स्कूलों के नाम पर लगी RTI,शिक्षकों में खलबली…भ्र्ष्टाचार उजागर होने और खबर प्रकाशन के बाद,जाँच और निलंबन से बचने पत्रकारों के खिलाफ एसपी से कर दी झूठी शिकायत…अब 47 शिक्षकों का बयान देने के नाम पर छूट रहा पसीना।

शिक्षा विभाग में लगी आरटीआई तो तिलमिला उठे शिक्षक
एसपी से कर दी झूठी शिकायत
सच का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षकों को कम से कम झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए अपनी तो मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। सरकारी स्कूलों में स्कूली छात्रों के लिए शासन द्वारा समग्र शिक्षा के माध्यम से योजनाओं और योजनाओं से जुड़ा फंड सीधे स्कूल के खाते में आता है और प्रधान पाठक उस फंड का उपयोग करने में नियमों का पालन करते हैं या नहीं जाँचने, साल दो साल में आडिट भी शासन द्वारा कराया जाता है लेकिन पिछले कुछ सालों से समग्र शिक्षा द्वारा जारी फंड का दुरुपयोग किए जाने की शिकायत मिलने पर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी इसकी पड़ताल में जुट गया था इसी कड़ी में साक्ष्य जुटाने लगातार RTI भी लगाई जा रही थी लेकिन कुछ स्कूलों के नाम पर लगी RTI से शिक्षकों एवं संकुल समन्वयकों को सांप सूंघ गया हड़कंप मच गया,RTI से मिले दस्तावेज से ना केवल भ्र्ष्टाचार उजागर हुआ बल्कि देश का भविष्य तराशने वाले शिक्षक को खबर प्रकाशित होने से निलंबन का डर सताने लगा भ्र्ष्टाचार की खबर प्रकाशन के बाद,जाँच और निलंबन से बचने शिक्षकों नें पत्रकारों के खिलाफ एसपी से झूठी शिकायत कर दी ताकि आगे अन्य किसी स्कूल या संकुल में RTI ना लगाई जा सके लेकिन शिक्षकों के मंसूबे में तब पानी फिर गया जब पुलिस 47 शिक्षकों का बयान देने के लिए थाने तलब कर रही है और अब शिक्षकों को पत्रकारों के खिलाफ झूठी शिकायत और अब झूठा बयान देने के नाम पर पसीना छूट रहा है।

केन्द्र सरकार ने 2005 में सूचना का अधिकार कानून लाया जिसके तहत एक आम आदमी भी सरकारी कार्यालय से अपनी जरूरत के हिसाब से जानकारी ले सकता था। ऐसी जानकारी जो 2005 के पहले मिलना मुश्किल थी इस कानून के आने के बाद उपलब्ध होने लगी। इस कानून के द्वारा ही देश में कई भ्रष्टाचार के कारनामें उजागर हुए हैं और सरकारी अधिकारियों की तानाशाही सामने आई है।

लेकिन कोटा विकास खंड के लगभग 47 शिक्षक और समन्वयकों को ये नहीं पता कि इस कानून के तहत यदि कोई सूचना मांगी जाती है तो उसका उत्तर निर्धारित समय में आवेदक को देना अनिवार्य है ना कि पुलिस में झूठी शिकायत करना शिक्षकों/संकूल समन्वयकों को यदि आरटीआई के आवेदकों से दिक्कत है और यदि आवेदक उन्हें गलत नियत से परेशान कर रहे हैं तो वे सारे सबूतों के साथ इनके खिलाफ शिकायत कर सकते हैं लेकिन ध्यान रखें शिकायत झूठी ना हो।

ताजा मामला कोटा विकासखंड के बेलगहना क्षेत्र के 47 शिक्षकों के एक समूह का सामने आया है जिसमें शिक्षकों द्वारा पत्रकारों के खिलाफ एस पी कार्यालय में एक शिकायत की गई है जिसमें शिक्षकों नें आरोप लगाया है कि उनके क्षेत्र के विद्यालयों में कुछ व्यक्ति एवं पत्रकारों के द्वारा आए दिन सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी जाती है ततपश्चात सूचना का गलत उपयोग कर अवैध वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है साथ ही उच्च कार्यालय में शिकायत करनें की धमकी भी दिया जाता है।
47 शिक्षक लिखते हैं कि पांच पत्रकार सूचना का अधिकार लगाकर जानकारी मांगते हैं और अवैध वसूली के लिए दबाव बनाते हैं साथ ही उच्च कार्यालय में शिकायत की धमकी दी जाती है। उक्त शिकायत के निराकरण के लिए एसपी बिलासपुर को पत्र लिखा गया है।

अब सवाल ये उठता है कि क्या पत्रकार के द्वारा स्कूल, वहां की स्थिति, स्कूल के फंड के उपयोग और शिक्षकों के स्कूल आने जाने के संबंध में RTI लगा कर जानकारी मांगना कब से अपराध हो गया है?
शिकायत में नाम आए एक पत्रकार ने कहा कि अगर शिक्षक सही हैं तो सूचना के तहत मांगी गई जानकारी देने से क्यों डर रहे,जितने दस्तावेज मिले उसमें भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई, जाँच हुआ है, शिक्षक यदि योजनाओं की राशि का नियमानुसार उपयोग किया गया तो आवेदक को जानकारी उपलब्ध करा देते ?
नियमानुसार प्राथमिक शाला और मिडिल स्कूल के जन सूचना अधिकारी विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी होते हैं विद्यालय नहीं, जानकारी तो हमने बीईओ कार्यालय से मांगी है सीधे संकूल समन्वयक या शिक्षकों से तो जानकारी भी नहीं मांगी गई है उन्हें जवाब बीईओ कार्यालय में देना चाहिए था।
पत्रकारों ने कहा कि इस पूरे मामले में कानूनी कार्यवाही के लिए एडवोकेट से सलाह ली जा रही है और सभी 47 शिक्षकों के खिलाफ नोटिस भेज कर मानहानि का केस दर्ज करवाया जाएगा ताकि कोई भी शिक्षक खुद को भ्र्ष्टाचार और निलंबन से बचाने पत्रकारों पर झुठे आरोप लगाकर उनके खिलाफ झूठी शिकायत ना करें। यदि शिक्षकों के पास किसी पत्रकार के विरूद्ध कोई सबूत है तो उसे शिकायत के साथ पेश करें।
इस पूरे मामले में ब्लाक के सभी पत्रकार काफी नाराज हैं और उन्होंने अब इन 47 शिक्षकों/ संकूल समन्यवकों की पूरी जानकारी जैसे इनकी मूल पदस्थापना किस स्कूल में है ? इनके संकूलों में समग्र शिक्षा से कितनी अनुदान राशि आती है। संकुल अंतर्गत कितने स्कूल आते हैं ? स्कूलों की और संकूल समन्वयकों के आफिस की क्या स्थिति है ? पिछले 5 वर्षों का आय व्यय का ब्यौरा, दैनंदिनी,मेडिकल छूट्टी,साथ ही संकूल समन्वयक अपने मूल स्कूल में कितना समय देते हैं,माध्यम भोजन योजना, जैसे बिन्दुओं पर अब जानकारी मांगने की तैयारी कर रहे हैं ।

बहरहाल शिकायत पुलिस के पास है पुलिस की पूछताछ जारी है देखना होगा कि पुलिस शिकायत के आधार पर और 47 शिक्षकों द्वारा दिए गए बयान और सबूतों की पुष्टि होने पर पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है या मामला झूठी शिकायत का निकलने पर 47 शिक्षकों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध करती है?
अंत में एक सवाल क्या शिक्षकों द्वारा एसपी बिलासपुर को की गई शिकायत की जानकारी संकुल प्राचार्य, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कोटा, BRC कोटा,जिला शिक्षा अधिकारी और सँयुक्त संचालक बिलासपुर को है या नहीं! है तो फिर वो मौन क्यों हैं और नहीं तो फिर क्या एक्शन लिया जाएगा?





