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लाखों रुपए के फ़र्जी मेडिकल बिल और सील मामले में आई जाँच रिपोर्ट…बिल्हा बीईओ, शिक्षक साधेलाल पटेल सहित कार्यालय कर्मचारी को भी माना दोषी…शिकायतकर्ता नें कहा – दोषियों पर तत्काल कार्यवाही हो और विभागीय जांच बैठाई जाय।

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। भ्र्ष्टाचार के मामलों में तरह तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं शिकायत पर जाँच बिठाया जाता है लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते जाँच की धीमी गति परिणाम को प्रभावित करता है लेकिन बिल्हा ब्लाक में फर्जी मेडिकल बिल के आधार पर 30 लाख रुपए निकालने के मामले में देर से ही सही,जांच कमेटी ने अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है।

मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में बिल्हा ब्लाक में पदस्थ शिक्षक और संकुल समन्वयक साधे लाल पटेल के साथ ही तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा पर नियमानुसार कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई है।

बीईओ आफिस के कर्मचारियों को भी दोषी माना गया है। साथ ही संबंधितों से 6 लाख 74 हजार 70 रुपए वसूली करने भी कहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी के मुताबिक रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।

हालांकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी बिल को पहले ही कूटरचित और फर्जी बताते हुए एफआईआर की अनुशंसा की गई है। लेकिन पूरी तरह से जाँच रिपोर्ट नहीं आने से मामला शांत था लेकिन रिपोर्ट आने से एक बार फिर शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

बिल्हा ब्लॉक में पदस्थ और संकुल समन्वयक शिक्षक साधे लाल पटेल ने अपने और परिजनों के
नाम पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा में 30 लाख का फर्जी मेडिकल बिल जमा किया था। फर्जी मेडिकल बिल को विभाग ने राज्य कार्यालय को फारवर्ड कर राशि भी मंगा ली थी। भुगतान होता इसके पहले ही शिकायत हो गई और कुछ बिल को रोक दिया गया।

शिकायत बाद कलेक्टर बिलासपुर के निर्देश पर मामले में जांच कमेटी बनाई गई। साथ ही स्वास्थ्य विभाग से बिल जारी करने की पुष्टि हेतू पत्र लिखा गया।

जाँच के दौरान श्रीमती शिल्पा शर्मा (कार्या सहा ग्रेड 3 वि.खं.शि.अधि. बिल्हा)की ओर से कहा गया है कि साधेलाल पटेल (शिक्षक संकुल समन्वयक) द्वारा भुगतान हेतु बिल को जिला कोषालय बिलासपुर प्रेषित किए जाने हेतु काफी दबाव डाला गया। सभी देयक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा द्वारा स्वीकत तो किए गए लेकिन भुगतान हेतु कोषालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने की है एफआईआर की अनुशंसा

जांच में एक बात निकल कर सामने आई है कि इस तरह का कोई बिल स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरी हो नहीं किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मामले में एफआईआर की अनुशंसा भी की गई है लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार आला अधिकारी अपने इस चहेते को बचाने में लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अपने प्रतिवेदन में साफ तौर से कहा है कि एक भी बिल उनके द्वारा जारी नहीं किया गया है और किसी में हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। सभी कूटरचित और फर्जी दस्तावेज है जिसने फर्जी सील और हस्ताक्षर किए गए हैं।

खास बात है कि आरोपी शिक्षक ने इस बार अपने और अपनी पत्नी, अपने साले (एक जीवित, एक मृत) के नाम पर बिल लगाकर पूरा खेल खेला है।

स्वास्थ्य विभाग ने की है एफआईआर की अनुशंसा

जांच में यह बात भी सामने आई है कि शिक्षक ने जिस वक्त अपने आपको बीमार बताकर इलाज का बिल पेश किया है उस वक्त ड्यूटी में भी उपस्थित था। शिकायत पत्र के अनुसार साधेलाल पटेल 29 अगस्त 2024 को जिला चिकित्सालय से स्वीकृत बिल कार्यालय में प्रस्तुत किया है. जिसके अनुसार 77,564 रुपए की राशि उसके द्वारा इलाज पर खर्च की गई है, जिस बिल को लेकिन शिक्षक साधेलाल पटेल ने जमा किया है. वह बिल मूल रूप से शिक्षक असीम वर्मा का है, जिसको कूटरचित कर प्रस्तुत किया गया है।

इसी प्रकार अपने परिचित उमाशंकर चौधरी का 27 अगस्त 2024 को 5 लाख 42 हजार 535 रुपए का दिल प्रस्तुत किया है जो की मूल रूप से असीम वर्मा का है और कुल बिल एक लाख 43,000 रुपए का हो है। इसी तारीख को स्वीकृत एक और बिल राजकुमारी पटेल का है जो 4 लाख 3 हजार 327 रुपए का है जबकि मूल रूप से यह बिल 47 हजार का है।

दूसरे के नाम के बिल की कूटरचना

जांच में बात सामने आई कि इन सभी बिलों को एडिट किया गया और बढ़ाकर नया बनाया गया और शिक्षा विभाग में पेश किया गया।

इसी प्रकार एक बिल स्व नरेंद्र कुमार चौधरी के नाम से 5 लाख 33 हजार 123 रुपए का प्रस्तुत किया गया है। यह बिल जिला चिकित्सालय से 18 जनवरी 2022 को पास किया जाना बताया गया है, जबकि मूल रूप से यह बिल 32 हजार रुपए का है।

इसके साथ ही राजकुमारी पटेल के नाम से 7 लाख 32 हजार 841 रुपए का फर्जी बिल प्रस्तुत किया गया है। यह बिल भी जिला अस्पताल ने जारी नहीं किया है।

की जाएगी कार्रवाई

इस मामले में दो सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था। जांच कमेटी में हायर सेकेंडरी स्कूल बैमा नागोई के प्राचार्य एस के कश्यप व हायर सेकेंडरी स्कूल सरकंडा के लिपिक धनश्याम दुबे शामिल थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच रिपोर्ट के साथ ही स्वास्थ्य विभाग का भी प्रतिवेदन मिल गया है। कार्यवाही करना मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है उच्च अधिकारी को जांच प्रतिवेदन भेज दिया जाएगा।

विजय तांडे, जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर

फिलहाल शिकायतकर्ता सहित सबकी निगाहें अब जेडी पर टिकी हुई है जाँच रिपोर्ट प्रतिवेदन फाइल के भीतर अपने निष्पक्ष निर्णय के इंतजार में है, वहीं बड़ी चुनौती के साथ निष्पक्ष जांच रिपोर्ट देकर जाँच अधिकारी को भी अपने प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद परिणाम का इंतजार है, देखना होगा कि रिटायरमेंट के करीब होने के बाद भी कठोर निर्णय लेने में संशय की स्थिति या राजनीतिक दबाव जाँच परिणाम को प्रभावित ना कर सके!

01 सवाल:- चिकित्सा प्रतिपूर्ति की मूल प्रति बीईओ कार्यालय तिलक नगर से हाईकोर्ट बिलासपुर शिफ्टिंग के दौरान गुम होने के संदर्भ में दो दो बार पहला 12/04/24 और दूसरा 18/06/24 (24/06/24) को पत्र क्यों लिखा गया? इस दौरान तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी कौन थे?

02 सवाल :- मेडिकल फार्म में नाम राजकुमारी पटेल का, बिल में फर्जी नाम राम कुंवर पटेल ये कौन लोग है?

03 सवाल:- 12/06/1981 किसका डेट ऑफ बर्थ है?

04 सवाल:- 44 साल की महिला बिल में 65 साल की कैसे हो गई?

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