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GPM जनपद को चला रहा सत्ताधारी दल का नेता पुत्र…!अधिकारी “आदेश” माने तो ठीक,नहीं तो हो जाओगे अटैच…!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। जीपीएम/ जीपीएम जिले में इन दिनों सत्ताधारी पार्टी के नेता पुत्र की कमीशन पर राजनीतिक दुकानदारी की चर्चा जोरों पर है इन्हें तो सरकार की जमीनी स्तर पर हो रही आलोचनाओं का भय ही नहीं और जनपद कार्यालय की बात करें तो यहाँ पर एक जनप्रतिनिधि की दुर्भावनापूर्ण झूठी शिकायत और बेजा दबाव के बाद अटैच का बेहद दिलचस्प मामला सुर्खियों में हैं।

यहाँ के राजनीतिक सूत्रधारों की मानें तो शासकीय कार्यालयों में नेता पुत्र का दखलंदाजी चरम पर है ऐसा लगता है मानों सरकार की भद्द करके ही मानेगा।

हाल ही में उसने एक जनपद सीईओ को इसलिए टारगेट बनाकर अटैच करवाया क्योंकि सीईओ उनकी ट्रेवल एजेंसी की तरह गाड़ियों को कार्यालयीन कार्य में बेवजह लगाने तैयार नहीं थीं, सीईओ कार्यालय में बिना जिला पंचायत सीईओ की अनुमति किसी भी को बतौर संविदा कर्मचारी काम पर रखने तैयार नहीं थी। ऐसे में नेता पुत्र नें इसे अपना और अपनी सरकार का अपमान मानते हुए सीईओ जनपद जनपद को निपटाने एक से बढ़कर दुर्भावना पूर्ण शिकायती पत्र और राजनीतिक हथकंडे अपनाया और अपने (अटैच) वाले मनसूबे पर कामयाब हो गया। लेकिन सूत्र बताते हैं कि सीईओ नें भी हार नहीं मानी वह न्यायालय की शरण में हैं।

ऐसे में एक बड़ा सवाल यह खड़े होता है कि नेता पुत्र द्वारा नियम विरुद्ध किए जा रहे भ्रष्टाचार में शामिल ना होना, ईमानदार अधिकारी का गलत तरीके से किए जाने वाले कार्यों में संलिप्तता से इंकार किया जाना,नेता पुत्र का दबाव बना कर किसी को भी सविदा नियुक्ति पर रखने का दबाव डालना, जैसे मामलों में अधिकारी का अनदेखी करना अटैचमेंट का कारण बन गया!

बुद्धिजीवी वर्ग कहते हैं कि अटैचमेंट का जिस अधिकारी नें आदेश जारी किया है उस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या अटैचमेंट उस अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है!

सवाल यह कि ऐसे राजनीतिक दबाव में कोई भी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी, निष्ठा और कार्यकुशलता के साथ कैसे कर सकेगा!… कैसे!

सूत्रों की मानें तो जिला कलेक्टर कार्यालय अन्तर्गत एक इंजीनियर साहब पदस्थ हैं जो दिव्यांगता प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं। इन्हें हर बड़ा अधिकारी कल्पवृक्ष अर्थात हर जिला प्रमुख अधिकारी की धनोकामना पूरी करने वाला इंजीनियर कहा जाता है। इनकी भूमिका निसंदेह सवालों के घेरे में है जानकार कहते हैं कि इस कमीशन खोर धनकुबेर इंजीनियर का हाल ही में कोटा स्थानांतरण हुआ था किंतु स्थानांतरण होने के बाद भी उसे रोक कर रखा गया है? शासन के जारी स्थानांतरण आदेश की अनदेखी की जा रही है।

कहते हैं कि वह कमाऊ इंजीनियर दुधारू गाय है और सबसे बड़ी बात कमा कर देता है, इतना की जुड़े अधिकारी कई जगह प्लाट, फ्लेट, फॉर्म हाउस अपने अपनों के नाम खरीद बैठे हैं…!

भेदिया बतलाते हैं कि इस नए नवेले जिले में करोड़ों की लागत से एक ऐसा बांध बनाया गया है जिसमें कहते हैं कि यदि इसकी जाँच कराई जाएगी तो निर्माण के हिस्से से हर इट से भरष्टाचार उजागर होगा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को भी बांध के मोह से “बांध” रखा गया है कहते हैं बांध के ऊपर तैरता रेस्टोरेंट
जिसे करोड़ों की लागत से बनाया गया लेकिन धरातल पर बांध के ऊपर बनाया गया तैरता रेस्टोरेंट
का भौतिक सत्यापन करा लिया जाय तो एक बड़े पैमाने पर हुए संगठित भ्रष्टाचार का सनसनी खेज खुलासा होगा।

यही नहीं जनपद कार्यालयों में दलबदलू नेता पुत्र की गाड़ियां चल रही है और गाड़िया चलाए जाने के लिए भयंकर दबाव बनाया जाता है नहीं करो तो अधिकारियों के खिलाफ झूठी मनगढ़ंत शिकायत कर सस्पेंड या अटैचमेंट का गंदा खेल खेला जाता है। इस तरह से जिले में एक नेता पुत्र का खुद को लाभ पहुंचाने के लिए बेईमानी का खेल खेलना सरकार की क्षवि को दांव लगाने जैसा है और कई ईमानदार अधिकारी और कर्मचारी इसके शिकार भी हो रहे है। यदि इनकी हरकतों पर शीघ्रता शीघ्र विराम नहीं लगाया गया तो भविष्य में विरोध का मंजर सरकार के दरवाजे पर दस्तक देते नजर आएंगे!

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