महक,”महुआ”की कच्ची शराब से… गुलज़ार है अवैध कारोबार…! क्यों बेफिक्र हैं,अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। वैसे तो सभी थाना क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब का कारखाना (भठ्ठी)और उससे निकली शराब की बिक्री का काम बेखौफ चलाया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरों तक महुआ शराब के शौकीन शौक से पी रहे हैं। इनके बीच प्रतिस्पर्धा भी है। कभी कभी इन अवैध कारखाना संचालकों पर आबकारी और स्थानीय पुलिसिया कार्यवाई भी होती है। महुआ के फूल से कच्ची शराब बनाने वाले गाँव चिन्हित हैं। आबकारी और पुलिस के पास इसके रिकार्ड सुरक्षित हैं।

तस्वीरों को देखकर जानकारों का मानना है कि जिस प्रकार पुलिस और आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरत रहे हैं उसे देखकर तो ऐसा ही कहा जा सकता है मानों इनकी सहमति के बगैर कानून तोड़ा जाय और अवैध रूप से कच्ची महुआ की शराब निकाल बेची जाए। संभव ही नहीं!

तस्वीरों को देखकर तो ऐसा लगता है कि रतनपुर पुलिस भी इन दिनों महुआ से निकल रही शराब कारखाने पर मेहरबान हो गई है. कारखाना ऐसा कि साइकिल-मोटर साइकिल के भत्ते पर कार की सवारी का खर्च निकल रहा। साहब से लेकर सिपाही, सब की इस कारखाने में हिस्सेदारी मालूम होती है…

नियमानुसार कच्ची यानी महुआ शराब सीमित मात्रा में बनाने की छूट तो वनांचल के आदिवासियों को है। ऐसा इसलिए भी है कि उनकी लोक परंपरा में महुआ रचा बसा है। उनकी लोक परंपराओं का संरक्षण किया जा सके। वहीं आदिवासियों की आड़ में शहर और उसके आसपास भी लोग अब कच्ची शराब का कारखाना लगा कर बेखौफ व्यापार कर रहे हैं।

ग्रामीण अंचलों से निकल कर इसकी धमक अब रतनपुर शहर तक भी पहुँच गई है. ऐसा होता इसलिए भी दिख रहा क्यों कि इस पर रतनपुर थाना पुलिस का अंकुश नहीं है। क्या सचमुच पुलिस का खुफिया तंत्र इतना कमज़ोर हो गया है कि थाने के एक दो किलोमीटर के दायरे में चल रही अवैध गतिविधियों के इनपुट उन तक पहुँच नहीं पा रही, या फिर पुलिस की जरूरतें इतनी बढ़ गई है कि सब कुछ देखकर भी वे अनदेखा कर रही है। सच क्या है?

जानकार कहते हैं कि मामूली तनख्वाह में साहब से लेकर सिपाही तक की हैसियत साइकिल-मोटर साइकिल की मिल रही सरकारी भत्ते की राशि पर, कार की सवारी करना मुमकिन नहीं! हो जाए तो ये अवैध कारोबार कैसे नजर आएं।

रतनपुर थाना क्षेत्र के कई गाँव तो कच्ची शराब बनाने के लिए बदनाम है। इन गाँवों में कई बार रतनपुर थाना पुलिस और आबकारी विभाग के अमले ने कार्रवाई कर भारी मात्रा में कच्ची महुआ शराब और लोहान बरामद कर जब्त किया है. वहीं रतनपुर शहर में इस तरह भट्ठी लगाकर कच्ची महुआ शराब बनाने का कारोबार होता पहली बार दिख रहा है। रतनपुर थाने में बीते पांच दशक के रिकॉर्ड भी खंगालने पर रतनपुर शहर में कच्ची शराब बनाने की कार्रवाई नहीं मिलेगी। अब ऐसा क्या बदल गया कि अवैध कारोबार के संचालन को लेकर इस अवैध कारोबार से जुड़े लोगों का खौफ खत्म हो गया और महुआ से कच्ची शराब बनाने का कारोबार बे खौफ शुरू हो गया है।
ये भी कटु सत्य है कि पुलिस और आबकारी विभाग के पास कोई दिव्य शक्ति नहीं है ना ही लोगों के मस्तक पर लिखा है कि वह अवैध कारोबार संचालित करता है। ये दोनों खबरी,सूत्र,मुखबिर और खबर के भरोसे ज्यादा होते हैं ऐसे में लगता है कि उनका सूचना तंत्र कुछ ज्यादा की कमजोर है।
उम्मीद है रतनपुर पुलिस और आबकारी विभाग मिलकर शीघ्र ही इस अवैध रूप से संचालित कच्ची शराब के कारखाने में छापा मारकर कारखाने को संचालित करने वाले लोगों को बेनकाब करेगी और इस अवैध कारोबार पर अंकुश!





