खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। ये तस्वीरे हैं एशिया के सबसे बड़े विकास खण्ड बिल्हा अंतर्गत संचालित प्राथमिक शाला रामगोपाल तिवारी नगर,चिल्हाटी की जहाँ तनख्वाह खोर शिक्षक सिविल सेवा आचरण नियम से बंधे होने के बाद भी इन्हें किसी भी अधिकारी का डर नहीं, इन्हें गरीब बच्चों के पालकों का डर नहीं, इन्हें जनप्रतिनिधियों का डर नहीं, इन्हें CAC अर्थात जो स्कूल का अवलोकन करते हैं उनका डर नहीं, इन्हें ABEO का डर नहीं, इन्हें नए नवेले BEO का भी डर नहीं ऊपर से इन्हें तनख्वाह समय पर और पूरी चाहिए लेकिन जिस काम के लिए सरकार इन्हें मोटी तनख्वाह देती है मतलब ये लापरवाह शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की बजाय, शिक्षा देने की बजाय समय से पहले छुट्टी देकर घर जाने की तैयारी कर रहे थे।
शिक्षा मंत्री जी आप यकीन मानिए सरकारी स्कूल और उनकी संचालन व्यवस्था के लिए जिम्मेदार शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता और नकारेपन का ही नतीजा है कि शिक्षक मनमानी करने से भी नहीं चूकते। आप खुद महापुरुषों के साथ दीवार पर टंगी घड़ी को देखकर इनकी घोर लापरवाही का अंदाजा लगा सकते हैं। जबकि यह स्कूल शहर से लगा हुआ है।
दीवार पर टंगी घड़ी जो समय बता रही है वह शिक्षकों की लापरवाही को उजागर करने काफी है वहीं साथ ही दीवार पर महापुरुषों की टंगी तस्वीरों से भी यहाँ पदस्थ शिक्षक कुछ समझने को तैयार नहीं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यहाँ पदस्थ प्रधान पाठक के रिश्तेदार का निजी स्कूल संचालित है वह ज्यादातर वहीं रहते हैं अब सच जो भी हो यह जाँच का विषय है।
आश्चर्य की बात यह है कि एक सरकारी स्कूल में शिक्षकों की शिक्षक उपस्थिति पंजी को आमजनता,पत्रकार, समाज सेवक को दिखाने के लिए शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने मना कर रखा है मंत्री जी इतनी गोपनीयता की वजह क्या है, स्कूल में मात्र दो शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षक उपस्थिति पंजी मांगने पर साफ तौर से यह कहना कि उच्च अधिकारियों ने दिखाने को मना किया है सवाल खड़े करता है।
सवाल यह भी की क्या किसी शिक्षक की इतनी मजाल है कि वह बिना किसी उच्च अधिकारियों के संरक्षण,इशारे, सांठगांठ के इस तरह का जवाब दे दे!
ऐसे सभी शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी शिक्षा को मजाक का अड्डा बना रखा है इससे ना केवल सरकार की क्षवि धूमिल होती है बल्कि शिक्षा सहिंता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
बहरहाल मंत्री जी लचर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे नहीं तो वह दिन दूर नहीं सरकार द्वारा संचालित सरकारी स्कूल इतिहास के पन्नों में दर्ज किया जाएगा और हमारी आने वाली पीढ़ी उसे देखने जाएगी और सवाल पूछेगी की इतनी सारी मुफ्त की योजनाओं जैसे मध्यान भोजन, गणवेश, किताबें, स्कूल भवन,छात्रवृत्ति, खेल का सामान,और निशुल्क की शिक्षा देने के साथ साथ स्कूल पर नियंत्रण रखने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के होने के बाद भी सरकारी स्कूल बंद क्यों हो गए?