निर्माण में आई दरार की अनदेखी किया जाना अधिकाररियों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ को उजागर करता नजर आता है।

ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला मस्तूरी के भरारी व्यपवर्तन योजना में बन रही नहर निर्माण में तब सामने आया जब ग्रामीणों की शिकायत पर खबर खास की टीम नें मौके पर जाकर पड़ताल की।

मिली जानकारी के अनुसार खारंग जल संसाधन संभाग बिलासपुर अंतर्गत जल संसाधन उपसंभाग बिलासपुर द्वारा विकासखंड क्षेत्र मस्तूरी के ग्राम भरारी में करोड़ों रुपए से निर्मित भरारी व्यपवर्तन योजना के सिंचाई हेतु 13.14 किलोमीटर फीडर नहर का निर्माण ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है. मौके पर ना तो सूचना पटल लगाया गया था ना ही विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

नहर निर्माण कार्य ठेकेदार के मजदूरों द्वारा किया जा रहा था,इस्तेमाल की जा रही सामग्री गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जा रहा,जिसके चलते बन रही नहर में दरारें उभर सामने आ रही है।

मतलब साफ है सरकार से पूरी तनख्वाह पाने के बाद भी मौके पर मौजूद रहने की बजाय अधिकारी ठेकेदार द्वारा मापदंडों के विपरीत घटिया निर्माण को जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं।

इतना ही नहीं 2017-18 में अर्थवर्क अर्थात नहर खुदाई के दौरान भी विभाग के जिम्मेदार अधिकाररियों नें ठेकेदार द्वारा किए जा रहे काम की मोनेटरिंग में उदासीनता बरती नतीजा नहर के दोनों तरफ बड़े बड़े पत्थर निकले हुए हैं जिनकी कटाई नहीं कि गई जिससे नहर निर्माण के दौरान उन्हें छोड़ दिया गया है। किंतु आनन फानन में नहर की खोदाई करनें वाले ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया है।

ठेकेदार द्वारा कार्य की धीमी गति,अधिकाररियों की उदासीनता, सामग्री की गुणवत्ता एवं कार्यकुशलता सही नहीं होने के कारण नहर निर्माण कार्य पूर्ण होने की संभावना कम ही नजर आती है।

सिंचाई विभाग जो नहर की निर्माण एजेंसी है और निर्माण करने वाले ठेकेदार द्वारा नहर निर्माण कार्य में ड्राइंग डिजाइन को भी अपनी सुविधा अनुसार चेंज कर दिया गया है जो अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

क्रमशः ……..

सवाल

योजना की शुरुआत कब हुई?

कुल कितने लागत की है योजना?

कितने ठेकेदारों नें मिलकर काम किया है?

कितने किसानों को मुआवजे का इंतजार है?

गुणवत्ता नियंत्रण इकाई नें मौके पर जांच किया?

किन अधिकाररियों की निगरानी में किया जा रहा काम?

भूमि अधिग्रहित किसानों को मिलेगा पानी?

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