बिलासपुर

सरकारी स्कूल के शिक्षक नें बच्चों को जमकर कूटा…! अब शिकायत जाँच पर दे रहे सफ़ाई पर सफाई… मैं ऐसा नहीं हूँ मेरे भाई!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। एक खबर कोटा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय अंतर्गत संचालित शासकीय प्राथमिक शाला टिकरी पारा, संकुल केंद्र तेंदुआ, संकुल प्राचार्य तेंदुआ विकास खण्ड कोटा से निकल कर सामने आई कि युक्तियुक्तकरण के बाद सुदूर ग्रामीण अंचल के एक आदिवासी बहुल इलाके के शासकीय प्राथमिक शाला टिकरी पारा, संकुल केंद्र तेंदुआ, विकास खण्ड कोटा में युक्तियुक्तकरण के बाद पदस्थ एक सहायक शिक्षक पुरषोत्तम चंद्रा भूतपूर्व सैनिक नें 4/8/25 को स्कूल में पढ़ने वाले कुछ बच्चों को दोपहर में पूछताछ के दौरान डंडे से सिर्फ इसलिए जमकर कूट दिया,क्योंकि कि बच्चों ने टीचर की गाड़ी की लाइट का कांच फोड़ दिया था।

शिक्षक का बच्चों को कूटना,फिर इस मामले में बच्चों का घर जाकर पालकों से रो रो रोकर शिकायत करनें से पालको की नाराजगी निकल कर सामने आने से मामले का तूल पकड़ने पर मिलन दास मानिकपुरी हेडमास्टर, संकुल समन्वयक दिनेश चंद्र साहू और संकुल प्राचार्य गोपाल सिंह ध्रुव ने दूसरे दिन 5/8/25 को फौरी तौर पर स्कूल में कोई अप्रिय घटना कारित ना हो इसलिए आरोपित शिक्षक से पूछताछ करनें के बाद, एक शिकायती पत्र लिखकर शिक्षक को दोषी मानते हुए कोटा के प्रभारी बीईओ नरेन्द्र मिश्रा को सौंप दिया।

वही पत्र को बीईओ नें जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे बिलासपुर को जो पहले कभी कोटा विकास खण्ड के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी थे इन पर भ्र्ष्टाचार का गंभीर आरोप लगने पर जांच के बाद हटा दिया गया था को भेजे जाने की बात कहा है, वहीं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर में आरोपित शिक्षक को बुलाकर या शिक्षक पुरषोत्तम चंद्रा द्वारा स्वयं जाकर जो भी हो, उनका पक्ष भी सुन लिया गया है उम्मीद है कि 15 अगस्त के बाद निर्णय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा लिया सकता है।

इस दौरान खबर खास की टीम द्वारा खबर में अपडेट प्राप्त करने के लिए संकुल प्राचार्य गोपाल सिंह ध्रुव को फोन लगाए जाने पर, उनका फोन रिसीव नहीं करना उनकी उदासीनता को दर्शाता है।

बीईओ का मौन

वही सावन का पवित्र महीना भी खत्म हो गया है फिर भी कोटा विकास खण्ड के जिम्मेदार प्रभारी शिक्षा अधिकारी नरेंद्र मिश्रा इस गंभीर मामले पर कुछ भी बोलने से लगातार बचते आ रहे, गोलमोल जवाब दे रहे हैं ना जाने क्यों, यह समझ से परे है।

बहरहाल शिक्षक द्वारा बच्चों की पिटाई एक गंभीर मुद्दा है, जो बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत, बच्चों को शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न से बचाने का प्रावधान है।

कानूनी प्रावधान:

– आईपीसी की धारा 323 और 324 के तहत, शिक्षकों द्वारा बच्चों की पिटाई करने पर दंड और जुर्माने का प्रावधान है।
– यदि पिटाई से बच्चे को गंभीर चोट लगती है, तो शिक्षक को 3 से 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत, स्कूलों में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर रोक लगाई गई है।

क्या करें अगर शिक्षक बच्चों की पिटाई करें:

– यदि कोई शिक्षक बच्चों की पिटाई करता है, तो पीड़ित या उनके अभिभावक पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

– स्कूल प्रशासन को भी इस मामले में कार्रवाई करनी चाहिए और दोषी शिक्षक के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
– अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ नियमित रूप से बातचीत करनी चाहिए और उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

निष्कर्ष:

शिक्षक द्वारा बच्चों की पिटाई एक गंभीर मुद्दा है, जिसके लिए कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को इस मामले में सजग रहना चाहिए और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

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