बिलासपुर

मंत्री जी,बिलासपुर समग्र शिक्षा में एक और फर्जीवाड़ा उजागर…15 हजार 3 सौ रुपये का परिवहन भाड़ा… वाहन क्रमांक लिखा ही नहीं… हो गया भुगतान!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। समग्र शिक्षा से संकुल केंद्रो को जारी अनुदान सरकारी राशि का दुरुपयोग, संकुल प्राचार्य और संकुल समन्वयक द्वारा किस तरह किया जा रहा है इसकी बानगी इस बार देवरीखुर्द संकुल से निकल कर सामने आई है।


बिलासपुर जिले के 198 संकुलों में 4 विकास खण्ड संकुल स्रोत हैं और एक शहरी स्रोत बिलासपुर है। शहरी स्रोत URCC बिलासपुर के प्रमुख हैं वासुदेव पांडेय, इनके अंडर में 15 संकुल केंद्र हैं और इन 15 संकुल में एक देवरीखुर्द संकुल है जहाँ जमकर समग्र शिक्षा से आई राशि का बंदरबांट किया गया है। चूंकि वासुदेव पांडेय 15 संकुल के प्रमुख हैं और उनके उदासीन रवैये के कारण हाल ही में 8 बिजौर, सिरगिट्टी, मोपका, चांटीडीह, तारबहार,बालक सरकंडा,म. ल.बा.दयालबंद,कुदुदंड के शैक्षिक संकुल समन्वयक(CAC) नें स्वास्थ्य गत एवं पारिवारिक कारण बता स्तीफा दे दिया था जिससे शासन की खूब किरकिरी हुई थी आखिरकार कलेक्टर बिलासपुर को सभी 8 CAC का स्तीफा स्वीकार करना पड़ा था।


अभी हाल ही में बिजौर, सिरगिट्टी, चांटीडीह और देवरीखुर्द संकुलों में समग्र शिक्षा के नाम पर इन संकुलों में आई अनुदान राशि में जमकर बंदरबांट किया गया जिसकी खबरें मीडिया में बड़ी प्रमुखता से प्रसारित किया गया था,बिजौर संकुल की तो जाँच भी चल रही है। इसके बाद भी संकुल प्रमुख वासुदेव पांडेय का उदासीन रवैया गंभीर सवाल खड़े करता नजर आता है। बुद्धिजीवियों का कहना है कि समग्र प्रमुख कलेक्टर बिलासपुर को URCC प्रमुख वासुदेव को कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए।


इसी बीच शहरी श्रोत URCC एक संकुल देवरीखुर्द द्वारा प्राप्त प्रामाणिक दस्तावेज जो RTI से प्राप्त हुआ हैं जिसमें परिवहन बिल भुगतान को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि कच्चे बिल के दस्तावेज में 20 बार परिवहन बताया गया है हर बार वाहन चालक को नगद भुगतान करना बताया गया है लेकिन वाहन क्रमांक नहीं लिखा गया है। ऐसे में कुल 15,300 रुपए का नगद भुगतान करना बताया गया है लेकिन वाहन चालक के फोन नम्बर और पता भी नहीं दर्शाया गया है।


पाठकों को बतलाते चले कि इन दिनों शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल देवरीखुर्द में संकुल प्रभारी के रुप में श्रीमती साधना प्रधान पदस्थ हैं और तत्कालीन शैक्षिक संकुल समन्वयक के रूप में श्रीमती किरण दिग्वेकर पदस्थ थीं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वह संतान पालन अवकाश में हैं।


बहरहाल शिक्षा विभाग दिन ब दिन भ्र्ष्टाचार उजागर होने से सुर्खियों में बना हुआ है वैसे भी यहाँ एक से बढ़कर एक दागी पदाधिकारी पदस्थ हैं ऐसे में एक सवाल कि शिक्षा के मंदिर में ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक ही यदि भ्र्ष्टाचार का काम करे तो उन नवनिहालों का भविष्य कितना उज्ज्वल होगा जिन्हें यह बेईमान शिक्षक ईमानदारी का पाठ पढ़ाते होंगे?

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