बिलासपुर

“थूक में लड्डू नहीं बंधता” – खबर चाहिए तो विज्ञापन का सहयोग भी दीजिए। (एक व्यंग्य😊✍️)

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थूक में लड्डू नहीं बंधता – खबर चाहिए तो विज्ञापन का सहयोग भी दीजिए 😊✍️

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खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। हमारे बुजुर्ग कह गए हैं – ‘थूक में लड्डू बांधना’। मतलब, बिना सामग्री, बिना मेहनत और बिना लागत के केवल बातों से मीठा बनाना। आज यही कहावत पत्रकारिता में सबसे ज्यादा चरितार्थ हो रही है।

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रोज सुबह उठते ही व्हाट्सएप पर दर्जनों प्रेस विज्ञप्ति, फोटो और एक ही आग्रह – “भैया,महोदय, भाई साहब ये खबर लगा देना, बहुत महत्वपूर्ण है।” महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन जब बात सहयोग राशि या एक छोटे से विज्ञापन की आती है तो जवाब मिलता है – “अरे पत्रकार जी, ये तो सामाजिक काम है, सेवा का काम है।”

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जरा सोचिए, क्या बिना आटा, घी, शक्कर के थूक से लड्डू बन सकता है? नहीं ना। वैसे ही बिना कागज, स्याही, प्रिंटिंग मशीन, रिपोर्टर के पेट्रोल,वेबसाइट का खर्च, ऑफिस का किराया, बिजली बिल और स्टाफ का वेतन? इसके बिना क्या कोई खबर छप सकता है क्या?

खबर आपकी है, प्रचार आपका होना है, नाम आपका चमकना है, फूल-माला आपकी फोटो पर लगनी है। अखबार या पोर्टल तो केवल माध्यम है। और उस माध्यम को जिंदा रखने के लिए पैसे लगते हैं, थूक से मतलब मीठी मीठी बातों से काम नहीं चलता।

कई संस्थाएं, कई नेता और कई विभाग,कई संगठन चाहते हैं कि उनकी हर छोटी-बड़ी बैठक, जन्मदिन, नियुक्ति, विदाई समारोह रंगीन फोटो के साथ पहले छपे,उन हजारों, लाखों लोगों तक पहुँचे, उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा रहे, लेकिन साल में एक छोटा सा विज्ञापन, एक शुभकामना संदेश, एक बधाई विज्ञापन देने में उनकी जेब खाली हो जाती है।

यह कैसा न्याय है? मीठा आप खाएं और तोंद पत्रकार की निकले?

इसलिए अब समय आ गया है कि इस ‘थूक में लड्डू बांधने’ की परंपरा को बंद किया जाए।

निवेदन नहीं, नियम है –
जिसे अपनी खबर का महत्व पता है, उसे उस खबर को जिंदा रखने वाले माध्यम का महत्व भी समझना चाहिए। खबर के साथ एक सहयोग, एक छोटा विज्ञापन भी दीजिए। ताकि आपका प्रचार भी हो और पत्रकारिता भी जिंदा रहे।

याद रखिए, सम्मान एकतरफा नहीं होता। आप अखबार,वेबपोर्टल, का सम्मान करेंगे, अखबार,वेबपोर्टल आपका सम्मान करेगा। ध्यान रखिए “थूक से लड्डू नहीं बंधते, सहयोग से रिश्ते बंधते हैं।”

नमस्कार
थूक (मुफ़्त) में लड्डू नहीं बंधता।
रोज 50 लोग खबर भेजते हैं – “भैया छाप दो”
छाप तो देंगे, पर कागज, स्याही, नेट, पेट्रोल, थूक (मुफ़्त) में नहीं आता।
जिसको अपनी खबर प्यारी है, उसको अखबार,वेबपोर्टल को एक छोटा विज्ञापन भी प्यारा होना चाहिए।
खबर + विज्ञापन = सम्मान बरकरार
सिर्फ खबर = थूक में लड्डू

मान्यवर,
आपका समाचार हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हम उसे प्रमुखता से प्रकाशित करते हैं।
परंतु आप भी जानते हैं कि समाचार पत्र / पोर्टल को चलाने में भारी खर्च आता है।
आपसे निवेदन है कि भविष्य में समाचार के साथ एक छोटा सा सहयोग विज्ञापन / शुभकामना विज्ञापन अवश्य प्रदान करें, ताकि हम आपके हर कार्यक्रम को और बेहतर कवरेज दे सकें।
सहयोग से ही पत्रकारिता जीवित है। 😊✍️

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