संयुक्त संचालक बिलासपुर अपीलीय कोर्ट में RTI की दुर्गति: 30 दिन का नियम, 196 दिन बाद भी नहीं मिला न्याय, JD,अश्विनी भारद्वाज के आदेश को 7 दिन से दबाए बैठा है, उनका अपना कार्यालय। DEO भी नहीं करते उनके आदेश का पालन!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की क्या स्थिति है, इसका जीता-जागता उदाहरण बिलासपुर शिक्षा संभाग में सामने आया है। जहाँ RTI कानून कहता है 30 दिन में जानकारी दो, वहीं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिलासपुर ने एक आवेदक को 196 दिन से कागजों में उलझा रखा है। आलम यह है कि संभागीय अपीलीय अधिकारी अश्विनी भारद्वाज, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर द्वारा खुले कोर्ट में 930 रुपये वापस करने का मौखिक आदेश देने के 7 दिन बाद भी आज तक लिखित आदेश जारी नहीं किया गया।
मामला क्या है?
आवेदक सतेन्द्र वर्मा निवासी सरकंडा, बिलासपुर ने दिनांक 12/03/2026 को जन सूचना अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को RTI आवेदन दिया। उन्होंने तत्कालीन प्राचार्य एवं ,संकुल समन्वयक बिजौर, विकासखंड बिल्हा द्वारा समग्र शिक्षा के अनुदान में गबन/भ्रष्टाचार की शिकायत जांच रिपोर्ट की सत्यापित प्रति मांगी थी।
पैसे लेकर भी समय पर जानकारी नहीं दी अब लौटाने के नाम लगवा रहे चक्कर
जन सूचना अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर ने आवेदन के 13 दिन बाद दिनांक 25/03/2026 को पत्र क्रमांक 3503 से 465 पृष्ठों की जानकारी बताकर 930 रुपये प्रतिलिपि शुल्क जमा करने को कहा। आवेदक ने उसी दिन यानी 30/03/2026 को रसीद क्रमांक B 2834, सीरियल नं. 73 से 930 रुपये नगद जमा कर दिए। [रसीद संलग्न]

नियम के अनुसार राशि जमा करने के बाद 30 दिन के भीतर यानी 12/04/2026 तक जानकारी मिल जानी चाहिए थी, लेकिन DEO कार्यालय ने आज-कल कह कर टालना शुरू कर दिया।

परेशान होकर आवेदक नें 9 दिन बाद अधिकारी की उदासीनता व बदहाल व्यवस्था से थक हार कर 20/04/2026 को पत्र लिखकर धारा 7 के तहत निःशुल्क जानकारी और जमा राशि लौटाने की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब आवेदक नें 20/04/2026 को जन सूचना अधिकारी कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को बाकायदा पत्र लिखकर कि सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा-7 का पालन करते हुए आवेदक को सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराने व कार्यालय द्वारा जमा कराई गई राशि 930 रु लौटने। फिर जिला शिक्षा अधिकारी नें समय मांगा,फिर जिला शिक्षा अधिकारी का स्थानांतरण हो गया फिर फिर समय मांगा गया लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।

फिर किया गया अपील
आवेदक ने जन सूचना अधिकारी को किए गए आवेदन के 196 दिन बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के मौखिक व लचर व्यवस्था से परेशान होकर न्याय की उम्मीद से 23/07/2026 को प्रथम अपीलीय अधिकारी, संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर, अश्विनी भारद्वाज के यहाँ प्रथम अपील धारा 19(1) में दायर की।

अपील पर कार्यालय ने 29 दिन बाद 20/08/2026 को सुनवाई हेतू प्रथम नोटिस जारी किया। अपील दायर करने के 38 दिन बाद 31/08/2026 को पहली सुनवाई हुई जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का बड़ा बाबू बिना किसी दस्तावेज बिना किसी जानकारी के उपस्थित हुआ यहाँ पर सुनवाई के दौरान अपीलीय अधिकारी नें फटकार लगाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को स्वयं जानकारी के साथ उपस्थित होने का पत्र जारी करनें निर्देश दिया, अगली सुनवाई 45वें दिन दिनाँक 7/9/26 को दूसरी सुनवाई हुई लेकिन इस दिन भी जिला शिक्षा अधिकारी उपस्थित नहीं हुए बल्कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का बड़ा बाबू फिर बिना किसी दस्तावेज के खाली हाथ बिना जानकारी पहुंचा सुनवाई हुई फिर आदेश दिया गया है DEO को बुलाया जाय और फिर सुनवाई टल गई अगली सुनवाई नियम विरुद्ध 55वें दिन यानी 17/09/2026 को हुई बाबू ही आया जिला शिक्षा अधिकारी फिर भी नहीं आए… अपीलीय अधिकारी नें फैसला सुनाते हुए कोर्ट में ही बड़े बाबू के माध्यम से मौखिक रूप से जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को आदेश दिया कि अपीलार्थी को अविलंब 930 रुपये वापस किए जाए।

लेकिन आज दिनांक 24/09/2026 तक उस आदेश की लिखित प्रति ही जेडी अर्थात संयुक्त संचालक के कार्यालय से जारी नहीं की गई है। रहा सवाल आवेदक अर्थात अपीलार्थी 930 रु के लिए
बड़े सवाल:
- RTI अधिनियम की धारा 7(6) स्पष्ट कहती है कि समय-सीमा में जानकारी न देने पर जानकारी निःशुल्क देनी होगी। फिर भी जन सूचना अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर नें राशि क्यों नहीं लौटाई?
- जब संभाग स्तर के प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश को ही 7 दिन तक टाइप नहीं किया जा रहा, तो जिला और ब्लॉक स्तर पर RTI की क्या दुर्दशा होती होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है!
शिक्षा विभाग के इस गैरजिम्मेदाराना और उदासीन रवैये से स्पष्ट है कि उच्च अधिकारियों द्वारा सतत मॉनिटरिंग नहीं की जा रही। वहीं जिला प्रमुख कलेक्टर भी इस मामले में गांधी जी के तीन बंदरों की भूमिका में हैं।
आवेदक ने अब द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग रायपुर में जाने की तैयारी कर ली है।
बहरहाल देखना होगा कि क्या सूचना के अधिकार को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा!





