बिलासपुर

कौन बनेगा अगला DEO…! बताइए तो सही ?

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में पिछले 6 -7 दिनों से DEO का पद खाली पड़ा है,कुर्सी खाली पड़ी है DEO का चेम्बर खाली पड़ा है आगंतुकों का तांता समस्याओं का अंबार और ऑफिस में पसरा हुआ सन्नाटा बता रहा है कि योग्य जिला शिक्षा अधिकारी की तलाश में जुटा हुआ है पूरा का पूरा शासन और इसलिए ही राजधानी गुलज़ार है!


DEO पद का वजन देख कोई योग्य, DEO बनना नहीं चाहता उसके बाद भी सबको (योग्य) जिला शिक्षा अधिकारी का बेसब्री से इंतजार है। बड़े अरमानों के साथ बिसात बिठाया तो गया था,लेकिन अपनों ने ही चाल चल दी।


बिलासपुर न्यायधानी
में इन दिनों सबसे चर्चित नाम “योग्य जिला शिक्षा अधिकारी” की तलाश का है। शिक्षा विभाग का पूरा महकमा इस एक पद के लिए दौड़-भाग कर रहा है। फाइलें इधर से उधर, सिफारिशें ऊपर से नीचे और चर्चाओं का बाजार गर्म है। बंगले में शोर मचा हुआ है अंदर से आवाज आती है सामान्य नहीं चाहिए, पिछड़ा भी नहीं तो क्या! योग्य चाहिए!

पिछले 6-7 दिनों से DEO का पद खाली पड़ा है। स्कूलों में शिक्षकों की समस्या, ट्रांसफर-पोस्टिंग, बोर्ड परीक्षा की तैयारियां और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सब अटका हुआ है। लेकिन कुर्सी पर कौन बैठेगा, यही तय नहीं हो पा रहा। कहीं प्रशिक्षु को प्रभार सौंपा गया तो?

क्या है मामला?
सूत्रों के मुताबिक योग्य और “सेटिंग” वाले नामों की सूची मंत्रालय से लेकर विभाग तक कई बार घूमी। हर कोई चाहता है कि (काजल की कोठरी में) उसका “अपना” अधिकारी आए। इसी खींचतान में फाइलें अटकी पड़ी हैं। चयन में टाइम लग रहा है।

एक तरफ शिक्षक संघ चाह रहे हैं कि जल्द नियुक्ति हो। दूसरी तरफ विभागीय अफसर “प्रभारी” भी तय नहीं कर पा रहे हैं। सीनियर छुट्टी लेकर घर बैठ गए हैं नतीजा – न कोई निर्णय, न कोई जवाबदेही। (दफ्तर में चना, चाय और फल्ली खाकर टाइम पास किया जा रहा है।)

न्यायधानी में चर्चाओं का दौर
कैंटीन से लेकर राजधानी सचिवालय तक एक ही चर्चा – “कौन बनेगा अगला DEO?”

किसी के नाम पर मुहर लगते-लगते रह जाती है, तो किसी की सिफारिश ऊपर से आ जाती है। इसी बीच राजधानी “गुलज़ार” हो गई है। दावेदार, बिचौलिए और शुभचिंतक सभी एक्टिव हैं।

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा – “काम तो चल रहा है, पर स्थायी अधिकारी के बिना बड़े फैसले नहीं हो पा रहे। बच्चों और शिक्षकों दोनों को दिक्कत हो रही है।”

सवाल बड़ा है
क्या वाकई हमें “योग्य” जिला शिक्षा अधिकारी चाहिए, या “अपना” जिला शिक्षा अधिकारी?
जब तक ये तय नहीं होगा, तब तक न्यायधानी को और इंतजार करना पड़ेगा।

और तब तक… फाइलें चलती रहेंगी, चर्चाएं चलती रहेंगी और DEO कार्यालय भगवान भरोसे चलता रहेगा।

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