आस्था के साथ सामाजिक समरसता और पर्यावरण चेतना का केंद्र बना सोंठी का बगलामुखी माँ मन्नादाई मंदिर – नवरात्रि में 827 ज्योति कलशों से जगमगा रहा दरबार।

400 वर्ष पुरानी स्वयं-प्रकट मूर्ति, 35 किमी दूर वनांचल में भक्तों का सैलाब – बलि प्रथा और छुआछूत से मुक्त आदर्श मंदिर

खबर खास छत्तीसगढ़/सीपत/सोंठी, बिलासपुर – बिलासपुर जिले से 35 किलोमीटर दूर, कोरबा सीमा को छूते वनाच्छादित ग्राम सोंठी में स्थित बगलामुखी माँ मन्नादाई मंदिर आज सिर्फ आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और पर्यावरण चेतना का भी बड़ा केंद्र बन गया है।

400 साल पुरानी स्वयं-प्रकट्य मूर्ति –
ग्रामीण मान्यता के अनुसार माँ मन्नादाई की आदिकालीन मूर्ति लगभग 400 वर्ष पुरानी और स्वयं-प्रकट्य है, जिसे सोंठी पहाड़ से धामा धुर्वा नामक गोंड बैगा द्वारा कंधे पर लाकर गाँव में स्थापित किया गया था। प्रारंभ में छोटी कुटिया के रूप में रहे इस मंदिर का 2022 में ग्रामीणों ने चंदा और श्रमदान से जीर्णोद्धार कर भव्य मंदिर, ज्योति कक्ष और तीन एकड़ में विशाल अहाते का निर्माण किया।

60 से 827 ज्योति तक का सफर –
2022 में जहाँ सिर्फ 60 ज्योति कलश जले थे, वहीं इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में 14 घृत ज्योति और 813 तेल ज्योति सहित कुल 827 ज्योति कलशों से मंदिर का ज्योति कक्ष जगमगा रहा है। मंदिर की ख्याति अब बिलासपुर के साथ कोरबा, चांपा-जांजगीर, शक्ति और मुंगेली जिलों तक फैल चुकी है।

नवरात्रि में सेवा का संगम –
मंदिर में नवरात्रि महोत्सव बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है –
- प्रथम दिवस – हजारों महिलाओं-पुरुषों की बाजे-गाजे के साथ भव्य कलश यात्रा
- द्वितीय दिवस – झांकी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और जगराता
- तृतीय दिवस – शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय खम्हरिया के सौजन्य से निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर – जिसमें 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने उपचार व दवाइयाँ लीं
- षष्ठम दिवस – भारतीय डाक विभाग द्वारा बच्चों के जीरो बैलेंस खाते और महिला-बालिका योजनाओं की जानकारी

अंधविश्वास से मुक्त, समरसता का प्रतीक –
मंदिर का संचालन पंजीकृत संस्था माँ मन्नादाई सेवा समिति द्वारा किया जाता है। समिति अध्यक्ष एवं जांजगीर समग्र शिक्षा के जिला मिशन समन्वयक (पूर्व DEO बिलासपुर) रामेश्वर जायसवाल ने बताया – “यह मंदिर पूरी तरह अंधविश्वास से मुक्त है। 2022 से यहाँ बलि प्रथा और शराब पीकर प्रवेश पूर्णतः निषिद्ध है। यहाँ छुआछूत नहीं है – सभी वर्ग के लोग एक साथ सेवा और अंतिम दिन एक साथ भंडारे में भोजन बनाते हैं।”

पर्यावरण चेतना का केंद्र –
तीन एकड़ परिसर में “माता की बगिया” विकसित की गई है, जहाँ औषधीय और फूलदार पौधे लगाए गए हैं। ग्रामीण समय-समय पर श्रमदान कर वृक्षारोपण और सफाई करते हैं। शारदीय नवरात्रि में दुर्गा प्रतिमा भी स्थापित है, वहीं चैत्र नवरात्रि में जवारा बोया जाता है।

सेवा में जुटे ग्रामीण –
मंदिर की देखरेख में उपाध्यक्ष भीम प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष भूपेंद्र तिवारी, सचिव राजकिशोर ठाकुर सहित हीरालाल पटेल, श्याम सुंदर पटेल, अशोक जायसवाल, जगदीश जायसवाल, संतोष वैष्णव, प्रीतम सिंह ठाकुर, घनश्याम श्रीवास, भूषण पटेल, महेंद्र चंद्रिकापुरे, मान सिंह पोर्ते, लक्ष्मी नारायण, शिव सिंह, पुजारी पं. प्रमोद तिवारी, बैगा कार्तिक राम मरकाम, किशन मरकाम सहित समस्त ग्रामवासी और महिलाएं सक्रिय हैं।





