मंत्री जी,शिक्षा विभाग का “बाबू” खुलेआम अधिकारियों के नाम पर मांग रहा कमीशन…बिना कमीशन नहीं होता कोई काम…शिक्षा विभाग हो रहा बदनाम! जरा इधर भी दो ध्यान,ताकि कर्मचारियों का भी हो कल्याण।

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। शिक्षा विभाग का बिलासपुर जिला इन दिनों बाबुओं,अधिकारियों कर्मचारियों और शिक्षकों की करतूतों को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। यहाँ फ़र्जी स्थानांतरण आदेश लेकर शिक्षक चले आते हैं, ज्वाइन करते हैं चार महीने बाद फिर आदेश के फ़र्जी मालूम पड़ने पर शिक्षकों से ना ही कोई लिखित में सवाल पूछा जाता है ना ही शिक्षकों के विरुद्ध कोई अपराध दर्ज किया जाता है ना कोई लीगल कार्यवाही होती है, उन्हें चुपचाप मूल शाला वापस भेज दिया जाता है।

यहाँ विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय बिल्हा में 30 लाख रुपए का फर्जी मेडिकल बिल प्रस्तुत किए जाने मामले की जांच कछुए की चाल से हो रही है वहीं मस्तूरी विकास खण्ड में मेडिकल बिल भुगतान मामले में बाबू बेखौफ होकर खुले आम फोन पर अधिकारियों के नाम से एक बीमार शिक्षक से 10%कमीशन मांगने का ऑडिओ सोशल मीडिया में वायरल हो गया है वहीं कमीशन मंगाने जैसी परंपरागत व्यवस्था से नाराज शिक्षक नें जिला शिक्षा अधिकारी नहीं,कलेक्टर बिलासपुर से 16/07/2025 को लिखित शिकायत कर दी है। बावजूद इसके आज दिनाँक तक जिम्मेदारों द्वारा कोई कार्यवाही का नहीं होना अपने आप मे एक बड़ा सवाल खड़े करता नजर आता है।
शिक्षक और बाबू के वायरल ऑडियो में ट्रेज़री का भी जिक्र किया गया है क्या वाकई में यहाँ भी कमीशन के नाम पर लेन देन होता है तो इन्हें तनख्वाह किस बात की मिलती है?
वायरल ऑडियो
इस बात की भी सूक्ष्मता से जाँच होनी चाहिए ऐसी गलत परम्परा पर रोक लगाया जाना चाहिए। ताकि कर्मचारियों का विश्वास शासन और प्रशासन पर बना रहे।

वैसे यह मामला कानून के जानकारों के अनुसार गंभीर अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता का है अधिकारी खुद को बचाने बाबू द्वारा कमीशन मांगने की कलेक्टर बिलासपुर से शिक्षक द्वारा की गई शिकायत पर कोई जाँच आज दिनाँक तक नहीं बिठाई गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी नें भी जाँच करवाने की बात मीडिया से कह दी है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह कौन सा अधिकारी है जो उसे कमीशन मांगने को कह रहा है पूछा जाएगा।
फिलहाल तो बिलासपुर शिक्षा विभाग में शिकायत के और जाँच के ऐसे ढेरों प्रकरण, जाँच प्रतिवेदन पेश किए जाने के बाद भी लंबित पड़े हुए हैं जाँच अधिकारियों नें प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन में शिकायत को सही माना है सिविल सेवा आचरण नियम का घोर उल्लंघन बताया है, बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन पर अपना अभिमत देकर उच्च अधिकारियों तक कार्यवाही हेतु प्रकरण नहीं भेजा जा रहा है?
बहरहाल देखना होगा कि क्या मंत्री जी को ही सभी मामलों पर संज्ञान लेना होगा या शासन में नियुक्त जिम्मेदार अधिकारी जिन्हें तनख्वाह के साथ साथ तमाम सुविधाओं का लाभ उठाने वाले भी, ऐसे गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर कोई कड़ा रुख अख्तियार करते हैं। कुछ नकारे ऐसे अधिकारी और कर्मचारियों से शासन की क्षवि धुमिल हो रही है इस बात का शासन को गंभीरता से संज्ञान लेना होगा!





