मंत्री जी,कमीशन मांगने वाला रिश्वतखोर बाबू बहाल…DEO के तुगलकी आदेश पर उठ रहे सवाल…! एक बार फिर जिला शिक्षा अधिकारी सवालों के घेरे में!

खबर खास छत्तीसगढ़,बिलासपुर। पांच साल के वनवास बाद छत्तीसगढ़ राज्य में बीजेपी की सरकार बनी,ऊपर से सुशासन और ईमानदारी के तमाम दावों के बीच,न्यायधानी के नाम से विख्यात बिलासपुर जिला के जिला शिक्षा अधिकारी कभी सुर्खियों में थे अब उनका एक आदेश सुर्खियां बटोर रहा जो खुलेआम सिविल सेवा आचरण नियम की धज्जियां उड़ा रहा है और शिक्षा मंत्री कहते हैं कि शिक्षा विभाग में भृष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 10% कमीशन मांगने वाले बाबू को सस्पेंड करनें के बाद दोषसिद्ध होने के बाद वहीं का वहीं बहाल कर देने जैसा आदेश जारी कर दिया जाना जो शिक्षा जगत में खलबली मचा दिया है हर बुद्धिजीवी इस आदेश पर उँगली उठा रहा है अब ये ईमानदार और बुद्धिजीवियों को ये डर सता रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी का ये आदेश कहीं भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी और कर्मचारियों के लिए “नजीर” ना बन जाए।

मतलब सीधे तौर पर जानकर लोगों का कहना है कि यह आदेश भृष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच सांठगांठ जीता जागता उदाहरण हैं शिकायतकर्ता शिक्षक का कहना है कि उसने अपने 25 साला नौकरी के दौरान ऐसा आदेश जारी किया जाना कभी नहीं देखा ना सुना कि दोष सिद्ध पाए जाने के बाद भी उसी स्थान पर बहाल किया गया हो।
मस्तूरी विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय के फोन पर शिक्षक से कमीशन मांगने वाले बाबू सी.एस. नौरंग (सहायक ग्रेड-2) को निलंबित कर दिया गया था निलंबन के मात्र 42 दिनों बाद भ्रष्टाचार के गढ़ मस्तूरी विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय में बहाल कर दिया गया है। निलंबन का कारण कमीशन मांगने का ऑडियो वायरल था, लेकिन सस्पेंशन के महज 42 दिन बाद आनन फानन में सिविल सेवा आचरण नियम विरुद्ध किया गया बहाली का आदेश पर्दे के पीछे की बड़ी डील की कहानी कह रहा है।

42 दिन की ‘छुट्टी’ और भ्रष्टाचार को हरी झंडी
10 सितंबर 2025 को बाबू को निलंबित किया गया, क्योंकि उसने एक शिक्षक की चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के भुगतान के लिए पैसे मांगे थे। यह कृत्य सरकारी सेवा आचरण नियम, 1965 का घोर उल्लंघन था।
लेकिन, विभाग ने जाँच पूरी करने या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से परामर्श लेने की बजाय, 22 अक्टूबर 2025 को बहाली आदेश जारी कर दिया। आदेश में मुख्य तर्क यह दिया गया: “विकास खंड कार्यालय में लिपिकों की कमी है।”
ऐसे में एक सवाल उठता है कि क्या विकास खण्ड कार्यालय में लिपिक इतने कम हो गए हैं कि एक भ्रष्ट बाबू की बहाली आदेश को नियम विरुद्ध “नजीर” बना कर जारी कर दिया गया?

क्या DEO बिलासपुर (जिला शिक्षा अधिकारी) ने अपनी प्रशासनिक शक्ति का उपयोग भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए किया ?

बुद्धिजीवियों का मानना है कि ये बहाली नहीं, ‘प्रमोशन’ है सिविल सेवा आचरण नियमों का घोर उल्लंघन है?
गंभीर बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी बहाली आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा है कि बाबू का जवाब संतोषजनक नहीं था,मतलब विभाग मानता है कि बाबू ने गलती की है, फिर भी उसे बहाल कर दिया गया! यह केवल नाम मात्र की सज़ा है, जिसके तहत एक वेतनवृद्धि अस्थायी रूप से रोकी गई है।
यह एक निलंबन से बहाली नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार को दण्डमुक्ति (Impunity) का सीधा लाइसेंस दे दिया गया है!
मंत्रीजी, आपकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति कहाँ है?
यह मामला सीधे-सीधे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। क्या उनके विभाग के अधिकारी इतने बेलगाम हो चुके हैं कि वे मुख्यमंत्री के सुशासन के एजेंडे को खुलेआम चुनौती दे सकते हैं?
बिलासपुर के अधिकारी वर्ग ने इस आदेश के माध्यम से यह संदेश दिया है कि विभाग में भ्रष्टाचार करना अपराध नहीं, बल्कि केवल एक छोटी सी प्रशासनिक अड़चन है, जिसे ‘लिपिकों की कमी’ के बहाने पल भर में दूर किया जा सकता है?
हमारी खुली चुनौती: बुद्धिजीवियों की माने तो आदेश जारी किए जाने के बाद 24 घंटे के ज्यादा समय बीत चुका है उसके बाद भी शिक्षा सचिव, DPI, इस आदेश पर मौन धारण कर रखें हैं क्या ऐसे में शिक्षा मंत्री भी इस गलत आदेश पर चुप्पी साधे रहेंगे?
या तुरंत इस भ्रष्ट आदेश को रद्द करके, इस मनमानी के लिए जिम्मेदार DEO और BEO पर भी सख्त कार्रवाई करेंगे?
प्रदेश की जनता सिर्फ ‘जीरो टॉलरेंस’ के खोखले नारे नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई देखना चाहती है।
बहरहाल देखना होगा कि अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर व्याख्याता का स्थानांतरण करनें के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आए जिला शिक्षा अधिकारी का अब कमीशनखोरी मामले में जारी बहाली आदेश या तुगलकी फरमान आगे चलकर क्या गुल खिलाता है?
एक सवाल :- कोटा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय का निलंबित बाबू एकादशी पोर्ते 7 माह बाद भी बहाल हुआ है या नहीं, नहीं तो क्यों? और उसे किस मामले में सस्पेंड किया गया था?
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