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अपर कलेक्टर के अपीलीय आदेश की अवहेलना… आदेश के बाद भी RTI की जानकारी नहीं दे रहे खनिज अधिकारी गोलघाटे…आखिर क्या छुपा रहे हैं और किसे बचा रहे हैं अधिकारी!

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर । सरकार की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता लाने तथा भ्र्ष्टाचार उजागर करने,भ्र्ष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में 2005 में लागू किए जाने वाला सूचना का अधिकार अधिनियम कलेक्टर के अधीनस्थ खनिज विभाग में आकर दम तोड़ रहा है।

पाठकों को बता दें कि जिले के मुखिया और कलेक्टर कार्यालय के ठीक पीछे खनिज विभाग का कार्यालय स्थित है जहाँ सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर जनसूचना अधिकारी अर्थात जिला खनिज अधिकारी किशोर कुमार गोलघाटे के अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारी कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझते, इतना ही नहीं जब आवेदक को RTI में कोई जवाब नहीं मिलता तो आवेदक अपर कलेक्टर बिलासपुर के कार्यालय में प्रथम अपील करता है जहाँ एक दो नहीं बल्कि 10 प्रकरणों की सुनवाई होती है और सुनवाई के दौरान 10 के दस प्रकरणों में 10 दिनों में निःशुल्क जानकारी देने का आदेश अपर कलेक्टर ज्योति पटेल द्वारा जारी किया जाता है लेकिन जिला खनिज अधिकारी किशोर कुमार गोलघाटे अपर कलेक्टर के आदेश को भी दरकिनार करते हुए जानकारी देने की बजाए मौन धारण किए हुए हैं क्यों?

सूचना के अधिकार के तहत ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई खनिज अधिकारी अपर कलेक्टर के आदेश की ना केवल अवहेलना कर रहे हैं बल्कि भ्र्ष्टाचार को उजागर होने से रोकने जैसा प्रयास और ठेकेदार को संरक्षण देने जैसा काम कर रहे हैं।

10 आदेशों की अवमानना! RTI आवेदक ने कलेक्टर से की शिकायत

जिला खनिज शाखा बिलासपुर के जन सूचना अधिकारी की मनमानी पर अब कलेक्टर के दरवाजे पर आवेदक नें दस्तक दी गई है। RTI कार्यकर्ता ने 10 के दस जारी आदेश पर खनिज अधिकारी द्वारा जानकारी नहीं दिए जाने की शिकायत आवेदन देकर प्रथम अपीलीय अधिकारी अपर कलेक्टर के 10 आदेशों की अवमानना का आरोप खनिज अधिकारी पर लगाया है और दोषी अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पूरा मामला क्या है?
आवेदक ने बताया कि अपर कलेक्टर/प्रथम अपीलीय अधिकारी ने जून-जुलाई 2026 में खनिज से जुड़े 10 अलग-अलग प्रकरणों में 10 दिनों के भीतर निःशुल्क जानकारी देने का आदेश दिया था।

लेकिन आदेश पारित हुए 10 से 30 दिन से ज्यादा हो गए। इसके बावजूद JSO ने न तो जानकारी दी और न ही अनुपालन आख्या भेजी।

किन-किन मामलों में मांगी थी जानकारी?
शिकायत में बताए गए प्रमुख बिंदु:

  • श्रीमती पीयूषा मिश्रा, खसरा 672/1 से जुड़े 3 प्रकरण – आवेदन, फीस, रायल्टी, भाटक, निरीक्षण पंजी
  • श्री अंकित मिश्रा, खसरा 1452 से जुड़े 3 प्रकरण – अनुज्ञा, दस्तावेज, मजदूरों की संख्या, नियमों का पालन
  • अप्रैल 2025 से अवैध खनिज परिवहन, उत्खनन और रायल्टी अपवंचन का पूरा ब्यौरा
  • जिले की रेत खदानों की सूची – स्वीकृत, संचालित, बंद
  • खनिज कार्यालय में पार्टीशन, AC, रंग-रोगन पर खर्च और टेण्डर का विवरण

RTI कार्यकर्ता की 3 मांगें
कलेक्टर को दिए आवेदन में RTI कार्यकर्ता ने मांग की है:

(1) 3 दिन में जानकारी: JSO को तत्काल निर्देश देकर सभी 10 प्रकरणों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

(2)अनुशासनात्मक कार्रवाई: सिविल सेवा आचरण नियमानुसार अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो।

साथ ही की गई कार्रवाई की लिखित सूचना भी मांगी गई है।

आरोप गंभीर
आवेदन में कहा गया है कि आदेशों का पालन न करना सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि RTI कानून का घोर उल्लंघन है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधा सवाल उठता है।

आवेदन के साथ प्रथम अपीलीय आदेश, अनुपालन पत्र और मूल RTI आवेदनों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।

बहरहाल अब निगाहें कलेक्टर कार्यालय पर टिकी हैं कि 10 आदेशों को ठंडे बस्ते में डालने वाले खनिज अधिकारी पर क्या कार्रवाई होती है।

देखना होगा कि क्या आवेदक को अपर कलेक्टर के आदेशानुसार सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत निःशुल्क जानकारी प्राप्त होगी या फिर सूचना का अधिकार अधिनियम कलेक्टर बिलासपुर से शिकायत बाद भी जानकारी दिलाने में असफल साबित होगा!


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