RTI में आधी-अधूरी जानकारी देने पर जनसूचना अधिकारी पर गिरी गाज, अपीलार्थी को 1102 रुपये वापस कर निःशुल्क देनी होगी पूरी जानकारी।

खबर खास छत्तीसगढ़ बिलासपुर: RTI में आधी-अधूरी जानकारी देने पर जनसूचना अधिकारी पर गिरी गाज, अपीलार्थी को 1102 रुपये वापस कर निःशुल्क देनी होगी पूरी जानकारी।

बिलासपुर, 16 जून 2026
लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-1, बिलासपुर में RTI के तहत आधी-अधूरी जानकारी देने का मामला सामने आया है। प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यालय में शुक्रवार को हुई सुनवाई में जनसूचना अधिकारी को कड़ी फटकार लगी।
क्या है पूरा मामला
अपीलार्थी ने बताया कि उन्होंने अनुबंध 2024-25 से संबंधित 11 बिन्दुओं की जानकारी मांगी थी। साथ ही स्थल निरीक्षण एवं जांच प्रतिवेदन की सत्यापित छायाप्रति भी चाही थी। इसके लिए उनसे 1102/- रुपये शुल्क लिया गया। लेकिन 29.05.2026 को डाक से मिली जानकारी आधी-अधूरी थी।
अपीलार्थी ने सुनवाई के दौरान मांग रखी कि उन्हें पूरी जानकारी निःशुल्क दी जाए और जमा किए गए 1102/- रुपये चेक से वापस किए जाएं। साथ ही जनसूचना अधिकारी के खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारी को पत्र लिखने की मांग भी की।
कार्यपालन अभियंता ने क्या कहा
सी. एस. विंध्यराज,कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-1 बिलासपुर ने अपने बयान में कहा कि जानकारी के लिए धारा-6(3) के तहत सहायक जनसूचना अधिकारी को पत्र भेजा गया था। वहां से जानकारी मिलने में देरी हुई, इसलिए 26.05.2026 को 511 पृष्ठों की जानकारी भेज दी गई थी।
अपील में हुआ फैसला
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपीलीय अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि अपीलार्थी को आदेश प्राप्ति के 2 सप्ताह के भीतर जमा की गई राशि 1102/- रुपये वापस करते हुए शेष जानकारी निःशुल्क दी जाए। कार्यालय में उपलब्ध जानकारी दी जाए और अधिनियम के तहत निषेधित दस्तावेजों को छोड़ दिया जाए।
आदेश में यह भी कहा गया कि अपीलार्थी को निःशुल्क जानकारी देने में जो खर्च आएगा, उसे संबंधित जनसूचना अधिकारी से वसूला जाए, ताकि शासन पर वित्तीय भार न पड़े। वसूली की एम.आर./चालान की प्रति भी कार्यालय को भेजनी होगी।

इसके साथ ही उक्त अपील प्रकरण समाप्त कर दिया गया है और परिणाम पंजी में दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
RTI कार्यकर्ताओं ने बताया जरूरी कदम
इस आदेश को RTI कानून के सही क्रियान्वयन की दिशा में अहम बताया जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि शुल्क लेने के बाद भी पूरी जानकारी नहीं दी जाती। इस आदेश से जनसूचना अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।





