दो म्यान में एक तलवार… रहम करो सरकार! हूँ तो मैं, बीमार!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। इन दिनों एक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जिला शिक्षा अधिकारी को बीमार होने के बावजूद भी दिगर जिलों का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है इसलिए बस एक ही विषय पर चारों ओर चर्चा आम है कि जिला शिक्षा अधिकारी बीमार हैं और ऊपर से उनको जीपीएम और एक अन्य जिले का प्रभार सौंप दिया गया है जिससे ना केवल उनका स्वास्थ्य प्रभावित होगा वरन जिले का काम भी प्रभावित हो रहा है बल्कि कार्यालयीन काम का बोझ कई गुना बढ़ गया है जिसके चलते बहुत से काम और आम प्रभावित हो रहे हैं। जो उचित नहीं है।

जिले के अलग अलग विकास खण्ड से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर में अपनी अपनी समस्या को लेकर आने वाले आगंतुकों (शिक्षक, प्राचार्य एवं अन्य) को अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। घंटो इंतजार करनें के बाद भी कोई ये बतलानें को तैयार नहीं हैं कि, कब आएंगे जिला शिक्षा अधिकारी कोई बतलानें को तैयार नहीं है। ना कोई जानता। लगता है कार्यालय में गुटबाजी, गुटबंदी चल रही है।

साहब के दो जिलों का अतिरिक्त प्रभार होने के बाद भी, यहाँ के कार्यालय में कोई सूचना पटल नहीं है जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी कब आएंगे,कब तक रहेंगे, कि जानकारी अंकित हो। इसलिए लोग बस, भगवान भरोसे इंतजार करते रहते हैं कि साहब हैं अतिरिक्त प्रभार पर हैं देर सबेर आएंगे जरूर।

जिला शिक्षा अधिकारी के कक्ष के बंद दरवाजे पर लगी कुंडी और जड़ा ताला चीख चीख कर बतला रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी अपने एयरकंडीशनर केबिन में नहीं है। क्यों कि वह अन्य जिले के अतिरिक्त प्रभार में हैं।

यह दृश्य बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का है कार्यालय में जिला शिक्षा अधिकारी के नही होने से कर्मचारियों की बल्ले बल्ले हो गई है,बहुत से काम जो हो सकते हैं बेवजह प्रभावित हो रहे हैं और इनके(साहब) नहीं रहने से पेंडेंसी लगातार बढ़ रही है। जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय अब चलती का नाम गाड़ी हो गई है। जितने मुँह उतनी बातें हो रही है।
सूचना के अधिकार के तहत अपीलीय प्रकरण की सुनवाई जो नियमतः 30 से 45 दिनों में पूरी करनी पड़ती है वह कार्यवाही पिछले चार माह से लंबित है। समय के अभाव और अतिरिक्त प्रभार का दुष्प्रभाव साफ नजर आता है।
बुद्धिजीवी वर्ग के लोग पूछते हैं कि इन्हें ही अतिरिक्त प्रभार क्यों सौपा गया, क्या उन जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी की योग्यता वाला कोई नहीं है या फिर किसी और को देना नहीं चाहते! वजह जो भी हो!
इसके कई कारण हैं:
1. स्वास्थ्य जोखिम: लोगों का कहना है कि हाल ही में अधिकारी ह्रदय से जुड़ी समस्या से दो चार हुए हैं लेकिन लगातार लम्बी लंबी दूरी की यात्रा अधिकारी का स्वास्थ्य खराब हो सकता है, जिससे उन सभी जगहों के काम की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्हें अन्य किसी जिले का प्रभार नहीं देना चाहिए।
2. काम का बोझ: न्यायधानी से दो जिलों की कई किलोमीटर की लंबी दूरी वाली थकान भरी यात्रा और उबड़ खाबड़ टेढ़े मेढ़े रास्ते का सफर,ऊपर से काम और काज की जिम्मेदारी संभालने से अधिकारी पर अतिरिक्त दबाव थकान पड़ सकता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर और भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
3. निर्णय लेने की क्षमता: हृदय रोग के कारण अधिकारी की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे शिक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में, शुभचिंतकों का कहना है कि उनके लिए यह बेहतर होगा कि अधिकारी को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति दी जाए और दूसरे अन्य जिले के लिए एक अलग अधिकारी नियुक्त किया जाना ही उचित निर्णय होगा।





