तिलकधारियों को निपटाने वाला “बाबू” खुद निपटा, गुरु-चेला की लड़ाई में DEO की उड़ी नींद!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर/बिलासपुर शिक्षा विभाग पिछले कुछ महीने से वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। दो DEO से शुरू हुई रस्साकसी अब बाबुओं के लिए शतरंज की बिसात नजर आ रही है शह और मात के शिकायतों जैसे शस्त्र का बेखौफ बेहिसाब बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है।
शह और मात देने जिस तरह के कूटनीति, राजनीति और रणनीति जैसे चालाकियों के मोहरों का इस्तेमाल किया जा रहा है यह दृश्य शिक्षा विभाग के दफ्तर में आसानी से देखा जा सकता है। शिक्षा गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा जोरों पर है – गुरु और चेले की लड़ाई! सूत्रों की मानें तो जिस तिलकधारी बाबू को तिलकधारियों को निपटाने का सौगंध खाते, लेते,बोलते सुना गया था चर्चा में था,आज वही सौगंध,काल बन गया है। आज वही बाबू खुद अपने ही बुने मकड़जाल में फंस गया है।
क्या है गुरु-चेला का खेल? – सूत्रों के हवाले से
सूत्र बताते हैं कि चेले ने गुरु को निपटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। इसमें उसे शुरुआती सफलता भी मिली, लेकिन गुरु पुराना खिलाड़ी निकला। गुरु ने फन काढ़ने का मौका मिलते ही सौदे की ऐसी चाल चली कि चेला चारों खाने चित्त हो गया। ऐसा सुनाई दे रहा है।
अब आलम ये है कि गुरु और चेला दोनों ही अपने-अपने बचाव के लिए कभी सच कभी झूठ की नाव में गहरे पानी में गोता लगा रहे हैं और अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक गलियारों में चक्कर काट रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि दोनों ही नेता-मंत्री के दरवाजे की चौखट लांघ रहे हैं, कहीं ठुकराए जा रहे हैं तो कहीं तिलकधारी मामले में खरी खरी खरीखोटी सुनाया जा रहा है। कहीं आश्वासन का झुनझुना थमाया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शी अनुसार चंगु मंगू SS की जोड़ी दौड़ धूप में लगी हुई है।
DEO साहब की उड़ी नींद –
कहते हैं कि इस गुरु-चेला की लड़ाई का सबसे ज्यादा असर एक तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी,और उनके कार्यालय पर पड़ा है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि एक शिक्षा अधिकारी इन दिनों न ढंग से खा रहा है, न सो रहा है। बस उस पल को कोस रहा है कि एक व्यक्ति विशेष के समझाने के बाद भी आस्तीन में सांप पाले रखा। अब उस साँप का ज़हर धीरे धीरे उन्हें सस्पेंसन की ओर खींच रहा है डर है कि कहीं तीन तीन महिलाओं की आह और युक्तियुक्तकरण, संशोधन,अनुकंपा का खाव डूबा ना दे नाव!
सबसे ऊंचे दर्जे के सूत्र ने तो यहां तक कहा कि बाबू साहब खुद को बड़े नेताओं का करीबी बताते हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बड़े साहब के संज्ञान के बिना ही निचले स्तर पर कार्रवाई हो गई। दोनों खासमखास बाबू नेता-मंत्री के दरवाजे पर हाजिरी लगा रहे हैं।
कहावत भी है – गुरु की आह लेकर चेला कभी सुखी जीवन नहीं जी सकता। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग के इस शतरंज की बिसात में बिछे मोहरों की चाल से अगली मात किसकी होती है।
एक कहावत है कि सारी खुदाई एक तरफ, जोरू का भाई एक तरफ लेकिन यह कहावत गुरु चेला द्वंद में फेल नजर आती है क्योंकि जीजा के रहते साला सस्पेंड कर दिया गया!
पेट्रोल पंप के पीछे स्कूल वाला मास्टर भी महंगी वाली चार पहिया वाहन में कभी DEO को सैर सपाटे कराता था,उन दिनों गुरु चेला के दौर में भी लक्ष्मी जी की कृपा अपार थी,संशोधन, प्रमोशन,अनुकंपा,युक्तियुक्तकरण,और मीठी वाणी ऐसी, की सुगर हो जाय अब निशाने पर है यह सबसे ऊंचे दर्जे के सूत्र का दावा है! अगर आप नव प्रकार के रत्न का नाम जानते हैं तो आप टारगेट के करीब हैं। बंजर भूमि पर आरा चलाने वाले को क्या कहेंगे?
(नोट – यह खबर विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है, इसका किसी व्यक्ति विशेष से संबंध नहीं है।)





