खनिज घोटाले में नया खुलासा – सरकारी जमीन पर 2 एकड़ की पत्थर खदान, 4 साल से बंद, पहले व्यपगत घोषित, फिर उसी खनिज अफसर ने लिखा – एक मौका दे दो!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। बिलासपुर, RTI कार्यकर्ता को खनिज शाखा से मिले दस्तावेज ने बिलासपुर के खनन में चल रहे भ्र्ष्टाचार के खेल को उजागर कर दिया है।
ग्राम कोटा, तहसील कोटा में खसरा नंबर 672/1 की 2.024 हेक्टेयर शासकीय जमीन पर 30 साल (2012-2042) के लिए साधारण पत्थर की खदान श्रीमती पियूषा मिश्रा को लीज पर दी गई है।
खनिज शाखा के पत्र दिनांक 27.04.2026 (क्रमांक 81/अ.प्र.क्र. 41/2026) में खुद स्वीकार किया गया है कि लीजधारी ने “विगत कुछ वर्षों से खनन संक्रिया पूर्णतः बंद रखा” और सूचना भी नहीं दी। इसलिए नियम 51(6)(7) के तहत 27 जनवरी 2026 को इसे व्यापगत (Lapsed) घोषित किया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि उसी पत्र की कंडिका 5-6 में उप संचालक (ख.प्रशा.) खनिज शाखा बिलासपुर ने संचालक नवा रायपुर को लिखा है कि “यह जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन है, एक अवसर दिया जा सकता है।”
सवाल उठता है – सरकारी जमीन 4 साल बंद क्यों पड़ी रही?
इस दौरान शासन को कितनी रॉयल्टी का नुकसान हुआ?
और व्यापगत के बाद बहाली की सिफारिश क्यों?
दस्तावेज में “कोई टीप की आवश्यकता नहीं” लिखकर नोटशीट न देने की बात भी कही गई है।
ये तीन पन्ने कोई साधारण RTI जवाब नहीं, ये बिलासपुर खनिज माफिया का कन्फेशन लेटर है।
दस्तावेज क्या है-
पहला पन्ना – 07/09/26 का –
कलेक्टर खनिज शाखा बिलासपुर ने लिखा – पियूषा मिश्रा, ग्राम कोटा, तहसील कोटा की साधारण पत्थर की नस्ती सह फाइल जो संचालक रायपुर भेजी गई है, उसकी कॉपी मांगी थी। उन्होंने 2 पन्ने दिए हैं।
दूसरा-तीसरा पन्ना – वही 2 पन्ने – क्रमांक 81/खनि/अपील 41/2026 दिनांक 27.04.2026
ये पत्र बिलासपुर से सीधा संचालक, भौमिकी तथा खनिकर्म, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर को भेजा गया है।
विषय है – अपील प्रकरण क्रमांक 41/2026, अपीलार्थी श्रीमती पियूषा मिश्रा पति स्व. सरजू प्रसाद मिश्रा, फ्लैट 303 सिद्ध शिखर अपार्टमेंट, नर्मदा नगर, मंगला चौक, बिलासपुर
खदान का विवरण –
- ग्राम कोटा, तहसील कोटा, खसरा नं. 672/1 (शासकीय भूमि) रकबा 2.024 हेक्टेयर
- खनिज – साधारण पत्थर
- अवधि – 31.05.2012 से 30.05.2042 तक 30 साल के लिए
ये खदान 27.01.2026 को व्यपगत (Lapsed) घोषित कर दी गई थी!
7 कंडिकाओं में पूरा खेल-
कंडिका 1-4 का सार – पियूषा मिश्रा ने कहा मुझे सुनवाई का मौका नहीं मिला। कलेक्टर ने लिखा – “झूठ है”। 24.11.2025 को कारण बताओ नोटिस दिया, 05.12.2025 को जवाब आया, जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो 27.01.2026 को व्यापगत घोषित कर दिया।
– छ.ग. गौण खनिज नियम 2015 के नियम 51(6) और 51(7) के तहत।
मतलब – लीजधारी ने कई सालों से खनन बंद रखा, बंद रखने की सूचना कार्यालय को नहीं दी, शुल्क जमा नहीं किया, वैध अनुमति लेने में देरी की जानकारी नहीं दी, इसलिए पट्टा स्वतः ही व्यापगत श्रेणी में आ गया। इसीलिए कार्यालय ने व्यापगत घोषित किया।
कंडिका 5 एवं 6 में पूरा यू-टर्न – सबसे बड़ा घोटाला –
खनिज विभाग का कलेक्टर कार्यालय खुद लिख रहा है –
“उक्त उत्खननपट्टा अपीलार्थी के जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन है। अतः अपीलार्थी को एक अवसर प्रदान किया जा सकता है।”
मतलब पहले नियम के तहत व्यपगत घोषित किया, और उसी पत्र में रायपुर को लिख दिया कि “जीविकोपार्जन है, एक मौका दे सकते हैं”!
कंडिका 2 – “कोई टीप की आवश्यकता नहीं है।” – मतलब फाइल में अफसरों की नोटशीट नहीं चाहिए, सीधा मामला निपटाना है।
“बिलासपुर में 2 हेक्टेयर सरकारी जमीन की 30 साल की पत्थर खदान 4 साल से बंद, कलेक्टर ने व्यापगत घोषित की, फिर खुद ही सिफारिश की – जीविकोपार्जन है, एक मौका दे दो!” समझ से परे है!
बिलासपुर। कोटा तहसील के ग्राम कोटा में खसरा नंबर 672/1 की 2.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर साधारण पत्थर की 30 साल (2012-2042) की लीज श्रीमती पियूषा मिश्रा के नाम है। RTI में मिले दस्तावेज ने बड़ा खुलासा किया है। खनिज शाखा ने माना है कि लीजधारी ने “विगत कुछ वर्षों से खनन संक्रिया पूर्णतः बंद रखा”, बिना सूचना के। नियम 51(6)(7) के तहत इसे 27 जनवरी 2026 को व्यापगत घोषित किया गया।
लेकिन इसी व्यापगत आदेश के 3 महीने बाद 27 अप्रैल 2026 को उप संचालक खनिज शाखा बिलासपुर ने संचालक नवा रायपुर को जो जवाब भेजा है, उसमें कंडिका 5-6 में खुद ही लिखा है कि “जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन है, एक अवसर दिया जा सकता है।”
सवाल – अगर 4 साल खदान बंद थी तो सरकार को रॉयल्टी का कितना नुकसान हुआ? सरकारी जमीन 4 साल क्यों खाली पड़ी रही? और व्यापगत करने के बाद फिर से बहाल करने की सिफारिश क्यों?
और कंडिका 2 में “कोई टीप की आवश्यकता नहीं” लिखकर क्या फाइल की नोटशीट छुपाई जा रही है?
सवाल तो उठता है
“अपील प्रकरण 41/2026 पियूषा मिश्रा, खसरा 672/1 कोटा 2.024 हे. के संबंध में – 1. दिनांक 27.01.2026 के व्यापगत आदेश की प्रति 2. 2012 से 2026 तक कितना खनिज निकला, कितनी रॉयल्टी जमा हुई 3. 2020-2025 तक खनन बंद रहा तो नियम 51(7) के तहत विलंब शुल्क कितना जमा किया 4. संचालक न्यायालय में अपील की वर्तमान स्थिति”
ये दस्तावेज ये साबित करता है कि बिलासपुर में सरकारी जमीन की खदानें सालों बंद पड़ी हैं और खनिज अधिकारी द्वारा जीविकोपार्जन के नाम पर बहाल करने का खेल चल रहा है।
इस मामले की शिकायत लोकायुक्त, नवा रायपुर में करनें की तैयारी के लिए अतिरिक्त दस्तावेज कलेक्शन की जा रही है।
💥बिलासपुर का खनिज घोटाला: 49 में से 25 खदानें 20 साल से बंद, एक ही खसरे पर 4-4 पट्टे, फिर भी 2026 में 30 साल का नया पटटा।💥





