“शिक्षक दिवस” पर एक “शिक्षक” की कलम नें लिखा सच✍️!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर। शिक्षक दिवस पर एक शिक्षक नें अपनी कलम से कुछ ऐसा लिख दिया कि सरकारी स्कूल की सच्चाई ही निकल कर सामने आ गई। शिक्षक लिखते हैं कि सरकारी स्कूल में पढ़ाना सिर्फ पढ़ाना भर नहीं होता। ये पढ़ना होता है हालात को जिसमे हमारे बच्चे रह रहे हैं,पढ़ रहे हैं एक ही क्लास में एक बच्चे को 20 तक पहाड़ा याद है वहीं दूसरे को गिनती तक की समझ नहीं है।
उबड़ खाबड़ रास्ते में चलते स्कूल आते हैं लेकिन उनके पैरों में चप्पल तक नहीं होता देखकर आत्मा रो उठती है।
मानसिक स्तर पर देखा जाय तो हर कक्षा में कम से कम बच्चों के 5 ग्रुप बनेंगे। जबकि स्कूल में 5 क्लास के लिए एक शिक्षक पदस्थ हैं। बच्चों पर हाथ उठाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। चाहता हूँ कि वह स्कूल से डरें नहीं, स्कूल से प्यार करें मगर कैसे यह नहीं जानता?
मैं उनको गिनती सिखाने की कोशिश करता हूँ वो खिड़की से झूल रहे होते हैं। मैं वर्णमाला की पहचान कराना चाहता हूं वो पेंसिल से कटोरे पर संगीत की प्रैक्टिस करते रहते हैं, मैं चाहता हूँ कि वो फूल,पत्ती,तितली,बादल बनाएं पर कहाँ? ना कागज है ना रंग है…रंग तो खैर कहीं नहीं है! ये सभी तो परी कथाओं की बातें हैं। इन बच्चों के कर्ली हेयर में कई दिनों से तेल नहीं पड़ा,बाल पूरी तरह उलझे हुए हैं, पिछले साल के यूनिफार्म में एक भी बटन सलामत नहीं है। इनकी आंखों में गौर से देखिए हल्का पीलापन है, कई बार तो ये कंजेक्टिव आइरिस का शिकार भी हो जाते हैं, खेतों में धान रोपने की वजह से पैरों की उंगलियों के बीच में सड़न हो गई है, दर्द भी है, खेल खेल में अक्सर चोटिल भी हो जाते हैं। मैं इनके साथ सख्त होने की कोशिश भी करता हूँ लेकिन असफल रहता हूँ क्योंकि उनके साथ तो जिंदगी ही इतनी सख्त है।
स्कूल का हैंडपंप एक गढ्ढे में है जिसमे बरसात का पानी भरा रहता है जिससे हैंडपंप के नल से निकला पानी पीने का जी नहीं करता…लेकिन उन बच्चों के बीच घर से ले जाई गई बोतल से पानी पीना मुझे भीतर तक अश्लील दिखने के अहसास से भर देता है।
स्कूल की टपकती छत के नीचे नंगे फर्श पर बैठकर टूटी ब्लैक बोर्ड पर लिखी इबारत को बड़े ध्यान से देखते हैं मानों सब कुछ सीख लेंगे लेकिन बस्ते में ना तो पेन होती है ना कॉपी होता है,होता है तो सिर्फ किताबों के पन्ने।
जिस बच्चे को कापी ना होने के कारण डपटकर पिता को बुलाकर लाने को कहा था पता चला कि उस बच्चे के पिता है ही नहीं!
और क्या लिखूँ आप सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं… इन सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं!
“एक शिक्षक”





