शिक्षक कम नेताजी : विधायक का ‘खास’ बनकर शिक्षा विभाग पर भारी पड़ा अयोग्य गुरुजी, RTI का भी नहीं देता जवाब,शिकायत पर कलेक्टर मौन! बूझो कौन?

जब पद पर राजनीति और शिक्षा पर धूल : प्रतिनियुक्ति पर सवाल, बच्चों को नहीं पढ़ाता पर वेतन शिक्षक का है फुल !
खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। बिलासपुर। इन दिनों जिले में एक सरकारी गुरुजी कम नेताजी सुर्खियों पर हैं। बताया जा रहा है कि पद में शिक्षक एलबी होते हुए भी जुगाड़ से बिना कक्षा में बच्चों को पढ़ाए प्रमोशन लेकर मिडिल स्कूल तक पहुंच गए और अब एक विकासखंड में प्रतिनियुक्ति के नाम पर चिपके बैठे हैं। आरोप है कि प्रतिनियुक्ति में भी नियम-शर्तों के लिहाज से अयोग्य होने के बावजूद विधायक की अनुशंसा का हवाला देकर अवैध अटैचमेंट पर टिके हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में जिस तरह अयोग्य जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति को योग्य प्राचार्य संघ ने न्यायालय में चुनौती देकर हटवाया था, उसी तर्ज पर इस शिक्षक की योग्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि जिस पद पर ये पदस्थ हैं, वहां जन सूचना अधिकारी भी यही हैं, लेकिन आज दिनांक तक सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई कई जानकारियों का जवाब नहीं दिया गया। प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की भी कथित तौर पर अवहेलना की जा रही है, मामला अब राज्य सूचना आयोग में लंबित बताया जाता है।
स्थानीय प्रधान पाठकों और सीनियर शिक्षकों में नाराजगी है। चर्चा है कि पहले ये जनपद पंचायत में मध्यान्ह भोजन का टोकन काटने का काम देखते थे। कभी नियमित कक्षा नहीं ली, फिर भी वेतन शिक्षक के नाम पर ले रहे हैं। इनके करीबी ही कहते हैं कि इन्हें राजनीति और फोटो खिंचाने का शौक है, पहले एक दल में थे अब दूसरे दल का झंडा बुलंद कर रहे हैं। इन्हें किसी के द्वारा सवाल पूछना बिल्कुल पसंद नहीं।
इनका सबसे दिलचस्प पहलू RTI का है। बताया जाता है कि जब कोई आवेदक जानकारी मांगने जाता है तो पहले पूछते हैं – आप क्या करते हो, कहां रहते हो। फिर कहते हैं – मैंने आपके बच्चों को पढ़ाया है! जबकि आवेदक का कहना है कि उसके बच्चे तो प्राइवेट स्कूल से पढ़कर निकल चुके हैं और इन्होंने कभी पढ़ाया ही नहीं। नियमानुसार जानकारी देने के बजाय बरगलाने का आरोप लग रहा है।
शिक्षा विभाग में खुद को बड़ा अधिकारी समझने की मानसिकता, कभी विधायक का खास, कभी कलेक्टर का बॉस, कभी मंत्री का रिश्तेदार बताकर धौंस जमाने के चर्चे आम हैं। शिक्षक कहते हैं – जब कलेक्टर ने ही आंखें बंद कर रखी हैं तो हम क्या करें। उधर इस पूरे खेल से विधायक की छवि धूमिल होने की भी चर्चा तेज है।
कहावत है – झूठ के पैर नहीं होते, सच सौ पर्दों में भी सच ही रहता है। अब देखना है कि जिला प्रशासन इस फर्जी प्रतिनियुक्ति और RTI दबाने के मामले में कब आंखें खोलता है।





