30 लाख रुपए का “फर्जी मेडिकल बिल” आहरण की साजिश का पर्दाफाश…जाँच रिपोर्ट आ जाने का हो हल्ला…कार्यवाही करने की बजाए जिम्मेदार अधिकारी झाड़ रहे हैं पल्ला…!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। एशिया के सबसे बड़े विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय बिल्हा में 30 लाख रुपए का दूसरे के नाम का फर्जी मेडिकल बिल जाँच मामले की शिकायत और एक लंबे वक्त बाद जाँच की रिपोर्ट आने की जानकारी से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है दूसरी तरफ कयासों का बाजार गुलज़ार है, हर किसी की निगाहें मेडिकल बिल के दोषियों के नाम जानने और लापरवाह अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिरने जैसी कड़ी कार्यवाही किए जाने की तरफ़ निगाहें उठ रही हैं कि कौन कौन सस्पेंड होगा किसके लिए कार्यवाही की अनुसंशा के साथ रिपोर्ट डीपीआई भेजी जाएगी। कब डिपार्टमेंटल इंक्वायरी बैठाई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी कर कोई सरकार के खजाने को चूना लगाने की हिमाकत ना कर सके।

लेकिन मीडिया द्वारा हकीकत जानने सोमवार को जाँच रिपोर्ट पर सवाल पूछने पर जिला शिक्षा अधिकारी नें कहा सँयुक्त संचालक कार्यालय जांच रिपोर्ट की फाइल भेज दी गई है, वहीं दूसरे दिन मीडिया के सवाल पूछने पर संयुक्त संचालक ने कहा अभी फाइल आई नहीं है!

महज तीन किलोमीटर के दायरे में स्थित कार्यालय में फाइल का नहीं पहुँचना कई तरह के अनसुलझे सवाल खड़े करता नजर आता है।

ऐसे में शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि कुल मिलाकर अधिकारियों के ऊपर राजनीति दबाव बनाया जा रहा है खासकर बिल्हा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय में हुई तमाम गड़बड़ी मामले में की गई लिखित शिकायत के बाद भी कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर भी जाँच प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है जो अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

शिक्षा से जुड़े राजनीतिक और संघ पदाधिकारियों का भी मानना है कि मामले में स्वास्थ्य विभाग ने एफआईआर दर्ज करनें की अनुशंसा की है इस लिए बिल्हा में ज्यादातर मामलों में कुछ ज्यादा ही राजनीतिक हस्तक्षेप किया जा रहा है ऐसे में सरकार की क्षवि धूमिल हो रही है। जिम्मेदार उच्च स्तरीय अधिकारियों को समझना होगा।

बहरहाल जनतंत्र है, जनता को जानने का अधिकार है कि जनता द्वारा की गई गड़बड़ी की शिकायत पर, क्या जाँच कमेटी गठित कर,निष्पक्ष जाँच की रिपोर्ट प्रतिवेदन प्रस्तुत करनें पर गुण दोष के आधार पर दोषियों पर कार्यवाही की जाती है या फिर मामला ले दे कर रफादफा कर दिया जाता है!





