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“कश्यप” के वाट्सएप में आया स्थानांतरण आदेश निकला फ़र्जी…शिक्षा विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म?

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। सुशासन तिहार के बीच बिलासपुर शिक्षा विभाग से एक उड़ती फड़कती हुई खबर निकल कर सामने आ रही है जो एक बार फिर से शिक्षा विभाग को सुर्खियों के साथ सवालों के कटघरे में ला खड़ा कर देगी।

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के दो जिले से तीन लेक्चरर मतलब व्याख्याताओं का स्थानांतरण आदेश वर्ष 2025 में ऐसे समय बिलासपुर जिले के लिए जारी किया जाता है जब प्रदेश भर में स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा होता है। वहीं व्हाट्सएप में आए आदेश की कॉपी लेकर जिला शिक्षा कार्यालय में आए व्याख्याताओं को जॉइनिंग से पहले झटका लगता है कि जब बाबू कहता है कि साहब पहले आदेश की पुष्टि कराने की बात कह रहे है। सही है करना भी चाहिए,आजकल आदेश वह भी फर्जी तरीके से जारी हो रहे हैं। सावधानी बरतनी चाहिए।

फिर व्याख्याताओं को कार्यालय में बैठा कर घंटो इंतजार कराया जाता है। दूसरे दिन भी कुछ ऐसा ही नौटंकी चलती है फिर कार्यालय का चक्कर काट रहे लेक्चरों को कुछ दिन बाद मतलब स्थानांतरण आदेश की पुष्टि होने के बाद तीनों को बुलाकर अलग अलग स्कूलों का ज्वाइनिंग आदेश दे दिया जाता है।

श्रुति नें शिक्षा के मंदिर में भगवान से कामना कि, की उनकी जलाई गई ज्योति बुझनें ना पाए।

जॉइनिंग की खुशी में तीनों फूले नहीं समाते और परंपरा के पालनार्थ शिक्षा के मंदिर में पुजारी रूपी बाबू को चढ़ावा चढ़ा कर अपने अपने शिक्षकीय काम में मशगूल हो जाते हैं, तीन महीने की तनख्वाह झोंकने के बाद अचानक जिला शिक्षा अधिकारी का एक धमाकेदार आदेश आता है जो उनके जीवन में जलजला ला देता है उनके स्थानांतरण आदेश को फर्जी आदेश बता कर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निरस्तीकरण आदेश संबंधित प्राचार्य को जारी कर दिया जाता है और लेक्चरों को बिना मांगे नसीहत दी जाती है अपने मूल शाला चुपचाप वापस लौट जानें की।

सूत्रों के हवाले से इस पूरे स्थानांतरण प्रकरण में मास्टरमाइंड किसी शिक्षक एल बी को बतलाया जा रहा है जो कश्यप नाम से चर्चित है लोरमी विकास खण्ड में पदस्थ है जैसी बातें सामने आ रही है उसे पूरे मामले का सरगना बतलाया जा रहा है।

यह भी सच है कि इस कलयुग में कोई किसी का स्थानांतरण मुफ्त में नहीं करवाता, वह भी ऐसे समय में जब स्थानांतरण पर ही पूरे प्रदेश में रोक लगी हो ऐसे में लेक्चरों का स्थानांतरण आदेश वाट्सएप पर आना कई सवालों को जन्म देता है!

एक बात और यह भी है कि राजधानी में बैठे जिस अधिकारी के हस्ताक्षर से स्थानांतरण आदेश जारी किया गया है उस अधिकारी के आदेश को जिला शिक्षा अधिकारी निरस्त नहीं कर सकते तो उन्होंने अपने ही आदेश पर निरस्तीकरण की मुहर लगा दी है?

सूत्रों के हवाले से खबर यह भी निकल कर आ रही है कि ले देकर बड़ी मुश्किल से लेक्चरर स्थानांतरण आदेश को जारी करवाया गया उसे अब फर्जी स्थानांतरण आदेश बतलाते हुए निरस्तीकरण आदेश जारी किए जाने पर नाराज लेक्चरों नें न्यायालय का दरवाजा खटखटानें का विचार किया है। यह भी सम्भव है कि न्यायालय की शरण में हों।

अंत में इतना कि शिक्षा विभाग में स्थानांतरण का कोई षड्यंत्र तो नहीं रचा जा रहा है कि फर्जी आदेश पर किसी तरह ले दे कर नियुक्ति आदेश लो फिर चोरी पकड़े जाने पर निरस्तीकरण आदेश पर न्यायालय की शरण में जाकर स्टे ले लो,फिर मौज ही मौज, साहब ये काजल की कोठरी है और इसके कोठरी में रहने वाले लोगों के दामन पर दाग ना हो सम्भव नहीं।

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